30/05/2026
चार साल पहले Save Sultan Palace कैंपेन चला कर लोगों ने सरकार पर दबाव बनाया और जिसके बाद सितंबर 2022 को पटना हाई कोर्ट ने सुल्तान पैलेस के डिमोलेशन पर स्टे लगा दिया था।
जनता के विरोध के बाद सितंबर 2024 में बिहार सरकार ने अपने दो साल पुराने कैबिनेट फ़ैसले को पलट दिया और ये निर्णय लिया था कि इसके पुराने स्ट्रक्चर को संरक्षित करते हुए इसे हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो कि बिहार का पहला ऐसा प्रोजेक्ट होता।
लेकिन लंबे समय तक इस पर आगे कोई काम नहीं हुआ, उसके बाद बिहार सरकार ने कला संस्कृत सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाया, जिसकी कोई पारदर्शिता नहीं थी।
चूँकि मामला पहले से कोर्ट में है, इसलिए ऐसा लगता है कि ये मीडिया की मदद से ख़बर प्लांट कर रहे हैं ताकि इस इमारत को तोड़ा जा सके। क्यूंकि ख़बर में बिना किसी आधिकारिक बयान (Attribution) के लिखी गई है, जिसमे सुलतान पैलेस के हेरीटेज वैल्यू को उजागर करने के बजाय, उसे कमतर दिखाने की कोशिश की गई है, जो मीडिया के नकारात्मक रवैये को उजागर करता है, क्योंकि यही रवैया अब तोड़ी जा चुकी 300 साल पुरानी पटना कलेक्ट्रेट कॉम्प्लेक्स के लिए भी दिखाया गया था, जो कि बहुत ही दुखद है।
असल में जब तक इसमें परिवहन भवन चल रहा था, Transport Tribunal था, तब तक इमारत इस्तेमाल होने की वजह से अच्छे हालत में थी। लेकिन अब इस इमारत पर ताला लटका दिया गया है, और इमारत पर ताला लगने का नुक़सान ये है कि जब इमारत इस्तेमाल में नहीं रहेगी, तो उसमे काई लगेगा, जंगल उगेगा, रंग रौगन भी उखड़ेगा, जिससे वो जर्जर दिखेगी, जिसके बाद सरकार कोर्ट में जर्जर दिख रही इस इमारत की तस्वीर पेश कर के इसे तोड़ने के लिए रास्ता बनाएगी।
ये सब एक नेक्सस है, ऐसा मालूम पड़ता है कि बिहार में सरकार कमिटियाँ ही ये साबित करने के लिए बनाती हैं, कि “सुल्तान पैलेस” जैसी इमारत हेरिटेज बिल्डिंग नहीं हैं, क्यूंकि ये किसी सूची में शामिल नहीं हैं।
जबकि कमेटी में पारदर्शिता होनी चाहिए, और साथ ही रिपोर्ट को पब्लिक किया जाना चाहिए।
- Heritage Lovers Of Patna