02/04/2026
चाहे सरकार माने या ना माने, देश में एलपीजी संकट तो है। और ये संकट देश में एलपीजी की कमी के कारण है या नहीं, वो सरकार जाने। लेकिन ये सप्लाई के तरीके से उपजा संकट तो अवश्य है।
और इसको सबसे अधिक झेल रहे हैं प्रवासी। जो भी अपने घर से दूर रह रहा है, वो अधिकतर अवैध रसोई गैस पर निर्भर रहता है। मतलब उसके पास गैस कनेक्शन नहीं होता और वो किसी भी वेंडर से 200-300 अधिक खर्च कर रसोई गैस लेते हैं। मजदूर वर्ग छोटे सिलेंडर पर निर्भर रहता है।
अब आज के हालात में ऐसे वेंडरों ने दाम 1200/1400 से बढ़ाकर सीधे 3000-5000 कर दिया है! छोटे सिलेंडरों को भरने का वैध सिस्टम तो इस देश में कभी दिखा ही नहीं, तो अवैध वाले भी मनमानी कीमत वसूल रहे हैं।
इसी कारण से प्रवासी अपने घर लौट रहे हैं। अभी केवल मजदूर वर्ग लौट रहा है, हालात और खराब हुए तो नौकरीपेशा लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
सरकार को इस बार सबक लेते हुए गैस कनेक्शन के बिना वैध तरीके से गैस की उपलब्धता , छोटे गैस सिलेंडर रिफिलिंग/सप्लाई पर काम करना होगा।
विशेषकर पाइप्ड गैस से हर घर की रसोई को जोड़ने पर ध्यान देना होगा। बिहार में कहने को कई शहरों पाइप्ड गैस है, लेकिन केवल कुछ ही क्षेत्रों में ये सुविधा देकर, कागजों में कोरम पूरा कर दिया गया है। राजधानी पटना में भी एक बड़ी आबादी पीएनजी कनेक्शन से वंचित है।