Daily Bihar

Daily Bihar बिहार का, बिहारियों के लिए
(3)

बिहार कैबिनेट के 25 बड़े फैसले: किसानों को बकाया, बुजुर्गों को पेंशन, शहरों को पानी और उद्योगों को रफ्तारपटना। मुख्यमंत्...
08/06/2026

बिहार कैबिनेट के 25 बड़े फैसले: किसानों को बकाया, बुजुर्गों को पेंशन, शहरों को पानी और उद्योगों को रफ्तार
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में किसानों के बकाया भुगतान से लेकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सिंचाई परियोजनाओं, शहरी जलापूर्ति, निवेश प्रोत्साहन, स्वास्थ्य सेवाओं और भूमि सुधार तक कई बड़े निर्णय शामिल हैं। सरकार ने एक साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शहरी आधारभूत संरचना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत
कैबिनेट ने गोपालगंज स्थित सासामुसा शुगर वर्क्स के पुनः संचालन का रास्ता साफ करते हुए क्षेत्र के गन्ना किसानों के पुराने बकाये के भुगतान के लिए 42.99 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। लंबे समय से अपने भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे किसानों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और आजीविका बढ़ाने के लिए नई योजना
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से "विकसित भारत-जी राम जी योजना, बिहार-2026" को मंजूरी दी गई है। यह योजना 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। सरकार का दावा है कि इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
जल संसाधन विभाग पर सबसे ज्यादा फोकस
कैबिनेट बैठक में जल संसाधन विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
इकरनाला पम्प नहर योजना के शेष कार्यों के लिए 251.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत विभिन्न योजनाओं के लिए 520 करोड़ रुपये से अधिक खर्च की मंजूरी दी गई।
सिंघवरणी जलाशय योजना और उससे निकलने वाली मुख्य नहर के पुनर्स्थापन के लिए 196.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।
इन योजनाओं का उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाना, बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करना और किसानों को बेहतर जल प्रबंधन उपलब्ध कराना है।
शहरों में पानी और सीवरेज व्यवस्था मजबूत होगी
नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत अमृत 2.0 मिशन की कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।
बिहारशरीफ में I&D और STP परियोजना – 101.63 करोड़ रुपये
डीहपुर जलापूर्ति परियोजना – 131.88 करोड़ रुपये
बेगूसराय सीवरेज नेटवर्क और STP परियोजना – 375.86 करोड़ रुपये
सहरसा जलापूर्ति परियोजना – 127.45 करोड़ रुपये
इन परियोजनाओं के पूरा होने से लाखों शहरी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल और बेहतर सीवरेज सुविधा मिलेगी।

15 साल पुराने सरकारी वाहनों पर बड़ा फैसला
परिवहन विभाग के दो प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप पुराने सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में संशोधन किया गया है। इससे सरकारी वाहनों के निस्तारण की प्रक्रिया और आसान होगी।

भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारी की सेवा समाप्त
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के तत्कालीन जिला अवर निबंधक मणिरंजन के खिलाफ कठोर कार्रवाई को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी।

ई-स्टाम्प व्यवस्था में बदलाव
बिहार स्टाम्प सेवा प्रदाता अनुज्ञप्ति एवं ई-स्टाम्प आपूर्ति नियमावली, 2026 में संशोधन करते हुए सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम क्रेडिट सीमा 10 लाख रुपये निर्धारित करने का फैसला लिया गया है।

जल जीवन मिशन 2.0 को मिली मंजूरी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रस्ताव पर जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी।

तीन महीने की पेंशन के लिए 3,666 करोड़ रुपये
कैबिनेट का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा संबंधी फैसला पेंशन योजनाओं को लेकर रहा।

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को मई, जून और जुलाई 2026 की पेंशन राशि के भुगतान के लिए 3,666.21 करोड़ रुपये की अग्रिम स्वीकृति दी है।
इस राशि का लाभ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना, दिव्यांग पेंशन योजना, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, बिहार दिव्यांग पेंशन योजना और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के लाभार्थियों को मिलेगा।
चुनावी वर्ष में यह फैसला करोड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

उद्योग लगाने वालों को मिलेगी बड़ी सुविधा
उद्योग विभाग के प्रस्ताव पर राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी (Single Nodal Agency) के रूप में अधिकृत करने की मंजूरी दी गई है।

इस फैसले के बाद उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और स्वीकृति प्रक्रिया तेज होगी। सरकार का मानना है कि इससे बिहार में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव
कैबिनेट ने बिहार राज्य नैदानिक संस्थान (रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन) संशोधन नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। इससे राज्य में संचालित निजी जांच केंद्रों और नैदानिक संस्थानों के पंजीकरण एवं निगरानी व्यवस्था को नया ढांचा मिलेगा।

