14/02/2026
भारत में अंतर्धार्मिक (interfaith) विवाहों को लेकर उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों (जैसे 2011 की जनगणना या NFHS सर्वे) के अनुसार, किसी विशेष हिंदू समुदाय (जैसे ब्राह्मण या राजपूत) की लड़कियों का मुस्लिम पुरुषों से शादी करने का कोई आधिकारिक और प्रमाणित डेटा उपलब्ध नहीं है।
मुख्य बिंदु:
अत्यधिक दुर्लभ (Very Rare): प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 99% लोग अपने ही धर्म में शादी करते हैं। अंतर्धार्मिक शादियां बहुत कम (1% से भी कम) होती हैं।
समुदायवार आंकड़े नहीं: भारत में अंतर्जातीय विवाहों (Inter-caste) के आंकड़े तो मिलते हैं, लेकिन "ब्राह्मण/राजपूत लड़की-मुस्लिम पुरुष" जैसी विशिष्ट सांख्यिकी (statistics) राष्ट्रीय स्तर पर मौजूद नहीं है।
अंतरधार्मिक विवाह का चलन: 2013 के एक अध्ययन (IHDS डेटा) के अनुसार, हिंदू महिलाओं द्वारा दूसरे धर्म में शादी करने की दर 1.5% थी।
सामाजिक रूढ़िवादिता: हिंदू और मुस्लिम समुदायों में विवाह के मामले में अभी भी काफी रूढ़िवादिता है और अधिकांश लोग इसे पसंद नहीं करते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: मुगलों के समय में राजपूत राजाओं ने राजनीतिक कारणों से अपनी बेटियों की शादी मुस्लिम शासकों से की थी, लेकिन यह एक ऐतिहासिक तथ्य है, न कि वर्तमान समय में सबसे ज्यादा शादी करने का सांख्यिकीय रिकॉर्ड।