02/11/2025
ये जीत सिर्फ़ एक वर्ल्ड चैंपियन बनने की नहीं है —
ये जीत उस देश की है जहाँ आज भी हमें एक नारा लिखना पड़ता है – “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।”
आख़िर इस नारे की ज़रूरत ही क्यों पड़े, जब हमारी माँ, बहन और बेटियाँ खुद इतनी काबिल, समझदार और मज़बूत हैं?
बेटी को समझाने से पहले, क्यों न बेटे को सिखाएँ कि इज़्ज़त देना क्या होता है।
बेटी सिर्फ़ एक औरत नहीं, वह माँ लक्ष्मी, माँ दुर्गा और माँ अंबे का रूप है।
यह धरती जितनी छत्रपति शिवाजी महाराज की है, उतनी ही रानी लक्ष्मीबाई की भी है —
दोनों ही साहस, शक्ति और सम्मान के प्रतीक हैं।
तो आज 2025 में, अब और इंतज़ार क्यों?
हर जीत, हर हार, हर भावना में अपनी बहनों के साथ खड़े हों।
यही है नई पीढ़ी की शुरुआत — वो युवा जो आलोचना झेलते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि युवा एकता और बेटा-बेटी दोनों का साथ ही इस देश की असली ताकत है।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
मेरे देश को — वर्ल्ड चैंपियन बनने की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🏆
#2025