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रांची की जनता का पैसा, जनता के विकास के लिए है—अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब भरने के लिए नहीं! 🚨​खादगढ़ा बस स्टैंड टेंड...
05/09/2026

रांची की जनता का पैसा, जनता के विकास के लिए है—अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब भरने के लिए नहीं! 🚨
​खादगढ़ा बस स्टैंड टेंडर में हुआ ₹4.29 करोड़ का बड़ा घोटाला। पहली बिडिंग में ₹7.5 करोड़ की बोली रद्द कर ₹3.2 करोड़ में सौदा क्यों?
​जनता के हक की लूट अब और बर्दाश्त नहीं होगी! इस प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाएं।

​पोस्ट 2: सवाल पूछो, जवाब मांगो
​नगर निगम के इस खेल को समझिए:
❌ पहली बोली: ₹7.5 करोड़ (रद्द कर दी गई)
⚠️ दूसरी बोली: ₹3.2 करोड़ (फाइनल कर दी गई)
📉 नुकसान: जनता के ₹4.29 करोड़!
​आखिर किसे फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल खेला गया? नगर निगम जवाब दे!

हजारीबाग ट्रिपल मर्डर केस पर पक्ष विपक्ष की चुप्पी शर्मनाक क्या न्याय अब मृतक की जाति और धर्म देखकर मिलेगा ?राजनीतिक चश्...
01/05/2026

हजारीबाग ट्रिपल मर्डर केस पर पक्ष विपक्ष की चुप्पी शर्मनाक

क्या न्याय अब मृतक की जाति और धर्म देखकर मिलेगा ?

राजनीतिक चश्मे से न्याय का बंटवारा
झारखंड में छोटे-छोटे मुद्दे पर सड़कों पर उतरने वाले दल और संगठन इस निर्मम घटना पर मौन क्यों ?

पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा उचित मुआवजा प्रदान किया जाए

हजारीबाग तेरे हत्याकांड में SIT जाट सुनिश्चित किया जाए

राजनीतिक दल और संगठन अपनी दोहरी नीति त्यागें और इंसानियत के नाते न्याय कीमांग करें।

Mohammad Shahid Ayyubi
अध्यक्ष
Jharkhand Muslim Yuva Manch

संविधान बड़ा या नफरती बयान?  Bhanu Pratap Shahi  के 'तालिबानी' सोच पर संवैधानिक प्रहार​ मोहम्मद शाहिद अय्यूबीअध्यक्ष, झार...
30/04/2026

संविधान बड़ा या नफरती बयान? Bhanu Pratap Shahi
के 'तालिबानी' सोच पर संवैधानिक प्रहार
​ मोहम्मद शाहिद अय्यूबी
अध्यक्ष, झारखंड मुस्लिम युवा मंच
​आज ही भाजपा नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह भारतीय लोकतंत्र और 'गंगा-जमुनी तहजीब' पर सीधा हमला है। उन्होंने न केवल मंत्री इरफान अंसारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया, बल्कि शरीयत का जिक्र कर पूरे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे लोगों को अंडा, जूता और चप्पल फेंकने जैसी हिंसक गतिविधियों के लिए उकसा रहे हैं।
​संविधान हमें क्या अधिकार देता है?
​भानु प्रताप शाही जी को शायद भारत के संविधान को फिर से पढ़ने की जरूरत है। हमारा संविधान किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं चलता।
​अनुच्छेद 25 (Article 25): यह अनुच्छेद हर भारतीय नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसके अनुसार आचरण करने और उसका प्रचार करने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है। शरीयत के अनुसार व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) का पालन करना इसी संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।
​अनुच्छेद 26: यह धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है।
​कानून का शासन: यदि किसी पत्रकार के साथ कोई अप्रिय घटना हुई है, तो उसके लिए देश में पुलिस, प्रशासन और अदालतें मौजूद हैं। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कानून अपना काम करेगा। लेकिन क्या कानून हाथ में लेना और जनता को भड़काना एक नेता को शोभा देता है?
​पत्रकारों को उकसाना और हिंसा का मार्ग
​भानु प्रताप शाही ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए जिस तरह की अपील की, वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान है। पत्रकारों का काम निष्पक्ष खबरें दिखाना है, न कि किसी के इशारे पर हिंसक भीड़ का हिस्सा बनना। एक तरफ वे 'तालिबानी' शब्द का इस्तेमाल करते हैं और दूसरी तरफ खुद वैसी ही हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
​"क्या जूता और अंडा चलाना भारतीय परंपरा है? या यह उस तालिबानी वाली मानसिकता का विस्तार है जो समानता और संविधान में विश्वास नहीं रखती?"

