16/02/2026
गोवा का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में बस एक ही तस्वीर उभरती है —
बीच, पार्टी, फ्रॉक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, लाउड म्यूजिक और समंदर के किनारे नाच-गाना।
पर इन चमचमाते लाइट्स, डीजे बीट्स और टूरिस्ट भीड़ के ठीक बीच में,
सदियों से चुपचाप खड़ा है एक ऐसा स्थान,
जहाँ सनातन की गहरी साँस चल रही है।
वो स्थान है — महादेव मंदिर, तांबड़ी सुरला।
गोवा का सबसे प्राचीन जीवित हिंदू मंदिर,
जो 12वीं शताब्दी का है।
पुर्तगाली आगमन के बाद गोवा में सैकड़ों भव्य मंदिरों को
तोड़ दिया गया, जलाया गया, मस्जिद-चर्च में बदल दिया गया।
लेकिन यह छोटा-सा शिवालय अपनी प्राचीन गरिमा के साथ
आज भी अडिग खड़ा है — जैसे कह रहा हो:
“मैं टूटा नहीं, मैं झुका नहीं, मैं रहा हूँ और रहूँगा।”
कदंब राजवंश के समय निर्मित यह मंदिर
कर्नाटक की प्राचीन शिल्पकला का अनुपम उदाहरण है।
बादामी-ऐहोल शैली से मिलता-जुलता शिल्प,
बेहतरीन बेसाल्ट पत्थरों से तराशा हुआ।
छोटा मंडप, ब्रह्मा-विष्णु-महेश की सूक्ष्म नक्काशी,
नंदी की शांत मुद्रा और कदंबों का प्रतीक — हाथी का चित्रण।
गुंबद अधूरा-सा लगता है,
मानो समय ने इसे पूरा होने से पहले ही छोड़ दिया हो।
यह गोवा का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो
न तो विदेशी आक्रमणों में ढहा,
न पुर्तगालियों की तोपों और आग में जल सका।
यह कदंब काल की आखिरी जीवित निशानी है
जो आज भी साँस ले रही है।
मंदिर के ठीक पास बहती है सुरला नदी —
शांत, निर्मल, जैसे महादेव के चरणों में सिर झुकाए बैठी हो।
साल भर यहाँ शांति रहती है, पर्यटक कम आते हैं।
लेकिन महाशिवरात्रि की रात
जब बेल-पत्र, धतूरा और भांग की महक हवा में फैलती है,
तो पूरा इलाका जाग उठता है।
मेला लगता है, भजन गूंजते हैं
और वो सनातन चेतना फिर से जीवंत हो उठती है।
तो अगली बार जब गोवा जाने का प्लान बने,
तो सिर्फ बीच और पार्टी ही नहीं —
थोड़ा समय निकालकर तांबड़ी सुरला भी जाना।
जहाँ समंदर की लहरों से ज्यादा गहरी आवाज गूंजती है
हर हर महादेव 🔱
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