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02/06/2026

recently questioned the current fuel pricing strategy

घी खरीदते समय हो जाएं सावधान! कहीं आप नकली घी तो नहीं खा रहे?एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ आसान घरेलू तरीकों से आप शुद्ध और ...
01/06/2026

घी खरीदते समय हो जाएं सावधान! कहीं आप नकली घी तो नहीं खा रहे?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ आसान घरेलू तरीकों से आप शुद्ध और मिलावटी घी की पहचान कर सकते हैं।

भारत में घी सिर्फ खाने का हिस्सा नहीं, बल्कि हर रसोई की पहचान माना जाता है। लेकिन हाल के दिनों में कई घी ब्रांड्स में मिलावट की खबरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि बाजार से खरीदा गया घी असली है या नकली।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ आसान घरेलू तरीकों से आप शुद्ध और मिलावटी घी की पहचान कर सकते हैं।

शुद्ध घी की पहचान क्यों जरूरी है?

मिलावटी घी में अक्सर सस्ते तेल और खराब फैट मिलाए जाते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा घी खाने से दिल, पेट और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

खुशबू और स्वाद से पहचान
असली घी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है। अगर घी से तेज या अजीब गंध आए या स्वाद कड़वा लगे, तो उसमें मिलावट हो सकती है।

हाथ पर रखकर देखें
हथेली पर घी की कुछ बूंदें रखें। शुद्ध घी शरीर की गर्मी से जल्दी पिघल जाता है, जबकि नकली घी देर से पिघलता है या चिपचिपा महसूस होता है।

आयोडीन टेस्ट करें
अगर घी में मिलावट का शक हो, तो उसमें थोड़ा आयोडीन डालें। अगर रंग नीला पड़ जाए, तो समझिए उसमें स्टार्च या दूसरी मिलावट हो सकती है।

फ्रिज टेस्ट भी है असरदार
घी को कुछ देर फ्रिज में रखें। असली घी एकसमान जमता है, जबकि नकली घी अलग-अलग परतों या दानों जैसा दिख सकता है।

ध्यान रखें
हमेशा भरोसेमंद ब्रांड का घी खरीदें।
पैकिंग और खुशबू जरूर जांचें।
शक होने पर घरेलू टेस्ट जरूर करें।

गुलाब जल आइस क्यूब्स से पाएं ठंडी, फ्रेश और ग्लोइंग स्किन भारतीय स्किन केयर में गुलाब जल का इस्तेमाल सालों से किया जाता ...
01/06/2026

गुलाब जल आइस क्यूब्स से पाएं ठंडी, फ्रेश और ग्लोइंग स्किन

भारतीय स्किन केयर में गुलाब जल का इस्तेमाल सालों से किया जाता रहा है। लोग इसे टोनर, फेस पैक और क्लींजर के रूप में इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह त्वचा को ठंडक , नमी और नैचुरल ग्लो देने में मदद करता है।


अगर गर्मियों में आपकी स्किन बेजान और थकी हुई लगती है, तो घर पर बने गुलाब जल आइस क्यूब्स आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकते हैं । ये स्किन को फ्रेश और रिफ्रेश रखने में मदद करते हैं।

जरूरी चीजें
2-3 चम्मच गुलाब जल
4-5 गुलाब की पंखुड़ियां
आइस ट्रे

गुलाब जल आइस क्यूब्स बनाने का तरीका
सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को अच्छी तरह धो लें
अब एक बाउल में गुलाब जल डालें
इसमें गुलाब की पंखुड़ियां मिलाएं
जरूरत हो तो थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं
इस मिश्रण को आइस ट्रे में भरकर फ्रिज में रख दें
जमने के बाद आपके गुलाब जल आइस क्यूब्स तैयार हैं

चेहरे पर कैसे लगाएं?
पहले चेहरे को अच्छे से साफ करके सुखा लें
एक आइस क्यूब लें और हल्के हाथों से पूरे चेहरे पर गोल-गोल घुमाते हुए मसाज करें
कुछ देर बाद मॉइश्चराइजर लगा लें

बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2-3 बार इस्तेमाल करें

इन बातों का रखें ध्यान
बहुत ज्यादा सेंसिटिव स्किन वाले लोग इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करें
अगर चेहरे पर पिंपल्स, एक्ने या स्किन इंफेक्शन है तो इसे लगाने से बचें
इन क्यूब्स को 10-15 दिन तक फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है। स्किन पर कुछ भी नया इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें

मुजफ्फरपुर में एक 40 साल की विवाहित महिला अपने 21 वर्षीय देवर के साथ फरार हो गई। महिला दो बच्चों की मां है और घर से नकद ...
01/06/2026

