29/09/2026
खलीफा अब्दुल हमीद सानी और फ्रांस के थिएटर का वाकिया!! खलीफा अब्दुल हमीद सानी एक दिन अपने वजीरों और हुकूमत के ओहदेदारों के दरमियान मौजूद थे कि अचानक एक हुकूमती ओहदेदार ने आपको आकर एक ऐसी खबर सुनाई कि आपका रंग गुस्से से लाल हो गया।
हुकूमती ओहदेदार के हाथों में फ्रांस का अखबार मौजूद था जिसमें एक खबर छपी थी कि फ्रांस के एक थिएटर में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताखी का ड्रामा पेश किया जाएगा।
वाकिये की तफसील:
अखबार की खबर: अखबार में इश्तहार छपा था कि एक शख्स ने एक ड्रामा लिखा है जिसमें हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का किरदार भी बनाया है। यह ड्रामा पेरिस के थिएटर में पेश होना था।
खलीफा का जलाल: खलीफा ने अखबार का पेज लेकर ऊंची आवाज में पढ़ना शुरू किया। आपका चेहरा लाल हो चुका था और जिस्म कांप रहा था। आपने फरमाया कि अगर वह मेरे बारे में बकवास करते तो मुझे कोई गम नहीं होता, लेकिन अगर वह मेरे दीन और मेरे रसूल की शान में गुस्ताखी करें तो मैं जीते जी मर जाऊं। मैं तलवार उठा लूंगा, चाहे मेरी गर्दन कट जाए ताकि कल बरोज कयामत रसूलल्लाह के सामने शर्मिंदगी न हो।
फ्रांसीसी सफीर की तलबी: इसी बीच सुल्तान ने फ्रांसीसी सफीर को तलब करने के अहकामात जारी कर दिए। कुछ ही देर में फ्रांसीसी सफीर दरबार में हाजिर था। सुल्तान ने जलाल में फरमाया, हम मुसलमान हैं, अपने रसूल से बहुत ज्यादा मोहब्बत करते हैं। मैं खलीफतुल इस्लाम अब्दुल हमीद खान हूं। अगर तुमने इस ड्रामे को न रोका तो मैं तुम्हारी दुनिया तबाह कर दूंगा।
फ्रांस को पैगाम: फ्रांसीसी सफीर ने कांपते हुए दरबार से निकलकर फौरी तौर पर फ्रांस अपनी हुकूमत को पैगाम भेजा कि अगर यूरोप को अपनी आंखों से जलता हुआ नहीं देखना चाहते तो फौरी तौर पर इस ड्रामे को रोक दो। उस्मानी लश्कर हुक्म के इंतजार में खड़े हैं।
खिलाफत का हुक्मनामा: खलीफा ने अपने मुशीर-ए-खास को तलब करके पूरी खिलाफत में सर्कुलर जारी करने का हुक्म दिया कि फ्रांसीसियों की इस्लाम के खिलाफ कार्रवाइयां हद से आगे बढ़ चुकी हैं। अब हम खिलाफत का परचम बुलंद करने जा रहे हैं।
अंजाम: पूरी दुनिया मुंतजिर थी कि अब क्या होगा। यूरोप कांप उठा और फ्रांस ने घुटने टेक दिए। कुछ देर बाद एक हुकूमती ओहदेदार हंसता हुआ बगैर इजाजत कमरे में दाखिल हुआ और बोला, हुजूर एक खुशखबरी है। फ्रांसीसियों ने उस ड्रामे को ही नहीं रोका बल्कि उस थिएटर को हमेशा के लिए बंद कर दिया है।
यह सुनकर खलीफा अब्दुल हमीद की आंखें नम हो गईं और जुबान से सिर्फ अल्हम्दुलिल्लाह निकला। उस वक्त मिस्र और अल्जीरिया में लोग खुशी के मारे सड़कों पर निकल आए थे। यह वो वक्त था जब खिलाफत-ए-उस्मानिया की हैबत से यूरोप के मरकज हिल जाया करते थे।
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