Jairaj Publications

Jairaj Publications To keep pace with the times by producing books on newly-emerging subjects arising from the fast-changing developments taking place around the world.

Your words, inked
Dedicated to being the optimal bridge between writers and readers, we publish thoughts that matter.

7541077587, 9934520057
[email protected] To produce mass-appeal general books that excel in content and quality and fulfil the aspirations and expectations of readers while catering to every age group and section of society. To produce in large volumes in order to scale down production costs, and thereby pass on the benefits of low cost to readers, making the books affordable for all. Editorial Research to Develop Innovative and Unique Titles In fulfilment of its mission and vision, the company is dedicated to strong research in the development of editorial matter. A highly motivated and qualified pool of editorial staff is ceaselessly engaged in researching and developing new topics and subjects that would be really useful for readers. State-of-the-art Pre-press Facilities Not just in editorial matters, the company has always kept pace with the times in the production techniques too. Quality upgradation in production process being an ongoing process, the company today has well-qualified and experienced personnel backed by the most modern and sophisticated range of inhouse pre-press facilities and equipment. Media-savvy Operations & Largest Publicity Budget Jairaj Publications is the first publisher to initiate a publicity culture in the Indian Publishing world. It spends a substantial amount on publicity backed by:
Multimedia publicity through Press, Television, Cable channels and the Internet. Media reviews in leading periodicals, magazines and journals. Round-the-year mailing of catalogues and brochures. Two inhouse bulletins in Hindi and English circulated widely in the trade every month. International Vision Committed to a national ethos, the company has been actively promoting the cause of Indian authors and the Hindi language. We are among the few Indian Publishers to print World encyclopaedias in Hindi – from the Guinness Book of World Records for ten years to Science Encyclopaedias and Sports Encyclopaedia. We have brought many landmark world bestsellers to Indian readers at Indian prices. In view of the ongoing worldwide trends we feel that the company could take a major leap forward through focussed co-publishing and distribution tie-ups with foreign publishers for long-term mutual objectives.

14/08/2026

हमारी सोच की गहराइयों में दबी होती हैं अतीत की कई ऐसी सलोनी बातें, जिन्हें ठहर कर देखने की फुर्सत आज की भागदौड़ से भरी ज़िंदगी में हमें मिलती नहीं। कहा जाता है कि हमारी उन अनुभूतियों को, जिन्हें हम वक्त के बहाव में खोना नहीं चाहते, उन्हें अपने पास संजो कर रखने का एक उत्तम तरीका है उनके बारे में लिखना। लिखना कि आपके लिए वो अहमियत क्यों रखते हैं, और उन्हें याद करना आपको कैसा अहसास देता है।

जयराज पब्लिकेशंस
9934520057

12/08/2026

युवा संसार की वो ताकत हैं, जो अपने बड़ों की दी शिक्षा और अनुभवों से तरक्की की राहें बनाते हैं। इनमें दृढ़-इच्छाशक्ति का सतत संचार होता है, जिसकी ऊर्जा से ये मुश्किल से मुश्किल सवालों के जवाब ढूँढ़ लेते हैं।

साहित्य में भी इनका बड़ा योगदान रहा है। ये समकालीन सामाजिक तथा व्यक्तिगत विषयों पर गहन चिंतन करते हैं, और अपने वक्तव्यों और शोध को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उत्सुक रहते हैं, जिससे छोटे, बड़े, तथा हमउम्र लोगों को जीवन के किसी-न-किसी पहलु को समझने और उस पर उचित कार्य करने की प्रेरणा और मदद मिल सके।

उपन्यासों और काव्य सृजन से लेकर जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विपत्ति एवं अवसर, तकनीकी प्रगति, और मानवीय मूल्यों के महत्त्व और उनके ह्रास पर लिखने की काबिलियत युवाओं में होने का परिचय साहित्य जगत को बारंबार मिला है, जो कि हमारे लिए गौरव का विषय है।

आज ‘अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस’ पर हम पूरे विश्व के युवाओं के साथ, उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति की चेष्टा करते हुए हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर, उनके कृतियों को प्रकाशित कर सुधिजनों के बीच पहुंचाने का संकल्प लेते हैं।
आपको ‘अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएँ।

