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रूचि तिवारी पर दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में हुआ हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा हुआ एक गहरा कल...
14/02/2026

रूचि तिवारी पर दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में हुआ हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा हुआ एक गहरा कलंक है।

यह अत्यंत शर्मनाक, अमानवीय और निंदनीय है कि एक महिला पत्रकार, जो शांतिपूर्वक UGC नियमों से जुड़े प्रोटेस्ट को कवर करने गई थीं, उन्हें भीड़ ने घेरकर अपमानित किया, पीटा, उनके कपड़े फाड़े, गला घोंटने की कोशिश की और जाति के नाम पर घृणा से भरे नारे लगाए।

सोचिए… एक लड़की, जो सच दिखाने निकली थी, उसे ही “ये ब्राह्मण है, मारो इसे” कहकर निशाना बनाया गया। यह सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं था, यह पत्रकारिता पर हमला था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला था, और सबसे बढ़कर मानवता पर हमला था।

दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्र में अगर एक महिला सुरक्षित नहीं है, तो फिर देश की बेटियां कहाँ सुरक्षित हैं? विश्वविद्यालय ज्ञान का मंदिर होता है, लेकिन जब वहां भीड़तंत्र, नफरत और जातिवादी हिंसा प्रवेश कर जाए, तो यह पूरे समाज के पतन का संकेत है।

रूचि तिवारी जैसी बेटियां साहस का प्रतीक हैं। वे डरकर घर में बैठने वाली नहीं, सच के लिए लड़ने वाली हैं। लेकिन आज उन्हें ही निशाना बनाया गया, क्योंकि वे सच दिखा रही थीं।

दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। चाहे वे किसी भी संगठन या विचारधारा से जुड़े हों। पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

बहन रुचि, आप अकेली नहीं हैं। आपके अपमान का बदला चुन चुन कर लिया जाएगा यह समाज, हर न्यायप्रिय नागरिक, हर बेटी का सम्मान करने वाला व्यक्ति आपके साथ खड़ा है। न्याय होकर रहेगा।

ूचि_तिवारी

इस्लाम पार्टी की मालेगांव की मेयर ने टीपू शैतान का फ़ोटो लगाया !पर अंबेडकर, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति जी का फ़ोटो गायब ?...
14/02/2026

इस्लाम पार्टी की मालेगांव की मेयर ने टीपू शैतान का फ़ोटो लगाया !

पर अंबेडकर, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति जी का फ़ोटो गायब ?

UGC act 2026 लागू हुआ तो ऐसे ही LINCHYING होगी हमारे बच्चों की शिक्षा के मंदिर में ।महिला के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने...
14/02/2026

UGC act 2026 लागू हुआ तो ऐसे ही LINCHYING होगी हमारे बच्चों की शिक्षा के मंदिर में ।
महिला के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।

भीड़ को और भीड़ के मुखिया को नामजद किया जाए ।
दरभंगा में एक पूरे गाँव को ST- SC act लगा कर फ़साया गया । कहाँ है , और कहाँ है रीढ़-विहीन राजनेता ?

आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?

यह विषाक्त वातावरण तुष्टिकरण और भीड़ की मुफ्तखोरी ही देन है। जब - जब योग्यता और प्रतिभा का दमन हुआ है , समाज - संस्कृति का विनाश हुआ है ।

जिम ऑनर जब सिर्फ 'दीपक' थे तब उनके जिम में 150 मेंबर थे. जब मोहम्मद दीपक हुए तो मात्र 15 मेंबर बचे हैं. ये गांधीजी के सप...
10/02/2026

जिम ऑनर जब सिर्फ 'दीपक' थे तब उनके जिम में 150 मेंबर थे. जब मोहम्मद दीपक हुए तो मात्र 15 मेंबर बचे हैं. ये गांधीजी के सपनों का भारत नहीं है 😁

संविधान समानता की बात करता है, लेकिन सवाल यह है — क्या देश में सच में समानता है?भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है —“...
06/02/2026

संविधान समानता की बात करता है, लेकिन सवाल यह है — क्या देश में सच में समानता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है —
“कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं।”

अनुच्छेद 15 भेदभाव को रोकता है —
धर्म, जाति, लिंग या जन्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं।

अनुच्छेद 16 समान अवसर की गारंटी देता है —
सरकारी नौकरियों में सबके लिए बराबरी।

लेकिन ज़मीनी सच्चाई क्या कहती है?

