Desh Puch Raha Hai

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एक स्वतंत्र जन-जागरूकता मंच है, जिसका उद्देश्य जनता से जुड़े मुद्दों, सरकारी वादों, नीतियों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों और देश के विकास से जुड़े विषयों पर तथ्य आधारित जानकारी साझा करना है। हम किसी राजनीतिक दल का प्रचार या विरोध नहीं करते।

🎉 **दोस्तों, "देश पूछ रहा है" पेज को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, और आप सभी ने इसे भरपूर प्यार और समर्थन दिया है।**...
21/06/2026

🎉 **दोस्तों, "देश पूछ रहा है" पेज को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, और आप सभी ने इसे भरपूर प्यार और समर्थन दिया है।**

🙏 आज हमारे **100 Followers** पूरे हो गए हैं। यह आपके विश्वास, प्यार और सहयोग का ही परिणाम है।

❤️ आप सभी का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद।

इसी तरह अपना प्यार, समर्थन और आशीर्वाद बनाए रखिए। आगे भी हम जनता के मुद्दों, सवालों और सच को आपके सामने लाते रहेंगे।

**धन्यवाद! 🙏🇮🇳**



#किसान_की_व्यथा #देश_पूछ_रहा_है

🇮🇳 Desh Puch Raha Hai❓देश पूछ रहा है...देश का किसान दिन-रात मेहनत करता है।गर्मी हो, बारिश हो या ठंड,वह खेत में खड़ा रहता...
11/06/2026

🇮🇳 Desh Puch Raha Hai

❓देश पूछ रहा है...

देश का किसान दिन-रात मेहनत करता है।
गर्मी हो, बारिश हो या ठंड,
वह खेत में खड़ा रहता है।

लेकिन जब फसल बिकने की बारी आती है,
तो उसे अपनी मेहनत का सही मूल्य क्यों नहीं मिलता?

कर्ज बढ़ता जा रहा है।
लागत बढ़ती जा रही है।
लेकिन आमदनी उतनी नहीं बढ़ रही।

क्या किसानों को सिर्फ चुनाव के समय याद किया जाएगा?

या उनके जीवन में वास्तविक बदलाव भी आएगा?

आपकी राय क्या है?

#देशपूचाराआहॆ #किसान_की_व्यथा #देश_पूछ_रहा_है

"किसान मरता है तो खबर बनती है... लेकिन वह रोज़ कैसे जीता है, यह कौन देखता है?"** 😢सुबह अंधेरे में उठने वाला किसान...दोपह...
07/06/2026

"किसान मरता है तो खबर बनती है... लेकिन वह रोज़ कैसे जीता है, यह कौन देखता है?"** 😢

सुबह अंधेरे में उठने वाला किसान...
दोपहर की तपती धूप में जलने वाला किसान...
रात को कर्ज़ और चिंताओं में जागने वाला किसान...

क्या किसी ने उसकी ज़िंदगी को सच में समझने की कोशिश की है?

कभी सूखा उसकी मेहनत छीन लेता है...
कभी बेमौसम बारिश उसकी फसल बहा ले जाती है...
कभी कीड़े और बीमारियाँ पूरी खेती बर्बाद कर देती हैं...
और अगर फसल बच भी जाए, तो बाज़ार में उसकी कीमत नहीं मिलती।

बीज महंगा...
खाद महंगी...
दवाई महंगी...
डीज़ल महंगा...
बिजली महंगी...

लेकिन किसान की फसल सस्ती!

जो इंसान पूरे देश का पेट भरता है,
उसी के घर में कई बार चूल्हा जलाने की चिंता होती है।

बैंक का कर्ज़...
सोसायटी का कर्ज़...
साहूकार का दबाव...
बच्चों की पढ़ाई...
परिवार की ज़िम्मेदारियाँ...

इन सबके बीच किसान हर दिन टूटता है,
लेकिन फिर भी अगले दिन खेत में खड़ा दिखाई देता है।

हम सब्ज़ी 5 रुपये महंगी होने पर नाराज़ हो जाते हैं,
लेकिन उसे उगाने वाले किसान को कितने रुपये मिले, यह पूछने की ज़रूरत शायद ही कोई समझता है।

किसान आत्महत्या सिर्फ़ एक समाचार नहीं होती...
वह किसी बच्चे के सपनों का अंत होती है...
किसी माँ की उम्मीदों का टूटना होती है...
किसी परिवार की दुनिया उजड़ जाना होता है।

आज सवाल सिर्फ़ इतना है—

🚜 **जो किसान पूरे देश को भोजन देता है, क्या उसे सम्मान और उसकी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है?**

किसान को दया नहीं चाहिए...
उसे उसकी मेहनत का उचित दाम चाहिए...
सुरक्षा चाहिए...
सम्मान चाहिए...
और जीने का भरोसा चाहिए।

🇮🇳 **क्योंकि किसान बचेगा तो खेती बचेगी...
खेती बचेगी तो देश बचेगा।**

#किसान #अन्नदाता #किसान_की_व्यथा #जयजवानजयकिसान #देशपूचाराआहॆ #देश_पूछ_रहा_है

🗣️ आपकी राय क्या है?क्या केवल इस्तीफा काफी है या शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है?📢 देश पूछ रहा है...आज जंतर-म...
06/06/2026

🗣️ आपकी राय क्या है?
क्या केवल इस्तीफा काफी है या शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है?