11/08/2026

साहित्य अभिव्यक्ति का एक माध्यम है, जो लेखक से सच्चाई की मांग करता है। कई बार रचनाकार अपनी कल्पना को उसके मूलभूत रूप में व्यक्त करने से कतराते हैं, क्योंकि उनका ध्यान ख्यालों के कुशल संयोजन और शुद्ध प्रकटीकरण के बजाय उनके सौंदर्यीकरण पर चला जाता है, यानी कि एक ही बात को कहने के लिए नाना प्रकार के विशेषणों का प्रयोग करना और भिन्न-भिन्न वाक्य संरचना के इस्तेमाल से उसे दोहराना।

हाँ, साहित्य में सौंदर्य को एक ख़ास स्थान प्राप्त है, और एक रचनाकार का अपने विचारों और वक्तव्यों को सुन्दरता से कहने का प्रयत्न करना उचित है, परन्तु ऐसा करते समय इस बात का ख्याल रखना आवश्यक है कि किसी भी हालत में लेखक की भावनाओं की अभिव्यक्ति और विचारों के अर्थ को समझाने में कोई भूल न हो जाए, क्योंकि ऐसा होने से लेखन को हानि होती है।

मन में उफनते ख्यालों की लहरों की सुन्दरता और उनकी गंभीरता, दोनों का चित्रण करना एक पाठक को उनकी प्रकृति से अच्छी तरह अवगत कराता है, और साथ ही, एक लेखक की लेखनी को प्रभावी बनाता है।

इसलिए जब भी आप किसी कृति का सृजन कर रहे हों, तो अपने आप से समय-समय पर पूछें, ‘क्या मैंने अपनी बातें उनके सच्चे रूप में व्यक्त की हैं, या फिर मैंने उनके अर्थ को सौंदर्य के आवरण से छिपा दिया है?’

#हिंदीसाहित्य

10/08/2026

लेखन के लिए प्रेरणा सिर्फ सामाजिक अनुभवों से ही नहीं, बल्कि प्रकृति की हल्की हलचल से भी आती है। ज़रूरत है तो उसके इशारे को समझने की और अपनी कलम से उसे आवाज़ देने की।

08/08/2026

व्यंग्य: क्या हँसाना आसान है?
यह बात तो आप भी ज़रूर मानते होंगे कि अपने मज़ाक और चुटकुलों पर हँसना आसान है, मगर उन पर किसी को हँसाना ज़रा कठिन। क्योंकि पहले तो चुटकुले में वाकई कोई ऐसी बात होनी चाहिए, जो हर किसी को हास्यास्पद लगे, और फिर उसे कहने का लहज़ा लाजवाब और टाइमिंग बिल्कुल चटक होनी चाहिए। तब जाकर सामने वाले को हँसी आए, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
मगर वही मनोरंजक बातें जब एक किताब में लिखीं हों, और उन्हें कहने वाला कोई बढ़िया वाचक सामने न हो बल्कि एक पाठक उसे हाथों में पकड़े पढ़ रहा हो, तो फिर कैसे उसकी हँसी सुनिश्चित की जाए?
श्री हरिशंकर परसाई जैसे गुणवान व्यंग्य लेखक अपनी दिलचस्प बातों को गंभीर साहित्यकार की तरह नहीं, बल्कि साफ़-सरल, बोलचाल की भाषा में रचना करने वाले लेखक के रूप में लिखते थे।

याद करिए ‘निठल्ले की डायरी’ के शुरुआती पृष्ठों में आए काका और निठल्ले के बीच हुई बात को:
मैंने काका से पूछा, “और काका, क्या कर रहे हैं?”
काका ने कहा, “बैठे हैं।”
अगले दिन फिर मैंने काका से पूछा, “क्या हाल है काका?”
काका ने फिर कहा, “बस, बैठे हैं।”
जब भी निठल्ला काका का हाल-समाचार पूछता, तो काका का वही जवाब हाज़िर होता। जब आप बार-बार उनके वही सवाल और वही जवाब पढ़ते हैं, तो आपको स्वतः हँसी आने लगती है, जैसे आप अपने आखों के सामने इन दोनों को देख और सुन सकते हों।
एक बेहतरीन लेखक अपनी कहानियों में किरदारों को इतना सजीव बना देता है, कि आपको ऐसा मालूम होने लगता है कि आप उनकी ही दुनिया में चले गए हैं, और उनके अटपटेपन को भलीभांति समझते हैं।

अगर आपको भी व्यंग्य लिखना पसंद है, तो अपनी बातों को ऐसे लिखिए जैसे कि आपकी कहानी के पात्र पाठक के ठीक सामने हों। इससे आपकी लेखनी बहुत प्रभावशाली और ऊर्जावान होगी।

साहित्य पर ऐसी ही चर्चा के लिए जुड़िए ‘जयराज पब्लिकेशन्स’ से, और जारी रखिए अपना लेखन और पाठन।