वाणिज्य-कर विभाग और भूमि सुधार में संशोधन
वाणिज्य-कर विभाग की क्षेत्रीय लिपिकीय सेवा भर्ती, प्रोन्नति एवं सेवा शर्त नियमावली, 2026 को मंजूरी।
बिहार काश्तकारी (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति।
इन फैसलों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और भूमि प्रबंधन से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिलेगा।

क्या है इन फैसलों का राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश?
कैबिनेट के फैसलों को देखें तो सरकार ने तीन मोर्चों पर एक साथ ध्यान केंद्रित किया है—

पहला, किसानों, बुजुर्गों, विधवाओं और गरीब तबकों को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाएं।
दूसरा, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और सीवरेज जैसी आधारभूत संरचना पर बड़े पैमाने पर निवेश।

तीसरा, उद्योग, निवेश, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों के जरिए शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश।
कुल मिलाकर, चुनावी माहौल के बीच हुई इस कैबिनेट बैठक में सरकार ने विकास, सामाजिक सुरक्षा और निवेश—तीनों क्षेत्रों को साधने का प्रयास किया है। यह बैठक केवल नियमित प्रशासनिक मंजूरियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे सरकार की आने वाले समय की विकास प्राथमिकताओं की भी स्पष्ट झलक मिली है।

























08/06/2026

राजद ने नहीं दिया एमएलसी टिकट तो बागी हुए शिवचंद्र राम, प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बच्चों की तरह रोने लगे, बोले- भगवान ऐसा जिंदगी किसी को ना दे

MLC टिकट नहीं मिलने पर शिवचंद्र राम का बड़ा फैसला, सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफापटना: बिहार विधान परिषद चुनाव में उम्मी...
08/06/2026

MLC टिकट नहीं मिलने पर शिवचंद्र राम का बड़ा फैसला, सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा
पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से नाराज राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया, जिससे वे आहत हैं।

शिवचंद्र राम ने कहा कि वह पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि फिलहाल वह राजद के प्राथमिक सदस्य बने हुए हैं, लेकिन भविष्य में पार्टी में बने रहने या नहीं रहने को लेकर जल्द फैसला लेंगे।

उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवचंद्र राम जल्द कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय ले सकते हैं। चर्चा यह भी है कि उनकी नाराजगी का फायदा उठाने के लिए भाजपा समेत एनडीए के कुछ दल उनसे संपर्क में हैं। हालांकि भाजपा में जाने की अटकलों पर शिवचंद्र राम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एमएलसी चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के बाद राजद में यह पहला बड़ा असंतोष सामने आया है। पार्टी ने एक बार फिर पूर्व एमएलसी सुनील सिंह पर भरोसा जताया है, जिसके बाद टिकट के दावेदारों में नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिवचंद्र राम पार्टी छोड़ने का फैसला करते हैं तो यह राजद के लिए चुनावी साल में एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। अब सबकी नजर उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।

मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, एमएलसी टिकट कटने से बढ़ा संकटपटना: बिहार सरकार में पंचायती राज ...
08/06/2026

मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, एमएलसी टिकट कटने से बढ़ा संकट
पटना: बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर घिरती नजर आ रही है। उनकी दोबारा मंत्री नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद उन्हें दोबारा मंत्री पद की शपथ कैसे दिलाई गई।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए कहा है कि कोई गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। याचिका में दावा किया गया है कि इस संवैधानिक प्रावधान का बार-बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और दीपक प्रकाश की पुनर्नियुक्ति इसी सीमा की कसौटी पर सवालों के घेरे में है।
दरअसल, दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बनाया गया था, जबकि उस समय भी वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में सरकार में बदलाव के बाद 7 मई 2026 को गठित नई सरकार में उन्हें फिर से मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। याचिका में इसी पुनर्नियुक्ति को चुनौती दी गई है।

इस बीच उनकी मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि एनडीए ने विधान परिषद चुनाव के लिए घोषित उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया है। सोमवार को नामांकन की अंतिम तिथि है और टिकट नहीं मिलने के कारण उनके लिए किसी सदन की सदस्यता हासिल करने का तत्काल रास्ता बंद होता दिख रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाने के लिए उनकी मां और सासाराम से विधायक स्नेहलता कुशवाहा इस्तीफा दे सकती हैं, जिससे उपचुनाव के जरिए उन्हें विधानसभा पहुंचाने की कोशिश की जा सके। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और एमएलसी टिकट कटने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कानूनी लड़ाई और राजनीतिक समीकरणों के बीच दीपक प्रकाश अपना मंत्री पद बचा पाते हैं या नहीं।