📢 देश पूछ रहा है...

आज जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं ने NEET पेपर लीक, भर्ती घोटालों और छात्रों के भविष्य के सवाल पर आवाज उठाई। आंदोलन हुआ, नारे लगे, इस्तीफे की मांग हुई...

लेकिन देश कुछ और सवाल भी पूछ रहा है। 👇

❓ जिन छात्रों ने इस व्यवस्था से परेशान होकर अपनी जान गंवाई, उनके परिवार मंच पर क्यों नहीं थे?

❓ अगर लड़ाई छात्रों के भविष्य की है, तो देशभर के प्रभावित छात्रों और अभिभावकों की आवाज सबसे आगे क्यों नहीं दिखाई दी?

❓ केवल इस्तीफे की मांग से क्या समस्या खत्म हो जाएगी, या शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की भी जरूरत है?

❓ पेपर लीक करने वाले माफिया, भ्रष्ट अधिकारी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कितनी सख्त कार्रवाई हुई?

❓ लाखों छात्रों का एक साल बर्बाद होने का हिसाब कौन देगा?

देश किसी पार्टी का नहीं, छात्रों के भविष्य का जवाब चाहता है।

युवा सिर्फ भाषण नहीं, समाधान चाहते हैं।
युवा सिर्फ वादे नहीं, पारदर्शिता चाहते हैं।
युवा सिर्फ राजनीति नहीं, न्याय चाहते हैं।

अगर शिक्षा व्यवस्था सुरक्षित नहीं होगी, तो देश का भविष्य सुरक्षित कैसे होगा?

#देश_पूछ_रहा_है

ये कहाणी आपका जीवन बदल देगी. 📖 कहानी: सपनों का बाज़ारएक शहर में एक बहुत बड़ा बाज़ार लगता था।उस बाज़ार में एक दुकानदार था...
06/06/2026

ये कहाणी आपका जीवन बदल देगी.

📖 कहानी: सपनों का बाज़ार

एक शहर में एक बहुत बड़ा बाज़ार लगता था।

उस बाज़ार में एक दुकानदार था।

वह अनोखी चीज़ बेचता था।

न कपड़े, न अनाज, न दवा।

वह सिर्फ़ सपने बेचता था।

उसकी दुकान पर बड़ी-बड़ी तख्तियाँ लगी थीं—

✨ "2047 में दुनिया का सबसे विकसित देश"

✨ "विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था"

✨ "हर घर खुशहाल"

✨ "हर नागरिक समृद्ध"

लोग उसकी दुकान पर आते, सपने सुनते, खुश होते और वापस चले जाते।

एक दिन भीड़ में से एक किसान खड़ा हुआ।

उसने पूछा—

"मेरी फसल का खर्च बढ़ रहा है, दाम कम मिल रहा है। मेरा समाधान कहाँ है?"

दुकानदार बोला—

"भविष्य बहुत सुनहरा है।"

एक बेरोज़गार युवा आगे आया।

उसने पूछा—

"डिग्री तो है, लेकिन नौकरी नहीं है। मेरा भविष्य कब बदलेगा?"

दुकानदार बोला—

"देश आगे बढ़ रहा है।"

एक माँ आई।

उसने पूछा—

"सरकारी स्कूल में शिक्षक कम हैं, बच्चों की पढ़ाई का क्या?"

दुकानदार ने फिर सपना दिखा दिया।

तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति आया।

उसने कहा—

"मेरे गाँव के अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं, इलाज के लिए शहर जाना पड़ता है।"

लेकिन जवाब फिर सपना ही था।

भीड़ में से एक छोटा व्यापारी बोला—

"महंगाई बढ़ रही है, व्यापार चलाना मुश्किल हो रहा है।"

एक मजदूर बोला—

"कमाई बढ़ नहीं रही, खर्च लगातार बढ़ रहा है।"

एक महिला बोली—

"सुरक्षा, रोजगार और समान अवसर का क्या?"

एक गाँव वाला बोला—

"पानी की समस्या, सड़क की समस्या और बुनियादी सुविधाओं का क्या?"

लेकिन हर सवाल का जवाब एक ही था—

"भविष्य बहुत शानदार होगा।"

तब भीड़ में खामोशी छा गई।

एक बच्चे ने मासूमियत से पूछा—

"अगर भविष्य इतना अच्छा होगा, तो आज की समस्याएँ कौन हल करेगा?"

पूरा बाज़ार शांत हो गया।

क्योंकि उस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।

❓ देश पूछ रहा है...

क्या केवल भविष्य के सपने काफी हैं?