आज SC/ST Act का इस्तेमाल कई जगह सुरक्षा के बजाय हथियार की तरह हो रहा है।
बिना प्राथमिक जांच, बिना ठोस सबूत —
सीधे गिरफ्तारी, सीधे जेल।

बिहार जैसे मामलों में पूरे गाँव, दर्जनों निर्दोष लोग,
सिर्फ़ एक आरोप के आधार पर सलाखों के पीछे।

क्या यह वही न्याय है जिसकी कल्पना संविधान करता है?

------

विष्णु तिवारी केस — एक सवाल, पूरे सिस्टम पर
उत्तर प्रदेश के विष्णु तिवारी
सिर्फ़ एक SC/ST Act के आरोप के आधार पर
20 साल जेल में बंद रहे।
✔️ न कोई ठोस सबूत
✔️ न कोई त्वरित जांच
✔️ न समय पर न्याय

20 साल बाद अदालत ने कहा —
आरोप झूठा था।

सवाल ये है 👉
जो 20 साल उसकी ज़िंदगी से छिन गए,
उनकी भरपाई कौन करेगा?
अगर कानून निर्दोष को सज़ा दे दे
और सच्चाई दशकों बाद सामने आए —
तो क्या इसे न्याय कहा जा सकता है?
SC/ST Act : सुरक्षा या दुरुपयोग?

यह कानून बना था
दलित और आदिवासी समाज की सुरक्षा के लिए


लेकिन आज कई मामलों में
यह डर का औज़ार बनता जा रहा है।
बिना प्राथमिक जांच
सीधी गिरफ्तारी
सीधा सामाजिक अपमान
बिहार जैसे मामलों में
पूरे गाँव पर केस,
दर्जनों लोग जेल में —
सिर्फ़ एक आरोप के आधार पर।
क्या यही संविधान की मंशा थी?
---

अब बात करें UGC और शिक्षा व्यवस्था की —

आज देश में UGC के नए नियमों को लेकर जो माहौल बना है,
उसमें भी समान अवसर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

योग्यता से ज़्यादा
श्रेणी, कोटा और वर्ग को महत्व दिया जा रहा है।

जब संविधान कहता है Equality of Opportunity,
तो फिर चयन में बराबरी क्यों नहीं दिखती?

आज UGC के नए नियमों और
देश की शिक्षा व्यवस्था में
Equality of Opportunity पर फिर सवाल उठ रहे हैं।
योग्यता पीछे छूट रही है,
पहचान और वर्ग आगे आ रहे हैं।
जब संविधान बराबरी की बात करता है,
तो चयन और अवसरों में
बराबरी क्यों नहीं दिखती?

---

❓ सवाल किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है
❓ सवाल कानून के दुरुपयोग का है
❓ सवाल न्याय और संतुलन का है

अगर कानून निर्दोष को डराए
और दोषी को बचने का रास्ता दे —
तो उस पर सवाल उठाना असंवैधानिक नहीं,
बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है।

अब सवाल आपसे है —
👉 क्या आज का सिस्टम सच में “Equality” दे रहा है? 🤔

> मुसलमान 3400 करोड़> OBC 1300 करोड़> दलित 6360 करोड़> आदिवासी 663 करोड़> सामान्य वर्ग के लिए 🔔 मिला है वहीं बजाओ हिंदू ...
02/02/2026

