01/07/2026
अब पंचायतों को मिलेगा 20% ज्यादा फंड, मुखिया के हाथ में होंगे 50 लाख रुपये सालाना...
बिहार की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की गई है। 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। इस बदलाव के बाद अब एक ग्राम पंचायत को विकास योजनाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय जरूरतों को पूरा करने और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत अब एक पंचायत के मुखिया को वर्ष भर में 16वें वित्त आयोग के मद से 50 लाख रुपये तक की राशि मिलेगी। इससे पहले यह राशि 40 लाख रुपये थी। केवल अनुदान राशि ही नहीं, बल्कि उसके वितरण के फार्मूले में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायत को और 20-20 प्रतिशत हिस्सा पंचायत समिति तथा प्रखंड स्तर को मिलता था। अब नए नियम के अनुसार 80 प्रतिशत राशि सीधे ग्राम पंचायत को मिलेगी, जबकि पंचायत समिति और प्रखंड को 10-10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पंचायतों को स्थानीय स्तर पर विकास योजनाएं लागू करने में अधिक वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही आधारभूत संरचना के विकास, सेवा प्रदायगी और गांवों की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। इसी उद्देश्य से पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को नए नियमों की जानकारी देने के लिए जिला पंचायत संसाधन केंद्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
नोडल पदाधिकारी चंदन कुमार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 की ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के प्रभावी और समन्वित क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान पंचायती राज मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और 16वें वित्त आयोग के उद्देश्यों पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है, ताकि पंचायतें उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें।
नई व्यवस्था में पंचायतों को मिलने वाली राशि के उपयोग के लिए भी प्राथमिकताएं तय की गई हैं। पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रखरखाव जैसे कार्यों को प्रमुखता दी जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण सड़कों के विकास, सामुदायिक परिसंपत्तियों को मजबूत बनाने, हरित और जलवायु अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी खर्च किया जाएगा।
इसके साथ ही पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोत मजबूत करने की दिशा में भी काम करना होगा। सरकार का लक्ष्य है कि बढ़ी हुई वित्तीय सहायता के साथ पंचायतें अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और विकासोन्मुख बन सकें, ताकि गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो और लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं मिल सकें।