या फिर हमें आज इन मुद्दों पर भी जवाब चाहिए?

📌 रोजगार
📌 शिक्षा
📌 स्वास्थ्य
📌 किसानों की आय
📌 महंगाई
📌 छोटे व्यापारियों की समस्याएँ
📌 महिलाओं की सुरक्षा और अवसर
📌 गाँवों का विकास
📌 पानी और बुनियादी सुविधाएँ
📌 भ्रष्टाचार और जवाबदेही
📌 पर्यावरण और प्रदूषण
📌 युवाओं का भविष्य

क्योंकि...

भविष्य का भारत आज की नीतियों और आज के फैसलों से बनेगा।

सपने ज़रूरी हैं।

लेकिन जागते हुए देश सपनों के साथ-साथ सवाल भी पूछते हैं।

✍️ आप क्या सोचते हैं?

देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा आज कौन सा है?

1️⃣ रोजगार
2️⃣ शिक्षा
3️⃣ किसान
4️⃣ स्वास्थ्य
5️⃣ महंगाई
6️⃣ अन्य (कमेंट में लिखें)

👇 अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखें।

देश पूछ रहा है... और आपका जवाब भी महत्वपूर्ण है। Jadhao
Desh Puch Raha Hai Rahul Gandhi

#देश_पूछ_रहा_है

🇮🇳 देश पूछ रहा है...🇮🇳 देश पूछ रहा है — क्या हमारे युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए?देश का भविष्य किसके ह...
05/06/2026

🇮🇳 देश पूछ रहा है...
🇮🇳 देश पूछ रहा है — क्या हमारे युवाओं का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए?

देश का भविष्य किसके हाथ में है?

किसान देश का पेट भरता है, सैनिक देश की रक्षा करता है और छात्र देश का भविष्य बनाते हैं। लेकिन जब छात्रों को यह भरोसा ही न रहे कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन होगा, उनकी परीक्षा निष्पक्ष होगी और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा, तब यह सिर्फ़ एक छात्र का नहीं बल्कि पूरे देश का सवाल बन जाता है।

कल दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन को लेकर देशभर के युवाओं, छात्रों और अभिभावकों की नज़रें टिकी हुई हैं। आंदोलन करने वाले अपनी मांगों और सवालों के साथ सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार का दायित्व है कि वह जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुने।

लेकिन आज सबसे बड़ा प्रश्न किसी एक संगठन, नेता या राजनीतिक दल का नहीं है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—

❓ क्या छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए?

❓ क्या परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए?

❓ क्या लाखों युवाओं की मेहनत और सपनों की रक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है?

❓ क्या सरकार, विपक्ष और सभी संबंधित संस्थाओं को राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों के हित में एक साथ काम नहीं करना चाहिए?

देश का युवा केवल नौकरी नहीं मांग रहा, वह निष्पक्ष अवसर मांग रहा है।

वह केवल डिग्री नहीं चाहता, बल्कि उस डिग्री का सम्मान और विश्वास चाहता है।

वह केवल परीक्षा नहीं देना चाहता, बल्कि यह भरोसा चाहता है कि उसकी मेहनत का परिणाम किसी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ेगा।

आज सवाल किसी मंत्री, किसी संगठन या किसी आंदोलन का नहीं है।

सवाल उस करोड़ों युवाओं का है जो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, अपने परिवारों के सपने पूरे करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

देश पूछ रहा है...

यदि देश के युवाओं का विश्वास शिक्षा व्यवस्था से उठ गया, तो आने वाले भारत का निर्माण कौन करेगा?

यदि मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो उनका मनोबल कौन लौटाएगा?

यदि भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, तो विकास का सपना कैसे पूरा होगा?

अपनी राय खुलकर लिखिए।

क्योंकि यह मुद्दा राजनीति से बड़ा है, यह देश के भविष्य का मुद्दा है।

Omprakash Jadhao
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#देश_पूछ_रहा_है

05/06/2026

जनता की और से कुछ सवाल जो जनता की हित मे,
हमे इस पर अपनी राय दीजिये ताकी हम आपका सवाल सरकार से पुच सके....... #देशपूछरहाहै Desh Puch Raha Hai

04/06/2026

आज का सवाल :-
क्या आप CJP के इस अंदोलन मे अभिजित दिपके जी का साथ देंगे.
अपनी राय जरूर दीजिये.

04/06/2026

इसपे अपनी राय जरूर दीजिये आपको क्या लागत है!.
#देशपूछरहाहै

📚 शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं है, बल्कि सही और गलत में फर्क समझना भी है।अगर शिक्षा के बाद भी इंसान दूसरों का स...
04/06/2026

📚 शिक्षा का मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं है, बल्कि सही और गलत में फर्क समझना भी है।

अगर शिक्षा के बाद भी इंसान दूसरों का सम्मान करना नहीं सीख पाया, तो उसकी पढ़ाई अधूरी है।


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