14/09/2024
संस्कृत से जन्मी है हिन्दी,
शुद्धता का प्रतीक है हिन्दी ।
लेखन और वाणी दोनो को,
गौरान्वित करवाती हिन्दी।
उच्च संस्कार, वियिता है हिन्दी,
सतमार्ग पर ले जाती हिन्दी ।
ज्ञान और व्याकरण की नदियां,
मिलकर सागर सोत्र बनाती हिन्दी ।
हमारी संस्कृति की पहचान है हिन्दी,
आदर और मान है हिन्दी ।
हमारे देश की गौरव भाषा,
एक उत्कृष्ट अहसास है हिन्दी ।।
हिंदी दिवस - गिरिजाकुमार माथुर की कविता

एक डोर में सबको जो है बांधती
वह हिंदी है
हर भाषा को जो सगी बहन मानती
वह हिंदी है।
भरी-पूरी हों सभी बोलियां
यही कामना हिंदी है
गहरी हो पहचान आपसी
यही साधना हिंदी है
सौत विदेशी रहे ना रानी
यही भावना हिंदी है
तत्सम, तद्भव, देशी, विदेशी
सब रंगों को अपनाती
जैसे आप बोलना चाहें
वही मधुर, वह मन भाती।
हिंदी दिवस पर अटल बिहारी वाजपेयी की कविता

गूंजी हिन्दी विश्व में
स्वप्न हुआ साकार
राष्ट्र संघ के मंच से
हिन्दी का जयकार
हिंदी का जयकार
हिन्दी हिन्दी में बोला
देश स्वभाषा प्रेम
विश्व अजरज में डोला
कह कैदी कविराय
मेम की माया टूटी
भारत माता धन्य
स्नेह की सरिता फूटी!

हिंदी दिवस पर मैथिली शरण गुप्त की कविता

करो अपनी भाषा पर प्यार।
जिसके बिना मूक रहते तुम, रुकते सब व्यवहार ।।
जिसमें पुत्र पिता कहता है, पतनी प्राणाधार,
और प्रकट करते हो जिसमें तुम निज निखिल विचार ।
बढ़ायो बस उसका विस्तार ।
करो अपनी भाषा पर प्यार ।।
भाषा विना व्यर्थ ही जाता ईश्वरीय भी ज्ञान,
सब दानों से बहुत बड़ा है ईश्वर का यह दान ।
असंख्यक हैं इसके उपकार ।
करो अपनी भाषा पर प्यार ।।
यही पूर्वजों का देती है तुमको ज्ञान-प्रसाद,
और तुमहारा भी भविष्य को देगी शुभ संवाद ।
बनाओ इसे गले का हार ।
करो अपनी भाषा पर प्यार।।