05/09/2026
जवाहरलाल नेहरू और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का संबंध केवल प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति का संबंध नहीं था। दोनों के बीच गहरा आपसी सम्मान, विश्वास और बौद्धिक मित्रता थी। नेहरू राधाकृष्णन को एक महान शिक्षक, दार्शनिक और विचारक के रूप में बेहद सम्मान देते थे।
1952 में राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने। अगले दस वर्षों तक वे इस पद पर रहे और इस दौरान जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। दोनों के बीच लगातार संवाद और सहयोग बना रहा।
नेहरू ने राधाकृष्णन के बारे में कहा था कि उन्होंने देश की अनेक प्रकार से सेवा की है, लेकिन सबसे बढ़कर वे एक महान शिक्षक हैं, जिनसे देश ने बहुत कुछ सीखा है और आगे भी सीखता रहेगा।
इन दोनों के रिश्ते में केवल गंभीर राजनीति और दर्शन ही नहीं था, बल्कि एक हल्का-फुल्का मानवीय पक्ष भी था।
1953 में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक चैरिटी क्रिकेट मैच आयोजित किया गया। इसमें नेहरू की टीम और उपराष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन की टीम आमने-सामने थीं। नेहरू ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। यह प्रसंग बताता है कि उस दौर के शीर्ष नेताओं के बीच सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ सहज व्यक्तिगत संबंध भी थे।
राधाकृष्णन ने भी नेहरू के व्यक्तित्व और विचारों को समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने नेहरू पर “On Nehru” नाम से एक पुस्तक भी लिखी, जो 1965 में प्रकाशित हुई।
5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है, जिनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था।
1962 में जब राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तो उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। तब उन्होंने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव बनाने के बजाय शिक्षकों को सम्मान देने के दिन के रूप में मनाया जाए।
इसी विचार के बाद भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।
राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे समाज और राष्ट्र का भविष्य तैयार करते हैं। उनका विश्वास था कि देश के सबसे अच्छे और प्रतिभाशाली लोगों को शिक्षण के क्षेत्र में आना चाहिए।
उनका पूरा जीवन इस विचार का उदाहरण था। उन्होंने मद्रास, मैसूर और कलकत्ता विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया, आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और ऑक्सफोर्ड में भी दर्शनशास्त्र पढ़ाया। बाद में वे देश के उपराष्ट्रपति और फिर राष्ट्रपति बने।
लेकिन इतने बड़े पदों पर पहुंचने के बाद भी डॉ. राधाकृष्णन की पहचान सबसे पहले एक शिक्षक और दार्शनिक की ही रही।
आज 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर नेहरू और राधाकृष्णन के संबंध की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि राजनीति से ऊपर भी कुछ रिश्ते होते हैं—ज्ञान, विचार, सम्मान और राष्ट्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता के रिश्ते।
सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🇮🇳