20/09/2026
ज़िन्दगी नहीं है इतनी आसान, समझना होगा,
हर क़दम देना पड़ता इम्तिहान, समझना होगा।
कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता हमें इस जीवन में,
ठोकरें खाकर ही मिलता है ज्ञान, समझना होगा।
पैसों से सब कुछ नहीं ख़रीदा जा सकता है यहाँ,
ज़िंदगी को ना समझना सामान, समझना होगा।
कई बार हम टूट जाते हैं दर्द सहते-सहते लेकिन,
हौसलों से ही बनती नई पहचान, समझना होगा।
लोग क़रीब आते हैं स्वार्थ पूरा हुआ दूर हो जाते,
हर कोई तुझपे न होगा मेहरबान, समझना होगा।
इक हार पे निराश ना होना जीत पे इतराना नहीं,
गिरकर फिर उठना ही बड़ी शान, समझना होगा।
कल की चिंता में खो देना आज को भरपूर जीना,
आज़ के कर्म बुनेंगे आगे जहान, समझना होगा।
हमारे भीतर ही छिपा है "आशीष " हर उजाला,
बना ख़ुद को खुद का निगहबान, समझना होगा।
— लेखक — आशीष कुमार मिश्रा