मुजफ्फरपुर में एक 40 साल की विवाहित महिला अपने 21 वर्षीय देवर के साथ फरार हो गई। महिला दो बच्चों की मां है और घर से नकद व गहने लेकर भागी है। उसका ऑटो चालक पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

बिहार में मुजफ्फरपुर के एक छोटे से गांव में एक चौंकाने वाली प्रेम कहानी ने सबको हैरान कर दिया। इस प्रेम कहानी में जो महिला है, उसकी उम्र 40 साल है और 20 साल पहले उसकी शादी हुई थी, अब वह दो बड़े बेटों की मां है। प्रेम कहानी में दूसरा कैरेक्टर 21 साल का देवर है, जो भाभी की शादी के समय मात्र 1 साल का था। आज भाभी उसी देवर के प्रेम जाल में फंसकर अपने बसे-बसाए घर को छोड़कर भाग गई।

उसके पति गरीबनाथ, ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता है। गरीबनाथ ने मनियारी थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घर से नकद रुपये और गहने लेकर चली गई है। महिला अपने से 19 साल छोटे देवर के साथ भागी है, इस बात को लेकर ज्यादातर लोग हैरान हैं।

गरीबनाथ ने बताया कि उनकी पत्नी अक्सर देवर को घर बुलाकर समय बिताती थी, लेकिन उन्होंने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। क्योंकि उन्हें अंदाजा नहीं था कि देवर-भाभी का यह रिश्ता अब सामान्य नहीं रहा।

महिला का एक बेटा भी अब बालिग हो चुका है, लेकिन मां ने ‘लव मैरिज’ कर सबको हैरान कर दिया है। यह पहली बार नहीं था, जब वह घर से भागी हो। महिला पहले भी एक बार घर छोड़ चुकी थी, लेकिन समझा-बुझाकर वापस लाई गई थी।

इस बार मामला गंभीर है, क्योंकि वह घर से कीमती सामान लेकर गई है। पुलिस अब दोनों की तलाश कर रही है, जबकि गांव में यह प्रेम कहानी चर्चा का विषय बन गई है।

आम को लेकर जितना डर फैलाया जाता है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा संतुलित है. आम में प्राकृतिक शुगर होती है, लेकिन इसका मतलब यह...
30/05/2026

आम को लेकर जितना डर फैलाया जाता है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा संतुलित है. आम में प्राकृतिक शुगर होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डायबिटीज के मरीज इसे बिल्कुल नहीं खा सकते.

क्या डायबिटीज के मरीज आम खा सकते हैं

गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है. चाहे दोपहर के खाने के साथ कटे हुए आम हों या रात में ठंडे आम का बाउल, यह फल स्वाद के साथ कई यादें भी लेकर आता है. लेकिन डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए आम का मौसम अक्सर एक सवाल भी लेकर आता है कि क्या आम खाना सुरक्षित है या इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है?. चलिए जानते हैं कि एक्सपर्ट इसको लेकर क्या कहते हैं.

क्या आम खान सुरक्षित है?

सच यह है कि आम को लेकर जितना डर फैलाया जाता है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा संतुलित है. आम में प्राकृतिक शुगर होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डायबिटीज के मरीज इसे बिल्कुल नहीं खा सकते. एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम खाने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि उसे कितनी मात्रा में, किस समय और किन चीजों के साथ खाया जा रहा है. डॉ. ऐश्वर्या कृष्णमूर्ति ने TOI को बताया कि डायबिटीज के मरीजों को आम से पूरी तरह दूरी बनाने की जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि सही मात्रा और सही तरीके से खाया गया आम संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकता है.

क्या मीठा आम नुकसानदायक होता है?

आम मीठा जरूर होता है, लेकिन सिर्फ मिठास ही यह तय नहीं करती कि कोई चीज नुकसानदेह है या नहीं. पके हुए आम में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. फाइबर डाइजेशन की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर उतनी तेजी से नहीं बढ़ता जितना मीठे ड्रिंक्स या डेजर्ट खाने के बाद बढ़ सकता है. रिसर्च भी बताती है कि कार्बोहाइड्रेट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस सोर्स से आ रहा है और उसमें फाइबर कितना है.

आम खाते समय क्या नहीं करनी चाहिए गलती?

