20/09/2026
ज्यादा जातीवाद भी नही होव ,फीलिंग्स लेने के मामले मे जाटो का कोई मुकाबला नही है,लगातार तीन बार दिल्ली विश्वविद्यालय से अध्यक्ष क्या बन गया,बस लगे पड़े है,दोपहर से ही दे दना दन रीले पेल रहे है "दिल्ली पर जाटो का कब्जा" "दिल्ली तो जाटो की ही है" " रौला चौधर का चाले चौधर से जाटा की,जबकि आज चुनाव जितने वाला ABVP का उम्मीदवार कह रहा है की ये RSS की जीत है और ये हवाबाजी कर रहे है जाटो ने दिल्ली जीत ली...दिल्ली पर कब्जा कर लिया
औकात क्या है तुम्हारी..प्रवेश वर्मा ने दिल्ली केजरीवाल से छिनकर बीजेपी की गोद मे रखी थी लेकिन दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन बना??? पार्षद बनने तक की काबिलियत नही रखने वाली रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री बन गयी...तब कहाँ चली गई थी ये तुम्हारी उंगली,जिसको तुम हर जगह घुमाते फिरते हो
तुम कहते हो ना की दिल्ली तुम्हारी है,तुम्हारे कब्जे वाली दिल्ली मे जब इन संघियों ने महिला पहलवानों को बाल पकड़-पकड़ कर घसीटा गया तब कहाँ गया था तुम्हारा ये कब्जा,दिल्ली मे ही जगदीप धनखड़ के साथ के साथ इन संघियों ने क्या किया था वो किसी से छुपा हुआ नही है, तब कहाँ गया था दिल्ली पर तुम्हारा मालिकाना हक
दिल्ली है मोदी और अमित शाह की...दिल्ली यूनिवर्सिटी पर आज कब्जा हुआ है RSS का..जरा बताना मोदी के कैबिनेट मे तुम्हारे मंत्री कितने है??? औकात है क्या दिल्ली मे मंत्री की कुर्सी पर बैठने की भी और रही बात दिल्ली यूनिवर्सिटी मे चुनाव जितने की तो वहाँ तुम्हारा संख्याबल ज्यादा है,संख्याबल ज्यादा होने के कारण दोनों ही पार्टियों के लगभग लगभग टिकट तुम्हे ही मिल जाते है और तुम जीत जाते हो नही तो इस बार मीणा सामने आया तो जाट के झाग निकाल दिये
हनुमान बेनिवाल ने क्या कहा था की तुम्हारी कोई औकात नही है,बस हा-हु, हा-हु करते रहते हो,दिल्ली मे तुम्हारी थोड़ी बहुत इज्जत है,डर है क्योंकि दिल्ली के आसपास तुम्हारी संख्या थोड़ी ठीक-ठाक है नही तो तुम्हे दौड़ा-दौड़ा कर मारते
दिल्ली RSS और संघियों की है और तुम सब उस दिल्ली को हासिल करने वाले प्यादे से ज्यादा कुछ नही हों!?