05/05/2026
आज मेरी बेटी ने मुझसे पूछा—
“मम्मा, आप रोज़ इतना बोलती क्यों हो?”
मैं मुस्कुरा दी…
उसे क्या पता,
ये बोलना ही मेरी पहचान है।
कभी रेडियो पर…
कभी बच्चों के बीच…
कभी उन आवाज़ों के लिए
जिन्हें कोई सुनना नहीं चाहता।
मैं बोलती हूँ…
क्योंकि कहीं न कहीं
कोई बच्चा अपनी कहानी सुनाना चाहता है
पर उसे मंच नहीं मिलता।
मैं बोलती हूँ…
क्योंकि कई कहानियाँ
खामोश रहकर मर जाती हैं।
और मैं चाहती हूँ—
मेरी बेटी ऐसी दुनिया में बड़ी हो
जहाँ आवाज़ दबाई नहीं जाती,
सुनी जाती है।
शायद इसलिए…
मैं बोलती हूँ ❤️
Agar aap bhi mante hai ki har aawaz suni jani chahiye to save zarur kre.