Active Teacher Creativities

Active Teacher Creativities Rajveer Singh
Assistant Teacher
Posted in
Model Primary School Bakainia Dixit
Block- Barkhera
District- Pilibhit (U.P.) Home District- Bulandshahr (U.P.)

बच्चों को मेरे द्वारा आईकार्ड, टाई-बेल्ट और डायरी वितरित कराई गईं। मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय रत्नेश गंगवार जी रहे। इ...
24/09/2026

बच्चों को मेरे द्वारा आईकार्ड, टाई-बेल्ट और डायरी वितरित कराई गईं। मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय रत्नेश गंगवार जी रहे। इन्होंने द्वारा विद्यालय में किये जा रहे कार्यों को सराहना की गई तथा बच्चों के लिए कुछ उपहार स्वरूप राशि प्रदान की गई।
आपकी गरिमामयी उपस्थिति एवं बच्चों के प्रति आपकी दरियादिली का विद्यालय परिवार सदैव आभारी रहेगा।

आईकार्ड देने की पहल मेरे द्वारा वर्ष 2016 से की गई थी। उसके बाद टाई-बेल्ट भी देना शुरू किया।

सभी फ़ोटो 7 वर्ष पहले के हैं...

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होतीलहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...!सुप्रभात स्नेहिल साथियों🙏
22/09/2026

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती...!
सुप्रभात स्नेहिल साथियों🙏

22/09/2026

प्यारे बच्चों! वन्देमातरम् को इस तरह से गाइये...
स्वर और लयबद्ध तरीके से निर्धारित समयावधि में गाने का अभ्यास करें... इसी क्रम में बच्चों को राष्ट्रगीत- वन्देमातरम् को गाकर सिखाया..
वन्देमातरम्..! भारत माता की जय..!
#वन्देमातरम

22/09/2026

इस गीत/प्रार्थना को अपने विद्यालय में जरूर चलाएं..

22/09/2026

आज कक्षा-4 व 5 के कुछ छात्र-छात्राओं से वन्दे मातरम् सुना गया। जिन बच्चों ने पूरा राष्ट्रगीत सही व लयबद्ध सुनाया। उन्हें प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ स्थान पर पुरस्कृत करने के लिए चयन किया गया। इन चारों बच्चों को कल दिनांक 23/09/2026 को पुरस्कृत किया जाएगा।
पुरस्कृत करने का एकमात्र उद्देश्य यही है कि इससे अन्य बस्बे प्रेरित हों और वे भी वन्देमातरम को कंठस्थ करें।

बेसिक शिक्षा विभाग जौनपुर में विद्यालयों के मर्जर में बड़ा खेल!इस पर आप क्या कहना चाहेंगे..
22/09/2026

बेसिक शिक्षा विभाग जौनपुर में विद्यालयों के मर्जर में बड़ा खेल!
इस पर आप क्या कहना चाहेंगे..

नवम्बर 2015 से अब तक का सफर…सीमाओं से संभावनाओं तक, और भोजन से सीखने तक की एक खूबसूरत यात्राजब विद्यालय के पास अपनी Boun...
21/09/2026

नवम्बर 2015 से अब तक का सफर…
सीमाओं से संभावनाओं तक, और भोजन से सीखने तक की एक खूबसूरत यात्रा

जब विद्यालय के पास अपनी Boundary तक नहीं थी, तब विद्यालय का परिसर आज की तरह व्यवस्थित और सुरक्षित नहीं था। संसाधन सीमित थे, व्यवस्थाएँ साधारण थीं, लेकिन कुछ बेहतर करने का संकल्प और बच्चों के लिए कुछ नया करने की सोच हमेशा मजबूत रही।
समय आगे बढ़ता गया…प्रयास होते रहे और व्यवस्थाएँ बदलती रहीं…और धीरे-धीरे विद्यालय ने एक नई तस्वीर बनानी शुरू की।

आज विद्यालय के पास अपनी Boundary है, व्यवस्थित परिसर है और बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन की बैठक व्यवस्था भी पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित, आकर्षक और सीखने वाली है।