> मुसलमान 3400 करोड़
> OBC 1300 करोड़
> दलित 6360 करोड़
> आदिवासी 663 करोड़

> सामान्य वर्ग के लिए 🔔 मिला है वहीं बजाओ हिंदू खतरे में है
वैसे सामान्य वर्ग के लिए अच्छा काम है समान वर्ग गजटेड भिखारी में नहीं आता है साहब के नजर में अच्छी सोच
~ पार्टी की दरी चादर फट्टी बिछाने की जिम्मेदारी है।

अब यह क्या नया मेटर है सोशल मीडिया पर मुझे मिला! तो मैं आप लोगों के साथ शेयर कर रहा हूंमै गोगामेड़ी के बिल्कुल नजदीक के ...
01/02/2026

अब यह क्या नया मेटर है सोशल मीडिया पर मुझे मिला! तो मैं आप लोगों के साथ शेयर कर रहा हूं

मै गोगामेड़ी के बिल्कुल नजदीक के गांव से हु और मैने मेरे बुजुर्गों से यही सुना था कि इन मुसलमानों के पूर्वजों को मन्दिर के बाहर साफ सफाई का कार्य करने के लिए रखा था और पहले पुजारी ब्राह्मण थे लेकिन धीरे धीरे इन मुसलमानों ने उन ब्राह्मण पुजारियों को भगा दिया क्योंकि उन बाह्मण पुजारियों का किसी ने साथ नहीं दिया था ,
लेकिन मेरे दादा जी ने उन ब्राह्मण पुजारियों का साथ दिया था और इन मुस्लिम पुजारियों को मन्दिर से बाहर निकाल दिया था , उस समय बुजुर्गो के जीवट रहते हुए कभी भी इन मुस्लिमों की हिम्मत मन्दिर में घुसने की नहीं हुई ,
लेकिन समय बदल गया और वोटों की राजनीति के कारण कांग्रेस के विधायक ने इनको मन्दिर के अंदर पहुंचा दिया , ओर ब्राह्मणों को बाहर निकाल दिया ,
पहले गोगाजी के प्राचीन मन्दिर पर कलमा नहीं था , लेकिन अब देवस्थान विभाग की मिलीभगत के कारण इन मुस्लिम पुजारियों ने अपनी मर्जी से कलमा लिखवा दिया और एक घृणित कार्य भी किया है , माता सरियल की समाधि बना दी है ,जबकि हिन्दू धर्म में केवल सीता माता जी ने धरती माता में समाधि ली थी ,
मन्दिर के पीछे बने पक्के टैंट में भोले भाले भक्त जन को बही खाते लिखने के नाम पर बेवकूफ बना कर लूटते हैं , मन्दिर के पीछे बकरे चढ़ाए जाते हैं ,
कुछ लोकल हिन्दू लालच के कारण इन मुस्लिम पुजारियों के दलाल बने हुए है और खुद के लालच के लिए धर्म को दांव पर लगा रखा है ,
मैने फौज से रिटायर्ड होने के बाद अनेकों बार इन मुस्लिम पुजारियों का विरोध किया लेकिन साथ देने वाले लोग बहुत कम हैं ,
राजस्थान में बीजेपी पार्टी की सरकार है और यहां का विधायक भी बीजेपी पार्टी से है
लेकिन वोट और नोट,, रुपयों,, के लालच में चुपचाप इनका साथ दे रहा है ,
मैं इंतजार कर रहा है कि कब यह सच्चाई हिन्दू धर्म के लोगों तक एक आवाज बन कर सुनाई दे और सम्पूर्ण भारत और केन्द्र सरकार तक पहुंचे , प्राचीन मन्दिर की फोटो शेयर कर रहा हूं , जिसमें कही कलमा नहीं लिखा गया है और न ही सरियल माता की कोई समाधि है

- फौजी देवी लाल सहू , राष्ट्रीय राइफल शूटर,, गांव गोगामेड़ी के बिल्कुल नजदीक
उज्जल वास

यह पढ़ो और असली बात समझो..BSP अध्यक्ष बहन कु. मायावती ने कहा कि, मैं और मेरी पार्टी सरकार द्वारा लाये गये   का खुले मंच ...
01/02/2026

यह पढ़ो और असली बात समझो..

