18/09/2026
त्र्यंबकेश्वर के नील पर्वत पर स्थित साक्षात् शक्ति: माता अन्नपूर्णा! 🌾✨
क्या आप जानते हैं कि जब महादेव ने भोजन को 'केवल माया' कहा, तो माता पार्वती ने पृथ्वी से सारा अन्न ही गायब कर दिया था?
अन्न गायब होते ही भयानक अकाल पड़ा और भूखे पेट संतों और ऋषियों के सारे ध्यान, यज्ञ और पूजा-पाठ पूरी तरह ठप हो गए। तब साक्षात् महादेव को भी यह परम सत्य समझ आया कि 'अन्नमय कोष' (पोषित शरीर) के बिना कोई भी साधना, योग या ज्ञान संभव नहीं है।
सृष्टि की रक्षा के लिए देवी ने 'अन्नपूर्णा' रूप में प्रकट होकर सबको भोजन बांटा और स्वयं महादेव ने भी उनके आगे हाथ फैलाकर भिक्षा मांगी।
जीवन का मूल संदेश: अन्न ही ब्रह्म है। भोजन का एक दाना भी कभी व्यर्थ न गँवाएं! 🙏
अगली बार जब आप त्र्यंबकेश्वर आएं, तो नील पर्वत पर स्थित माता अन्नपूर्णा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन करना न भूलें।
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