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अरावली पर्वत श्रृंखला: एक विस्तृत परिचयअरावली पर्वत श्रृंखला (Aravali Range) भारत के पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रमुख पर्...
22/12/2025

अरावली पर्वत श्रृंखला: एक विस्तृत परिचय
अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravali Range) भारत के पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रमुख पर्वतमाला है। यह दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। 'अरावली' शब्द का अर्थ है 'चोटियों की पंक्ति'।
1. भौगोलिक विस्तार और स्थिति (Geographical Extent)
विस्तार: अरावली पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम में गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर, राजस्थान और हरियाणा को पार करती हुई, उत्तर-पूर्व में दिल्ली तक फैली हुई है।
कुल लंबाई: इसकी कुल लंबाई लगभग 692 किलोमीटर (Some sources say up to 800 km) है।
राज्यवार हिस्सा: इसका सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 80%) राजस्थान में है। शेष हिस्सा गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में आता है। दिल्ली में रायसीना हिल (जहाँ राष्ट्रपति भवन स्थित है), अरावली का ही उत्तरी विस्तार है।
2. भूवैज्ञानिक महत्व: दुनिया की सबसे पुरानी (Geological Significance)
प्राचीनता: अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखलाओं (Oldest Fold Mountains) में से एक है। इसकी उत्पत्ति प्री-कैम्ब्रियन (Pre-Cambrian) काल में हुई थी, जिसका अर्थ है कि यह हिमालय से भी करोड़ों साल पुरानी है।
अवशिष्ट पर्वत (Relict Mountain): जब यह बनी थी, तब यह हिमालय की तरह बहुत ऊंची हुआ करती थी। लेकिन करोड़ों वर्षों तक हवा, पानी और मौसम की मार के कारण यह घिसती चली गई। आज जो हम देखते हैं, वह उस विशाल पर्वतमाला का बचा-खुचा हिस्सा है, इसलिए इसे 'अवशिष्ट पर्वत' कहा जाता है।
3. भौतिक विशेषताएँ (Physical Characteristics)
ऊंचाई: इसकी औसत ऊंचाई 300 मीटर से 900 मीटर के बीच है।
सर्वोच्च शिखर: अरावली की सबसे ऊंची चोटी 'गुरु शिखर' (Guru Shikhar) है, जो राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू (Mount Abu) पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 1,722 मीटर (5,650 फीट) है।
बनावट: यह पर्वतमाला सतत (continuous) नहीं है, बल्कि कई जगहों पर टूटी हुई है, जिससे दर्रे (Passes) बनते हैं, जिनका उपयोग परिवहन के लिए होता है।
4. अरावली का महत्व (Significance of Aravali)
अरावली पर्वत श्रृंखला का भारत के पर्यावरण और अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान है:
जलवायु विभाजक (Climate Divider): यह पर्वतमाला थार के रेगिस्तान (पश्चिम में) और उपजाऊ मैदानों (पूर्व में) के बीच एक प्राकृतिक दीवार की तरह खड़ी है। यह थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है।
वर्षा पर प्रभाव: अरावली की दिशा दक्षिण-पश्चिम मानसून हवाओं के समानांतर (parallel) है। इस कारण मानसून की हवाएं इससे टकराकर बारिश करने के बजाय सीधी निकल जाती हैं, जो राजस्थान में कम बारिश का एक बड़ा कारण है। हालांकि, यह बंगाल की खाड़ी की शाखा से आने वाली हवाओं को रोककर पूर्वी राजस्थान में बारिश करवाती है।
जल-विभाजक (Water Divide): यह उत्तर भारत की नदियों और प्रायद्वीपीय भारत की नदियों के बीच जल-विभाजक का काम करती है।
नदियों का उद्गम: कई महत्वपूर्ण नदियाँ यहाँ से निकलती हैं, जैसे - बनास, लूनी, साबरमती और साहिबी।
खनिज संपदा (Mineral Wealth): अरावली खनिजों का खजाना है। यहाँ तांबा (Copper), जस्ता (Zinc), सीसा (Lead), अभ्रक (Mica), और विभिन्न प्रकार के पत्थर जैसे संगमरमर (मकराना का प्रसिद्ध संगमरमर), ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
5. पारिस्थितिकी और वन्यजीवन (Ecology and Wildlife)
अरावली क्षेत्र कभी घने जंगलों से ढका था। आज भी इसके कुछ हिस्सों में समृद्ध जैव विविधता है।
वनस्पति: यहाँ मुख्य रूप से शुष्क और कटीले वन (Dry Deciduous and Thorny Forests) पाए जाते हैं। ढोक (Anogeissus pendula) यहाँ का प्रमुख वृक्ष है।
वन्यजीव: यहाँ तेंदुआ (Leopard), लकड़बग्घा (Hyena), सियार, नीलगाय और विभिन्न प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व (राजस्थान) अरावली पहाड़ियों में ही स्थित है।
6. प्रमुख चुनौतियाँ और खतरे (Major Challenges)
वर्तमान में अरावली पर्वतमाला गंभीर संकटों का सामना कर रही है:
अवैध खनन (Illegal Mining): निर्माण सामग्री (रोड़ी, पत्थर, रेत) के लिए अरावली पहाड़ियों का बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया है। कई छोटी पहाड़ियाँ तो पूरी तरह गायब हो चुकी हैं।
वनों की कटाई और अतिक्रमण: बढ़ती आबादी और शहरीकरण (विशेषकर गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे क्षेत्रों में) के कारण जंगलों को काटा जा रहा है और जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।
पर्यावरणीय प्रभाव: पहाड़ियों के गायब होने से धूल भरी आंधियां बढ़ रही हैं, भूजल स्तर गिर रहा है और रेगिस्तान के विस्तार का खतरा बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार अरावली के संरक्षण के लिए कड़े आदेश दिए हैं।
7. पर्यटन (Tourism)
माउंट आबू: राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन, जो अपने दिलवाड़ा जैन मंदिरों और नक्की झील के लिए प्रसिद्ध है।
उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर अरावली की पहाड़ियों से घिरी हुई है।
अरावली में कई ऐतिहासिक किले (जैसे कुम्भलगढ़, आमेर) स्थित हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

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बच्चे को दूध पिलाती ये महिला कोई और नहीं बल्कि यूरोप की 31 स्वास्थ्य

मंत्री है, जिनके घर में बच्चे को कोई देखने वाला नहीं था तो बच्चे को मीटिंग सभा में साथ ले कर आ गई, बच्चे को भूख लगते ही उन्होंने से बिना कुछ सोचे उन्हें स्तनपान कराया एक मां ही होती है जो अपने बच्चे के लिए अपनी सुंदरता का त्याग कर देती है मां से प्यार करने वाले कमेंट में .."मां"..
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