24/08/2026
बीवी घर की मलिका होती है, पाँव की जूती नहीं
एक दिन कॉलेज में प्रोफेसर ने एक शादीशुदा लड़की को सबके सामने बुलाया और कहा—
“ब्लैकबोर्ड पर उन 25–30 लोगों के नाम लिखो, जो तुम्हारी ज़िंदगी में सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।”
लड़की ने बोर्ड पर एक-एक करके नाम लिखना शुरू किया।
सबसे पहले माता-पिता, फिर भाई-बहन, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी और आखिर में अपने पति और बच्चे का नाम भी लिख दिया।
प्रोफेसर ने कहा—
“अब इनमें से ऐसे 5 नाम मिटा दो, जिनके बिना तुम किसी तरह जिंदगी गुजार सकती हो।”
लड़की ने कुछ देर सोचा और अपने कुछ दोस्तों के नाम मिटा दिए।
प्रोफेसर ने फिर कहा—
“अब 5 और नाम मिटाओ।”
इस बार लड़की ने पड़ोसियों के नाम मिटा दिए।
फिर प्रोफेसर बोले—
“अब 10 नाम और मिटाने होंगे।”
लड़की कुछ पल चुप रही। फिर उसने अपने कुछ रिश्तेदारों के नाम भी मिटा दिए।
अब बोर्ड पर केवल चार नाम बचे थे—
माँ… पिता… पति… और बेटा।
पूरी कक्षा खामोश थी।
प्रोफेसर ने कहा—
“अब इनमें से भी दो नाम मिटा दो।”
लड़की की आँखें भर आईं। बहुत देर तक वह बोर्ड को देखती रही। आखिरकार काँपते हाथों से उसने अपने माता-पिता के नाम मिटा दिए।
अब केवल पति और बेटे का नाम बचा था।
प्रोफेसर ने आखिरी बार कहा—
“अब इनमें से सिर्फ एक नाम बचना चाहिए।”
लड़की बिल्कुल चुप हो गई। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे।
बहुत देर सोचने के बाद उसने अपने बेटे का नाम भी मिटा दिया।
बोर्ड पर सिर्फ पति का नाम रह गया।
पूरी कक्षा हैरान थी।
प्रोफेसर ने लड़की से पूछा—
“तुमने ऐसा क्यों किया? आखिर पति का नाम ही क्यों रहने दिया?”
लड़की ने आँसू पोंछे और धीमी आवाज़ में कहा—
“माँ-बाप मेरी जिंदगी की जड़ हैं, मेरा बच्चा मेरी जिंदगी का हिस्सा है… लेकिन मेरा शौहर वह इंसान है जिसके साथ मुझे अपनी पूरी जिंदगी का सफर तय करना है।”
“मैं अपना हर सुख-दुख उसके साथ बाँट सकती हूँ। अपनी कमजोरियाँ, अपनी परेशानियाँ और अपने दिल की ऐसी बातें भी उससे कह सकती हूँ, जो शायद मैं किसी और से न कह पाऊँ।”
“माँ-बाप एक दिन हमसे दूर हो जाते हैं, बच्चे बड़े होकर अपनी दुनिया बसा लेते हैं… लेकिन एक अच्छा जीवनसाथी जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव में साथ खड़ा रहता है।”
फिर उसने कहा—
“मैं अपनी जिंदगी में बहुत कुछ खोने का दर्द सह सकती हूँ, लेकिन उस इंसान को खोने का ख्याल भी मेरे लिए बहुत भारी है, जिसके साथ मैंने अपनी पूरी जिंदगी बाँटने का फैसला किया है।”
प्रोफेसर कुछ पल खामोश रहे।
फिर उन्होंने पूरी कक्षा की ओर देखा और कहा—
“याद रखिए, रिश्तों की कीमत किसी एक खेल से तय नहीं होती। हर रिश्ता अपनी जगह अनमोल होता है। यह सिर्फ एक सोचने वाला प्रयोग था, कोई रिश्तों की असली तुलना नहीं।”
और एक बात हमेशा याद रखिए—
एक अच्छी बीवी घर की इज़्ज़त होती है, घर की मलिका होती है।
उसे प्यार, सम्मान और अपनापन दीजिए।
बीवी घर की मलिका होती है, पाँव की जूती नहीं।
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