18/04/2026
कुर्सी की महत्वकांक्षा भविष्य में फिर कभी राजनीति की कुर्सी पर नहीं दिखने को मिलेंगी।। औरण गौचर गौ माता के लिए शायद ही कोई ठोस कदम उठाया बिल्कुल नहीं।। राजनीति में हर कोई बटोरने आता है बटोरते रहते पांच साल बेमिसाल लूट सको तो लूट लो।।आपसे ये उम्मीद नहीं थी बापजी ।
महंत प्रतापपुरी जी का नाम आते ही सिर श्रद्धा से झुक जाता था ।
एक आदर्श व्यक्तित्व , सनातन परंपरा के अग्रणी व्यक्ति ।
एक समय था जब प्रतापपुरी जी को पश्चिम का विवेकानंद जैसे नाम से पुकारा जाने लगा। और भविष्य में CM पद का दावेदार माना जाने लगा।
भाजपा से पोकरण विधानसभा का टिकट मिला तो जनमानस का हुजूम उनके साथ हो लिया।
मामूली अंतर से महंत जी सालेह मोहम्मद से चुनाव हार गए लेकिन न महंत जी का सम्मान कम हुआ न ही जनता की श्रद्धा ।
जैसे ही प्रतापपुरी जी दूसरा चुनाव जीते भाजपा को अचानक ही पश्चिम की शांत राजनीति में हिंदू मुस्लिम का बीज बोने का एक जरिया प्रताप पूरी जी के रूप में मिला जिसे महाराज जी भी नहीं समझ पाए ।
अचानक पश्चिम के संत पार्टी विशेष की विचार धारा के संत हो गए ।
पार्टी की विचारधारा में ऐसे बंधे कि बाकी विचारधारा पीछे छूट गई । धर्म , मंदिर , ओरण, ओर प्रकृति के लिए लड़ने वाले संत मूकदर्शक हो गए ।
ताजा मामले में और अधिक निराशा तब हुई जब पता चला कि प्रकृति जमीन और जीवों की रक्षा के लिए जैसलमेर के तनोट से जयपुर तक पैदल यात्रा कर रहे पदयात्रियों के समूह को भ्रमित कर आश्वासन के नाम पर यात्रा भंग करने के सरकार के डेलिगेशन में जैसलमेर विधायक के साथ प्रतापपुरी जी भी शामिल थे जिन्होंने अजमेर में इस मामले में पूर्ण आश्वासन देकर ओरण यात्रियों का फोन तक नहीं उठाया और अपने क्षेत्र के पदयात्रियों के साथ जयपुर में हुए अपमान और दुर्व्यवहार पर चुप्पी खींच ली ।
जैसलमेर की लाखों बीघा ओरण ओर सरकारी जमीन सरकार ने अपने चहेती कंपनियों को बांटना शुरू कर दी । लाखों खेजड़ी और जाल के वृक्ष हर दिन काटे जा रहे हैं लेकिन सामाजिक सरोकार से जुड़े संत की चुप्पी सबको खल रही है ।
अक्सर राजनीति से जुड़े लोग अपने परिवार के लिए निजी लाभ के लिए चुप हो जाते है लेकिन प्रताप पूरी जी के लिए सारी दुनिया ही परिवार है फिर ऐसे संवेदनशील मामलों में चुप्पी क्यों