​झारखंड मुस्लिम युवा मंच स्पष्ट कर देना चाहता है कि हम इस देश के संविधान और कानून में अटूट विश्वास रखते हैं। हम किसी भी प्रकार की हिंसा (चाहे वह किसी के भी द्वारा हो) का समर्थन नहीं करते। लेकिन, धर्म और शरीयत के नाम पर राजनीति करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि यह देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा, किसी के नफरती एजेंडे से नहीं।
​हम प्रशासन से मांग करते हैं कि भड़काऊ भाषण देने और हिंसा के लिए उकसाने के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि झारखंड की शांति व्यवस्था बनी रहे।
​जय हिंद, जय संविधान!
अध्यक्ष, झारखंड मुस्लिम युवा मंच, मोहम्मद शाहिद अय्यूबी

लोकतंत्र में 'कानून का शासन' या 'एजेंसियों की मनमानी'?​मौलाना सलीम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी ने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे और ...
30/03/2026

लोकतंत्र में 'कानून का शासन' या 'एजेंसियों की मनमानी'?
​मौलाना सलीम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी ने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक मर्यादाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब रक्षक ही प्रक्रिया को ताक पर रख दें, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या होगा?
​संविधान और लोकतंत्र क्या कहता है?
भारत का संविधान हर नागरिक को 'Article 21' के तहत गरिमा के साथ जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लोकतंत्र की खूबसूरती 'चेक एंड बैलेंस' में है। कानून कहता है कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेते समय उसकी पहचान स्पष्ट होनी चाहिए, गिरफ्तारी का मेमो बनना चाहिए और परिजनों को सूचित करना अनिवार्य है। बिना पहचान बताए 'अपराधियों की तरह' उठा ले जाना लोकतंत्र नहीं, तानाशाही का संकेत है।
​STF और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
यदि एसटीएफ (STF) या कोई भी एजेंसी बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए या बिना पहचान उजागर किए किसी को उठाती है, तो यह 'प्रक्रियात्मक अनियमितता' है। अगर गिरफ्तारी को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा, तो यह सीधे तौर पर 'Illegal Detention' (अवैध हिरासत) का मामला बनता है। क्या एजेंसियां खुद को संविधान से ऊपर मानती हैं?
ऐसे समय में परिवार को घबराने के बजाय कानूनी अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए। परिजनों को तुरंत संबंधित थाने में गुमशुदगी या अवैध हिरासत की शिकायत दर्ज करानी चाहिए और उच्च न्यायालय में 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका दायर करनी चाहिए। यह परिवार का संवैधानिक हक है कि उन्हें पता हो कि उनका सदस्य कहाँ और किस हाल में है।
समाज में इस तरह की घटनाओं से असुरक्षा और अविश्वास का माहौल पैदा होता है। एक स्वस्थ समाज वही है जहाँ कानून का पालन पारदर्शी तरीके से हो। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।
​हम मांग करते हैं कि उच्च न्यायालय इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे और कानून की गरिमा की रक्षा करे।
​मोहम्मद शाहिद अय्यूबी
अध्यक्ष: झारखंड मुस्लिम युवा मंच
​ #संविधान #मौलानासलीमचतुर्वेदी #अवैध_हिरासत #झारखंडपुलिस #न्याय
CM Yogi Adityanath
Asaduddin Owaisi

26/02/2026

मोदी जी ने उन बुनियादी मूल्यों को कमज़ोर कर दिया है जिनके लिए भारत कभी खड़ा था।
#इज़राइल #फ़िलिस्तीन #भातर

संविधान ही सर्वोच्च है।  #संविधानजिंदाबादभारत एक विविधताओं वाला देश है जहाँ अलग-अलग धर्म और मान्यताएं हैं। ऐसे में न्याय...
30/01/2026

संविधान ही सर्वोच्च है। #संविधानजिंदाबाद
भारत एक विविधताओं वाला देश है जहाँ अलग-अलग धर्म और मान्यताएं हैं। ऐसे में न्यायपालिका के लिए 'भारत का संविधान' ही वह मार्गदर्शक है जो बिना किसी भेदभाव के सबको समान न्याय सुनिश्चित करता है। संविधान की रक्षा ही लोकतंत्र की रक्षा है। 🇮🇳
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Himanta Biswa Sarma ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​ ​
30/01/2026

Himanta Biswa Sarma
















भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान के बाद Jharkhand Muslim Yuva Manch के अध्यक्ष ने बड़ा सवाल उठा दिया...  क्या   के नए न...
30/01/2026

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान के बाद Jharkhand Muslim Yuva Manch के अध्यक्ष ने बड़ा सवाल उठा दिया... क्या के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के इशारे पर रोक लगाया है?
Dr Nishikant Dubey
Himanta Biswa Sarma
















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