13/05/2026
अप्सरा एकादशी का उल्लेख मुख्य रूप से पापमोचनी एकादशी से जुड़ी कथाओं में आता है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है।� यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें अप्सरा मंजुघोषा की कथा प्रमुख है।�
कथा का सार
चित्ररथ वन में मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए अप्सरा मंजुघोषा भेजी गई। 57 वर्ष तक विषय भोग के बाद ऋषि ने क्रोधित होकर उसे पिशाचिनी होने का श्राप दिया।�
श्राप से मुक्ति के लिए ऋषि ने चैत्र कृष्ण एकादशी (पापमोचनी) का व्रत करने को कहा, जिससे अप्सरा स्वर्ग लौट सकी।�
इस कथा से इस एकादशी को अप्सरा से जोड़ा जाता है, हालांकि "अप्सरा एकादशी" नाम अलग व्रत नहीं है।�
महत्व और लाभ
यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जो समस्त पाप नष्ट करता है।�
2025 में यह 25 मार्च को थी, पारण 26 मार्च को। 2026 (मई तक) की तिथि पंचांग से जांचें।�
कथा पढ़ने या सुनने मात्र से संकट दूर होते हैं।�
मंजुघोषा अप्सरा को ऋषि मेधावी ने पिशाचिनी होने का श्राप दिया, जिसके बाद उसने कांपते हुए मुक्ति का उपाय पूछा।�
ऋषि ने चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा और स्वयं अपने पिता च्यवन ऋषि के आश्रम चले गए।�
कथा का अंतिम भाग
च्यवन ऋषि ने पुत्र मेधावी के तप भंग पर क्रोध व्यक्त कर उन्हें भी यही व्रत करने का आदेश दिया।�
दोनों ने विधिपूर्वक पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा, जिसके फलस्वरूप मंजुघोषा पिशाचिनी रूप से मुक्त होकर मूल अप्सरा स्वरूप में स्वर्गलोक लौट गई।�
मेधावी ऋषि को भी उनके पापों से छुटकारा मिला; इस व्रत के प्रभाव से सभी संकट दूर होते हैं।�
Umesh Baranwal, Nikku Kumar, Mangal Aggarwal, Mahendra Kumar, Hari Singh Hari Singh, Rakeshchoudhary Rakesh, Anshika Tushar, Ramvs Ramvs, Raj Kumar, Nasru Rana Nasru, Prakash Kumar, Meena Goyal, Raj Kumar, Ramkishor Saini, Kumar Sive, Sajan Kumar Sonkar, Om Prakash Dubye, Bhagwati Kholi