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राधे राधे!!!!                  😍
29/01/2026

राधे राधे!!!!
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10/01/2026

राधे कृष्ण!!

राधे कृष्ण!!
10/01/2026

राधे कृष्ण!!

हर हर महादेव!!!
22/12/2025

हर हर महादेव!!!

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। ...
29/11/2025

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

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राधे! राधे!                                                      😍
29/11/2025

राधे! राधे!
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20/11/2025

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श्रीमद् भगवद् गीताश्लोक 2.47कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥              ...
12/11/2025

श्रीमद् भगवद् गीता
श्लोक 2.47
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

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पितृ पक्ष की कहानी पितृ पक्ष की शुरुआत महाभारत काल से जुड़ी एक कहानी से हुई। जब महादानी कर्ण का निधन हुआ और वे स्वर्ग पह...
20/09/2025

पितृ पक्ष की कहानी
पितृ पक्ष की शुरुआत महाभारत काल से जुड़ी एक कहानी से हुई। जब महादानी कर्ण का निधन हुआ और वे स्वर्ग पहुँचे, तो उन्हें खाने के लिए भोजन की जगह सिर्फ सोना और जवाहरात दिए गए।

कारण पूछने पर, इंद्रदेव ने बताया कि कर्ण ने अपने जीवन में सब कुछ दान किया, लेकिन अपने पूर्वजों के लिए कभी कोई दान या तर्पण नहीं किया था।

अपनी गलती का एहसास होने पर, कर्ण ने 15 दिनों के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति माँगी। इन 15 दिनों में उन्होंने अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया।

माना जाता है कि यही 15 दिन पितृ पक्ष कहलाए और तभी से पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यह परंपरा चली आ रही है।
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माखन चोर कृष्णगोकुल गाँव में, एक छोटा बालक अपनी शरारतों के लिए मशहूर था। उसका नाम था कृष्ण। वह अपनी मीठी मुस्कान और नटखट...
19/09/2025

माखन चोर कृष्ण

गोकुल गाँव में, एक छोटा बालक अपनी शरारतों के लिए मशहूर था। उसका नाम था कृष्ण। वह अपनी मीठी मुस्कान और नटखट आँखों से सबका दिल जीत लेता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी शरारत थी मक्खन चुराना।

गाँव की गोपियाँ हर रोज़ अपने घरों में ताजा मक्खन जमा करती थीं। वे उसे ऊँचे-ऊँचे मटकों में रखती थीं, यह सोचकर कि कृष्ण वहाँ तक नहीं पहुँच पाएगा। पर वे नहीं जानती थीं कि नटखट कृष्ण के पास एक अनोखी तरकीब थी।

एक दिन, यशोदा मैया ने कृष्ण को घर में अकेला छोड़कर कुछ काम से बाहर जाना पड़ा। तभी कृष्ण को जोर की भूख लगी और उसकी नजर घर के कोने में रखे मक्खन के मटके पर पड़ी। वह जानता था कि सीधे तो वह वहाँ नहीं पहुँच पाएगा। उसने अपने दोस्तों, बंदरों को बुलाया।

जब बंदर आ गए, तो कृष्ण ने उनमें से एक के कंधे पर चढ़कर दूसरे बंदर की पीठ पर पैर रखा और इस तरह एक-एक करके मटके तक पहुँच गए। मटका बहुत भारी था, इसलिए कृष्ण ने थोड़ा-सा मक्खन खाया और बाकी अपने दोस्तों, बंदरों को भी खिलाया।

मक्खन खाने के बाद, कृष्ण ने मटका खाली कर दिया और वहाँ से भाग गए। जब यशोदा मैया वापस आईं, तो उन्होंने देखा कि मटका खाली है। वह समझ गईं कि यह और किसी का नहीं, उनके अपने नटखट लाल का काम है।

यशोदा मैया ने कृष्ण को ढूँढना शुरू किया और देखा कि वह एक पेड़ के नीचे अपनी बंसी बजा रहे थे। उनके मुँह और गालों पर मक्खन लगा हुआ था। यशोदा मैया ने उनसे पूछा, "क्या तुमने मक्खन चुराया है?"

कृष्ण ने मासूमियत से जवाब दिया, "नहीं मैया, मैंने तो नहीं चुराया।"

लेकिन जब यशोदा मैया ने उनके मुँह पर लगे मक्खन को देखा, तो वह हँसने लगीं। वह अपने लाडले की इस प्यारी शरारत पर गुस्सा नहीं कर पाईं। उन्होंने कृष्ण को गले लगा लिया और कहा, "मेरे प्यारे माखन चोर, तुम कभी नहीं सुधरोगे।"

यह कहानी बताती है कि भगवान कृष्ण कितने नटखट, प्यारे और मनमोहक थे। उनकी शरारतों में भी प्रेम और दिव्यता छिपी होती थी, जो हर किसी के दिल को छू लेती थी।

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