हालांकि समस्या तब शुरू होती है जब आम को गलत तरीके से खाया जाता है. खाली पेट आम का जूस, शेक या मीठे डेजर्ट ब्लड शुगर में तेजी से उछाल ला सकते हैं. डॉ. कृष्णमूर्ति सलाह देती हैं कि आम के टुकड़ों को प्रोटीन या हेल्दी फैट वाली चीजों जैसे बादाम, बीज, ग्रीक योगर्ट या पनीर के साथ खाना बेहतर रहता है. इससे पाचन धीमा होता है और ब्लड शुगर ज्यादा स्थिर रहता है. आम खाने का समय भी काफी मायने रखता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार दिन के समय आम खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर ज्यादा सक्रिय होता है और इंसुलिन बेहतर तरीके से काम करता है. देर रात आम खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. इसलिए छोटे हिस्से में आम खाएं, दिन में खाएं और इसे मीठे डेजर्ट या पैकेज्ड ड्रिंक्स के साथ लेने से बचें.

डायबिटीज के मरीज को क्या रखना चाहिए ध्यान?

मात्रा पर नियंत्रण सबसे जरूरी है. ज्यादातर डायबिटीज मरीज कभी-कभार आधा से एक कप आम आराम से खा सकते हैं, हालांकि यह उनकी दवा, शुगर कंट्रोल और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि डर की बजाय जागरूकता जरूरी है. किसी पसंदीदा मौसमी फल को पूरी तरह छोड़ देने के बजाय उसे संतुलित मात्रा में खाना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

पसीने के बाद की कुछ गलत आदतें बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकती हैं। जानें कौन-सी 5 गलतियां स्किन को नुकसान ...
30/05/2026

पसीने के बाद की कुछ गलत आदतें बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकती हैं। जानें कौन-सी 5 गलतियां स्किन को नुकसान पहुंचाती हैं और त्वचा को सुरक्षित कैसे रखें?

गर्मियों और उमस वाले मौसम में पसीना आना एक सामान्य प्रक्रिया है। पसीना शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है, लेकिन अगर साफ-सफाई और स्किन केयर का ध्यान न रखा जाए, तो यही पसीना बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का कारण बन सकता है। खासकर जिन लोगों को ज्यादा पसीना आता है, उन्हें स्किन इंफेक्शन, रैशेज, खुजली और घाव में संक्रमण जैसी समस्याओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने का मौका देती हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सावधानियों से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

1. लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रखना

पसीने से भीगे कपड़े लंबे समय तक पहने रहने से त्वचा पर नमी बनी रहती है। यह बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकता है। वर्कआउट या ज्यादा पसीना आने के बाद जल्द से जल्द सूखे और साफ कपड़े पहन लें।

2. ज्यादा पसीने के बाद सफाई न करना

पसीने के बाद शरीर की सफाई न करने से त्वचा पर बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। इससे खुजली, दाने और इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा पसीना आने के बाद त्वचा को हल्के साबुन और पानी से साफ करें और अच्छी तरह सुखाएं।

3. बिना धोए कपड़े दोबारा इस्तेमाल करना

गंदे जिम वाले कपड़े, तौलिया और जूते दोबारा इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया और फंगल स्पोर्स फिर से त्वचा पर पहुंच सकते हैं। इसलिए एक्सरसाइज के बाद कपड़ों और तौलिए को धोना और जूतों को अच्छी तरह सुखाना न भूलें।

4. छोटे घावों को नजरअंदाज करना

पसीने और रगड़ की वजह से त्वचा पर चफिंग (Chafing), रेडनेस या छोटे कट लग सकते हैं। अगर इनका समय पर ध्यान न रखा जाए, तो ये इंंफेक्‍शन का कारण बन सकते हैं। ऐसी जगहों को साफ रखें और जरूरत पड़ने पर पाउडर या डॉक्‍टर के सुझाए हुए प्रोडक्‍ट का इस्तेमाल करें।

5. गीली त्वचा पर मोटी क्रीम लगाना

गीली त्वचा पर बहुत ज्यादा भारी या मोटी क्रीम लगाने से नमी फंस सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी से पीड़ित लोगों में इंफेक्‍शन का खतरा ज्यादा हो सकता है। अगर त्वचा पर रेडनेस, सूजन, दर्द बढ़ना या पस जैसी समस्या दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

पसीने से होने वाले इंफेक्शन से बचने के आसान तरीके
पसीना आने के बाद कपड़े बदलें
त्वचा को साफ और सूखा रखें
तौलिया और जिम कपड़े रोज धोएं
ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचें
स्किन पर रगड़ और घाव का ध्यान रखें

निष्कर्ष:

लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना, सफाई न रखना, बिना धोए कपड़े दोबारा इस्तेमाल करना, छोटे घावों को नजरअंदाज करना और गीली त्वचा पर मोटी क्रीम लगाना जैसी गलतियां पसीने से होने वाले इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकती हैं। सही सफाई, सूखी त्वचा और साफ कपड़े पहनने जैसी आसान आदतें अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।

नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर खान सर का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि पेपर लीक अपने आप नहीं होता, बल्कि सुनियोजित...
25/05/2026

नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर खान सर का बड़ा बयान सामने आया है। उनका कहना है कि पेपर लीक अपने आप नहीं होता, बल्कि सुनियोजित तरीके से कराया जाता है, और बाद में किसी को बलि का बकरा बना दिया जाता है। उन्होंने जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या आपको लगता है कि उनके आरोपों में सच्चाई है?

