12/05/2026
बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर इससे बड़ा सवाल क्या होगा, जब खुद शिक्षा मंत्री बेटियों की पढ़ाई पर ऐसी सोच रखते हों। कथित बयान कि लड़कियों को घर में रहना चाहिए क्योंकि “सब कुछ घर-घर पहुंच जाएगा”, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि महिलाओं की शिक्षा और समान अधिकारों के खिलाफ भी है।
शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, चाहे वह बेटा हो या बेटी। बिहार ने ज्ञान और शिक्षा की विरासत दुनिया को दी है, इसलिए ऐसी प्रतिगामी सोच राज्य की छवि और लाखों बेटियों के सपनों—दोनों को कमजोर करती है। अब समय है प्रगतिशील सोच और जवाबदेही की मांग का, न कि समाज को पीछे ले जाने का।