मध्यान्ह भोजन की बैठक से सीखने की व्यवस्था तक…
शुरुआती दिनों में जब बच्चे बिना Boundary वाले खुले परिसर में मध्यान्ह भोजन करते थे, तब व्यवस्था कुछ अलग थी। समय के साथ विद्यालय को Boundary मिली और उसके बाद बच्चों के बैठने के लिए भी अलग-अलग तरह की रचनात्मक व्यवस्थाएँ विकसित की गईं।

कभी बच्चे अंग्रेजी के Letters के आकार में बैठते हैं, तो कभी—
🔺 Triangle – त्रिभुज
⬛ Square – वर्ग
▭ Rectangle – आयत
⭕ Circle – वृत्त
और अन्य विभिन्न आकृतियों के माध्यम से बैठक व्यवस्था तैयार की जाती है।

इसका उद्देश्य केवल बच्चों को अनुशासित ढंग से बैठाना नहीं है, बल्कि उनके आसपास की गतिविधियों को ही सीखने का माध्यम बनाना है।

जब बच्चा Triangle के आकार में बैठता है, तो वह केवल भोजन नहीं कर रहा होता, बल्कि उसके सामने Triangle की आकृति का वास्तविक अनुभव भी होता है।

जब बच्चे Square या Rectangle की आकृति में बैठते हैं, तो किताब में बनी आकृति और वास्तविक जीवन की गतिविधि के बीच एक संबंध बनता है।

जब English Letters की आकृतियों में बैठक होती है, तो बच्चे अक्षरों को केवल कॉपी या पुस्तक में नहीं देखते, बल्कि उन्हें अपने आसपास की व्यवस्था में भी पहचानते हैं।

यही तो है Learning by Doing —
जहाँ कक्षा की चार दीवारों से बाहर भी सीखना जारी रहता है। बच्चों के लिए हर गतिविधि में सीखने का अवसर।
हमारा प्रयास रहा है कि विद्यालय की कोई भी गतिविधि केवल एक औपचारिकता बनकर न रह जाए।

मध्यान्ह भोजन भी बच्चों के लिए अनुशासन, सहभागिता, स्वच्छता, सामाजिक व्यवहार और सीखने का अवसर बने।
एक समय था जब विद्यालय में Boundary नहीं थी…
आज विद्यालय में Boundary भी है और उसी परिसर में बच्चों के लिए रचनात्मक एवं शैक्षिक बैठक व्यवस्थाएँ भी हैं।
यह बदलाव केवल ईंट-पत्थर और भवन का बदलाव नहीं है।
यह सोच में आए बदलाव की कहानी है।
यह कहानी है—
सीमित संसाधनों में बेहतर करने की कोशिश की।
बच्चों को केंद्र में रखकर व्यवस्था विकसित करने की।
साधारण गतिविधियों को शिक्षण से जोड़ने की।
और सबसे महत्वपूर्ण—
हर दिन विद्यालय को कल से थोड़ा बेहतर बनाने की।
तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं हैं…
इन तस्वीरों में बीते वर्षों की यादें हैं।
एक तरफ 2015 के आसपास की परिस्थितियाँ, दूसरी ओर बदलती हुई व्यवस्थाएँ और आज बच्चों के लिए विकसित की गई नई बैठक व्यवस्था।
इन तस्वीरों को साथ देखकर ऐसा लगता है जैसे विद्यालय स्वयं कह रहा हो—
“सफर अभी जारी है…
मंजिल केवल भवन बनाना नहीं,
बल्कि हर बच्चे के लिए सीखने को आसान, रोचक और आनंददायक बनाना है।”
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21/09/2026

पुरानी पेंशन के लिए लखनऊ चलो...
25 सितम्बर 2026 को ईको गार्डन लखनऊ में

आज दिनांक 20 सितंबर 2026 को हमारे विद्यालय में नवभारत साक्षरता परीक्षा सम्पन्न कराई गई। जिसमें कुल आठ परीक्षार्थियों को ...
20/09/2026

आज दिनांक 20 सितंबर 2026 को हमारे विद्यालय में नवभारत साक्षरता परीक्षा सम्पन्न कराई गई। जिसमें कुल आठ परीक्षार्थियों को शामिल होना था। लेकिन 5 महिला परीक्षार्थी उपस्थित रहीं।

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20/09/2026

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