भारत के ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण उद्योग में मल्लिका श्रीनिवासन का नाम आज प्रेरणा और सफलता की मिसाल बन चुका है। एक ऐसे क्ष...
21/05/2026

भारत के ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण उद्योग में मल्लिका श्रीनिवासन का नाम आज प्रेरणा और सफलता की मिसाल बन चुका है। एक ऐसे क्षेत्र में, जिसे लंबे समय तक पुरुष प्रधान माना जाता रहा, मल्लिका ने अपनी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व क्षमता से नई पहचान बनाई।
मद्रास विश्वविद्यालय से इकोनोमेट्रिक्स में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (TAFE) की जिम्मेदारी संभाली और कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उनके नेतृत्व में TAFE आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी बन चुकी है। कंपनी का कारोबार 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है। मल्लिका ने सिर्फ ट्रैक्टर निर्माण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकी नवाचारों के जरिए खेती के तरीके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव लाया।
व्यवसायिक सफलता के साथ-साथ मल्लिका श्रीनिवासन सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने संकरा नेत्रालय, चेन्नई कैंसर अस्पताल और ग्रामीण शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दिया है।
देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म श्री’ सम्मान से नवाजा। इसके अलावा उनका नाम फोर्ब्स एशिया की टॉप 50 पावर बिजनेसवुमेन की सूची में भी शामिल किया जा चुका है।
‘ट्रैक्टर क्वीन’ के नाम से मशहूर मल्लिका श्रीनिवासन की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादे, सही सोच और मेहनत के दम पर किसी भी क्षेत्र में इतिहास रचा जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोलते हुए आतंकवाद और नागरिकों पर हिंसा को लेकर...
21/05/2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोलते हुए आतंकवाद और नागरिकों पर हिंसा को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता से जुड़ा रहा है।
UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथनेनी ने पाकिस्तान के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। भारतीय प्रतिनिधि ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे उठाना अनुचित है।
भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपनी आंतरिक समस्याओं और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा का सहारा लेता है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि दुनिया पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड और उसके दोहरे रवैये को अच्छी तरह जानती है।
बहस के दौरान भारत ने इस साल मार्च में अफगानिस्तान में हुए हमलों का भी जिक्र किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में काबुल स्थित ‘उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर हुए हमले में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए और घायल हुए थे। उन्होंने इसे बेहद अमानवीय और कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया।
भारत ने यह भी कहा कि एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की बात करता है, जबकि दूसरी तरफ निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों का सामना करता रहा है। UNSC में भारत के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों के बीच बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है।

भारत में अब लोग सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत और शुद्धता को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। यही वजह है कि ‘ऑर्गेनिक आइसक्रीम’...
21/05/2026

भारत में अब लोग सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत और शुद्धता को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। यही वजह है कि ‘ऑर्गेनिक आइसक्रीम’ का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। प्राकृतिक सामग्री और हेल्दी विकल्पों के साथ यह बदलाव अब एक नई हेल्थ क्रांति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
साल 2013 में शुरू हुई ‘आइसबर्ग ऑर्गेनिक आइसक्रीम’ इस क्षेत्र में खास पहचान बना चुकी है। यह ब्रांड अपनी आइसक्रीम बनाने के लिए देसी गाय के दूध का इस्तेमाल करता है और इसमें रिफाइंड शुगर का उपयोग नहीं किया जाता। इसकी जगह प्राकृतिक मिठास का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखा जा सके।
कंपनी का फोकस सिर्फ हेल्दी आइसक्रीम बनाना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल रखना भी है। किसानों के साथ सीधी साझेदारी, साफ-सुथरी सामग्री और पारदर्शिता के साथ यह ब्रांड लोगों का भरोसा जीत रहा है।
सबसे खास बात यह है कि आइसबर्ग का उत्पादन सौर ऊर्जा से संचालित होता है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ ऊर्जा की बचत हो रही है, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल रही है।
आज के समय में जब लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में ऑर्गेनिक आइसक्रीम का यह मॉडल स्वाद, स्वास्थ्य और प्रकृति— तीनों का बेहतरीन संतुलन बनाकर नई मिसाल पेश कर रहा है।

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