BSP अध्यक्ष बहन कु. मायावती ने कहा कि, मैं और मेरी
पार्टी सरकार द्वारा लाये गये का खुले मंच
से विरोध करते हैं। ये बिल सवर्णों को दबाने का नही
अपितु बहुजनों के /ST_ACT को समाप्त करने के
पिछे सरकार की बहुत बड़ी प्लानिंग है। जिस तरह इस
बिल में साफ लिखा है कि दलित समाज OBC समाज पर
SC/ST_ ACT नहीं लगा सकता है केवल सामान्य पर
ही लगा सकता है। 85% दलितों का शोषण OBC वर्ग द्वारा

ही किया जाता है। सवर्णो द्वारा तो केवल 10 से 12 % ही
होता है। अब तो ये कानून कॉलेजों तक ही है लेकिन धीरे
धीरे OBC इसे गांवों तक लेकर आ जायेगा। लेकिन हमारे ही
कुछ तथाकथित दलितों के मसिहा नेता जो
आने की खुशी में लड्डू बांट रहे हैं। जो इस ACT की असली
सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं।
क्या आप BSP अध्यक्ष
कु. मायावती जी की बात से सहमत हैं...
..🙏
...

📱 जो लोग सोशल मीडिया पर रोज़“अपनी जाति के साथ अन्याय हो रहा है”“हमारी जाति दबाई जा रही है”जैसी बातें करते हैं…🤔 ज़रा असल...
01/02/2026

📱 जो लोग सोशल मीडिया पर रोज़
“अपनी जाति के साथ अन्याय हो रहा है”
“हमारी जाति दबाई जा रही है”
जैसी बातें करते हैं…

🤔 ज़रा असली ज़िंदगी में देखो —
अक्सर वही लोग
✔️ अपने ही समाज के गरीब लोगों को दबाते हैं
✔️ कमजोरों का पैसा हड़पते हैं
✔️ जमीन पर कब्ज़ा करते हैं
✔️ नीचे समझी जाने वाली जातियों को तंग करते हैं

📢 कैमरे के सामने —
👉 खुद को मसीहा दिखाते हैं
🏠 असल ज़िंदगी में —
👉 खुद जालिम बन जाते हैं

जहर का दाम बढ़ने वाला है बाजार में फिर भी, स्वर्ण को फ्री में मिलेगी इस सरकार में।।
01/02/2026

जहर का दाम बढ़ने वाला है बाजार में
फिर भी, स्वर्ण को फ्री में मिलेगी इस सरकार में।।

गलत सबके साथ होता है इसको झुठलाना नाइंसाफी होगी, लेकिन इस तरह का एक तरफा नियम उससे भी बड़ा नाइंसाफी ही है..!
31/01/2026

गलत सबके साथ होता है इसको झुठलाना नाइंसाफी होगी, लेकिन इस तरह का एक तरफा नियम उससे भी बड़ा नाइंसाफी ही है..!

बिना एक शब्द बोले, बहुत कुछ कह दिया इस तस्वीर ने।
जब काबिलियत पर 'पहचान' और 'सियासत' भारी पड़ जाए, तो शिक्षा का स्तर यही रह जाता है।
एक तरफ 'General Category' का टैग और दूसरी तरफ बिना बात के इल्जामों का डर।
UGC काले कानून को वापस लिया जाए, कौन - कौन सहमत है, कमेंट में अपनी राय जरूर दे।

क्या ही बोलूं मैं, अब देश का माहौल खराब नहींबल्कि कही और जा रहा है  #अखंडभारत अब  #खंड होने की ओर अग्रसर है.!
31/01/2026

क्या ही बोलूं मैं, अब देश का माहौल खराब नहीं
बल्कि कही और जा रहा है
#अखंडभारत अब #खंड होने की ओर अग्रसर है.!

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