08/06/2026

पवन सिंह ने किया नॉमिनेशन, एमएलसी चुनाव में भोजपुरी एक्टर और गायक की जीत तय हैं, जबरदस्त भीड़

राजद ने सुनील सिंह पर फिर जताया भरोसा, एमएलसी चुनाव में बनाया उम्मीदवारपटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार विधान परि...
08/06/2026

राजद ने सुनील सिंह पर फिर जताया भरोसा, एमएलसी चुनाव में बनाया उम्मीदवार
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। पार्टी ने एक बार फिर वरिष्ठ नेता और वर्तमान विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

सुनील सिंह राजद के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पार्टी संगठन और शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच मानी जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से उनके पारिवारिक संबंध भी चर्चा में रहते हैं और राजनीतिक हलकों में उन्हें राबड़ी देवी का मुंहबोला भाई कहा जाता है।

सहकारिता क्षेत्र में भी सुनील सिंह की मजबूत पहचान रही है। वह लंबे समय तक बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव मार्केटिंग यूनियन (बिस्कोमान) के अध्यक्ष रहे हैं। किसानों और सहकारी संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें राज्य की राजनीति में अलग पहचान दिलाई है।

राजद नेतृत्व का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव, राजनीतिक सक्रियता और विभिन्न वर्गों में पकड़ को देखते हुए सुनील सिंह पार्टी के लिए मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी ने लगातार एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। ऐसे में राजद द्वारा सुनील सिंह को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी के भीतर उनके बढ़ते कद और नेतृत्व के विश्वास के तौर पर देखा जा रहा है।

शिवहर में मंत्री श्वेता गुप्ता के आवास पर चला बुलडोजर!बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के आवास/निजी प...
08/06/2026

शिवहर में मंत्री श्वेता गुप्ता के आवास पर चला बुलडोजर!
बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के आवास/निजी परिसर से जुड़े कथित अतिक्रमण पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बुलडोजर चलाकर सड़क की जमीन पर बने हिस्से को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग जुट गए। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाया गया है।

बिहार का ‘फिश कैपिटल’ बना मधुबनी, मछली उत्पादन में पूरे राज्य में नंबर वन, 1.30 लाख टन उत्पादन के साथ मधुबनी सबसे आगे, प...
08/06/2026

बिहार का ‘फिश कैपिटल’ बना मधुबनी, मछली उत्पादन में पूरे राज्य में नंबर वन, 1.30 लाख टन उत्पादन के साथ मधुबनी सबसे आगे, पूर्वी चंपारण दूसरे स्थान पर; अरवल सबसे पीछे
पटना, पंकज कुमार सिंह। मछली उत्पादन के मामले में मधुबनी ने पूरे बिहार में अपनी बादशाहत कायम कर ली है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले ने 1 लाख 30 हजार टन मछली उत्पादन कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मधुबनी अब बिहार का सबसे बड़ा मछली उत्पादक जिला बन गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी चंपारण 99 हजार टन उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि अरवल महज 1008 टन उत्पादन के साथ सबसे निचले पायदान पर है। राज्य में कुल मछली उत्पादन पहली बार 10 लाख टन का आंकड़ा पार करते हुए 10 लाख 28 हजार टन तक पहुंच गया है।

मधुबनी की इस उपलब्धि के पीछे जिले में बड़े पैमाने पर तालाब आधारित मत्स्य पालन, किसानों की बढ़ती भागीदारी और सरकारी योजनाओं का अहम योगदान माना जा रहा है। जिले में रोहू, कतला और अन्य मीठे पानी की मछलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हालांकि राज्य में उत्पादन बढ़ने के बावजूद बिहार अभी मछली उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। प्रदेश की सालाना जरूरत करीब 12.90 लाख टन है, जबकि उत्पादन 10.28 लाख टन तक ही पहुंच पाया है। मांग और उत्पादन के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए अब भी आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल से मछलियां मंगानी पड़ रही हैं।

राज्य सरकार के अनुसार बिहार की करीब 60 प्रतिशत आबादी मछली का सेवन करती है और प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत 12.21 किलोग्राम है। उत्पादन बढ़ने से राज्य को करीब 1200 करोड़ रुपये की बचत हुई है। साथ ही हजारों लोगों को रोजगार और मत्स्य पालकों को बेहतर आमदनी भी मिली है।

मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार तालाब निर्माण, जीर्णोद्धार और हैचरी स्थापना पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाकर बिहार को मछली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।

