04/09/2025
पेश-ए-खिदमत है GST 2.0!
क्या आपने नोटिस किया है कि सरकार जैसे ही टैक्स कटौती का एलान करती है, तुरंत खुद को “जनता का मसीहा” दिखाने लगती है? 3 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़े धूमधाम से GST 2.0 पेश किया—बिलकुल ऐसे जैसे कोई बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर लॉन्च हो रही हो. हेडलाइन: खाने-पीने की चीज़ों पर टैक्स घटाकर राहत दी जा रही है. लेकिन असली सवाल—ये राहत है या चुनावी बिरयानी? स्वाद तो आएगा, पर पेट कहाँ भरेगा?
GST लागू होने के बाद से ही लोग 5% से 18% तक टैक्स में पिस रहे थे—दूध, पनीर, रोटी तक महंगी. तब सरकार कहती थी, “ये विकास के लिए है!” लेकिन अब जब महंगाई चरम पर है, चुनाव दरवाज़े पर खड़े हैं और अर्थव्यवस्था कछुए की चाल चल रही है, तभी ये अचानक “राहत पैकेज” आया. इत्तेफ़ाक़? बिल्कुल नहीं.
दूध, पनीर, रोटी, खाखरा, पिज़्ज़ा ब्रेड—सब पर अब 0% GST. बटर, घी, बिस्किट, चॉकलेट, आइसक्रीम—18% से घटकर 5% पर. ड्राई फ्रूट्स और जूस भी सस्ते. सुनने में अच्छा लग रहा है, पर खेल बड़ा है. पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स जस का तस, महंगाई वहीँ खड़ी, और जो रेवेन्यू घाटा होगा, वो कहीं और से वसूला जाएगा. मतलब—“एक हाथ से दिया, दूसरे से लिया.”
अमेरिकी टैरिफ से एक्सपोर्ट धड़ाम हुआ, तो अब घरेलू खपत बढ़ाने के लिए ये चाल चली गई. ऊपर से चुनाव नज़दीक हैं—तो सोचा, “जनता को थोड़ा डिस्काउंट दो, वोट भी मिलेंगे और मार्केट भी चलेगा.”
ये GST 2.0 जनता की राहत से ज़्यादा सरकार की इमेज बचाने की कोशिश है. हाँ, आइसक्रीम थोड़ी सस्ती मिलेगी, पर ये तो बस ट्रेलर है. असली मूवी में नए टैक्स फिर से नज़र आ सकते हैं.
तो सवाल यही है—ये राहत कितनी देर टिकेगी? चुनाव तक या हमेशा?
✍️The JholJhal