जयराज पब्लिकेशन्स
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07/08/2026

जिस तरह साहित्यकार शब्दों के धागों से नए, अनूठे काव्य और कथाएँ पिरोते हैं, उसी तरह गुणी बुनकर हाथकरघे से न जाने कितने खूबसूरत पैटर्न बनाकर, हर वस्त्र को उसकी अपनी खास पहचान देते हैं। कलम से भावों की धारा बहाने वाले साहित्यकार की ही तरह, वे भी अपनी कल्पनाशीलता का परिचय बुनाई की प्राचीन कला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाते हैं।

07 अगस्त को हर वर्ष हम, हमारे बीच रहने वाले इन्हीं हुनरमंद बुनकरों की कला और प्रतिभा को सम्मानित करते हैं। आज ही के दिन सन् 1905 में 'स्वदेशी आंदोलन' की शुरुआत हुई थी, जिसका मकसद था विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना।

आपको हाथकरघा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

जयराज पब्लिकेशन्स
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05/08/2026

क्या मेरी रचना पढ़ने योग्य है? क्या ये लोगों को पसंद आएगी? कहीं लोग मुझे गलत तो नहीं समझेंगे? क्या वे मुझपर हसेंगे?
इस तरह की अनेकों बातें एक नए लेखक को चिंतित करती हैं, और इसे ही अंग्रेजी में ‘anxiety’ कहते हैं। सच मानिए, इन बातों का डर होना लाज़मी है, मगर इनसे घबराकर अपने लेखन के सफ़र को छोड़ वापस लौट जाना ठीक नहीं है।
यदि आपको अपनी रचना पसंद है, उसपर गर्व है और उसे लोगों से सामने प्रस्तुत करने की इच्छा है, तो उसे लोगों तक ज़रुर पहुँचाइए। एक अच्छे, प्रभावशाली लेखक को उसके पढ़ने और सुनने वाले वक्त के साथ मिल ही जाते हैं, यदि लेखक अपनी बातें कहता रहे, उसे व्यक्त करने से डरे नहीं।
जयराज पब्लिकेशन्स में हम लेखकों को बेहतरीन ‘एडिटिंग सेवा’ प्रदान करते हैं, जिसमें उनकी कृति में लिखी हर बात को स्पष्टता दी जाती है ताकि एक पाठक के पास लेखक की रचना अपने सबसे सुन्दर, सटीक और स्पष्ट रूप में पहुँचे।
अगर आपके पास एक स्वरचित कृति तैयार है, जिसे आप उत्कृष्ट रूप में प्रकाशित देखना चाहते हैं, तो हमसे ज़रूर संपर्क करें।

जयराज पब्लिकेशन्स
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04/08/2026

एक गीतकार के शब्दों में निहित भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं उन्नत गायक। उनकी भावपूर्ण गायकी, अमर कर जाती है गीतकार की सोच को। ऐसे ही अपनी मधुर आवाज़ से सुन्दर शब्दों से निर्मित पंक्तियों में रस भरने वाले, भारतीय संगीत महान गायक, संगीतकार, फिल्म अभिनेता और निर्माता श्री किशोर कुमार जी का आज जन्म दिवस है। इन्होंने न जाने कितने गीत न सिर्फ गाए, बल्कि लिखे भी हैं जो आज भी हर भारत वासी की ज़ुबान पर बसे हैं।

आइए, बहुमुखी प्रतिभा के धनी किशोर जी के मनोरम गीतों को सुनकर आज का दिन आनंद से भर दें।

01/08/2026
31/07/2026

मुंशी प्रेमचंद सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हिंदी और उर्दू साहित्य जगत का अमिट चेहरा है। ये नाम उस शख्सियत का है जिन्होंने हमेशा समाज के चिंतनीय पहलुओं के स्वरुप को एक सामान्य भारतीय की आँखों से दिखाया। हम जानते हैं कि आने वाली हर पीढ़ी आदरणीय प्रेमचंद जी द्वारा सृजित कृतियों को पढ़कर जीवन का सच्चा दर्शन करेगी और समाज के उत्थान की एक मज़बूत कड़ी बनेगी।

गोदान, गबन और ईदगाह जैसी कालजयी रचनाओं के माध्यम से समाज को आईना दिखाने वाले सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कथाकार और विचारक, श्री धनपत राय श्रीवास्तव, उर्फ मुंशी प्रेमचंद जी को उनके 146वें जन्म दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।

- जयराज पब्लिकेशंस

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