वैभव सूर्यवंशी के साथ रहेंगे पिता, BCCI ने किया विशेष इंतजामपटना/नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में तेजी से उभर रहे 15 वर्षीय...
08/06/2026

वैभव सूर्यवंशी के साथ रहेंगे पिता, BCCI ने किया विशेष इंतजाम

पटना/नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में तेजी से उभर रहे 15 वर्षीय बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) ने उनके पिता के साथ यात्रा करने की विशेष व्यवस्था की है।

बीसीसीआई सचिव Devajit Saikia ने जानकारी दी है कि श्रीलंका में होने वाली ट्राई-सीरीज के दौरान वैभव के पिता उनके साथ रह सकेंगे। इतना ही नहीं, बोर्ड ने उन्हें वैभव के साथ यूके और आयरलैंड दौरे पर जाने का विकल्प भी दिया है।

महज 15 वर्ष की उम्र में भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना चुके वैभव सूर्यवंशी के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कम उम्र में विदेशी दौरों और लंबे क्रिकेट कार्यक्रमों के बीच परिवार का साथ युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती के लिए अहम माना जाता है।

बिहार के लिए भी यह गर्व का क्षण है कि राज्य का एक युवा खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है और बीसीसीआई भी उसके विकास को लेकर विशेष संवेदनशीलता दिखा रहा है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बन सकते हैं। ऐसे में बोर्ड का यह कदम युवा प्रतिभा को बेहतर माहौल देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

MLC चुनाव में दीपक प्रकाश आउट: NDA की सियासत में फंसे मंत्री, अब कुर्सी पर मंडराने लगा खतरापटना। बिहार विधान परिषद की 10...
08/06/2026

MLC चुनाव में दीपक प्रकाश आउट: NDA की सियासत में फंसे मंत्री, अब कुर्सी पर मंडराने लगा खतरा
पटना। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों (एक उपचुनाव सहित) के लिए एनडीए ने अपने सभी 9 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। उम्मीदवारों की सूची सामने आते ही सबसे ज्यादा चर्चा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर शुरू हो गई है। मंत्री बनने के बाद से ही उनके विधान परिषद भेजे जाने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, दीपक प्रकाश न तो विधायक हैं और न ही विधान पार्षद। ऐसे में मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। माना जा रहा था कि भाजपा उन्हें विधान परिषद भेजकर इस संवैधानिक बाध्यता का समाधान कर देगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ एक व्यक्ति का टिकट कटना नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों की ताकत का पूरा गणित काम कर रहा है।
इस बार परिषद चुनाव में भाजपा, जदयू और लोजपा (रामविलास) के बीच सीटों का बंटवारा पहले ही तय हो चुका था। भाजपा और जदयू ने चार-चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि एक सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में गई। इस समीकरण में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के लिए कोई सीट नहीं बची। जबकि दीपक प्रकाश आरएलएम प्रमुख एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं।

सूत्रों की मानें तो भाजपा के कुछ नेताओं की राय थी कि यदि दीपक प्रकाश को परिषद भेजना है तो उन्हें भाजपा के कोटे से उम्मीदवार बनाया जाए। दूसरी ओर आरएलएम चाहती थी कि इसे गठबंधन के भीतर राजनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाए। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने का नुकसान आखिरकार दीपक प्रकाश को उठाना पड़ा।

राजनीतिक विश्लेषक यह भी याद दिलाते हैं कि हाल ही में उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा गया था। ऐसे में भाजपा के भीतर यह धारणा बनी कि सहयोगी दल को पहले ही पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल चुका है। इसी वजह से परिषद चुनाव में प्राथमिकता भाजपा और जदयू के अपने नेताओं को दी गई।

इधर मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, संवैधानिक भी है। संविधान के प्रावधान के अनुसार कोई व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही बिना विधायक या विधान पार्षद बने मंत्री रह सकता है। यही वजह है कि दीपक प्रकाश का मामला अब कानूनी बहस का विषय भी बन गया है। उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक दायर की जा चुकी है।

ऐसे में परिषद चुनाव की उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि यदि दीपक प्रकाश निकट भविष्य में किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो क्या उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा?

फिलहाल एनडीए की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि विधान परिषद चुनाव ने एक बार फिर गठबंधन के भीतर सीटों की राजनीति, सहयोगी दलों की हैसियत और सत्ता संतुलन की बहस को केंद्र में ला दिया है। दीपक प्रकाश का नाम सूची से बाहर रहना इसी बड़ी राजनीतिक कहानी का सबसे चर्चित अध्याय बन गया है।

Address

Patna New City

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Daily Bihar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Daily Bihar:

Share