30/04/2026
संविधान बड़ा या नफरती बयान? Bhanu Pratap Shahi
के 'तालिबानी' सोच पर संवैधानिक प्रहार
मोहम्मद शाहिद अय्यूबी
अध्यक्ष, झारखंड मुस्लिम युवा मंच
आज ही भाजपा नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह भारतीय लोकतंत्र और 'गंगा-जमुनी तहजीब' पर सीधा हमला है। उन्होंने न केवल मंत्री इरफान अंसारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया, बल्कि शरीयत का जिक्र कर पूरे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे लोगों को अंडा, जूता और चप्पल फेंकने जैसी हिंसक गतिविधियों के लिए उकसा रहे हैं।
संविधान हमें क्या अधिकार देता है?
भानु प्रताप शाही जी को शायद भारत के संविधान को फिर से पढ़ने की जरूरत है। हमारा संविधान किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं चलता।
अनुच्छेद 25 (Article 25): यह अनुच्छेद हर भारतीय नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसके अनुसार आचरण करने और उसका प्रचार करने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है। शरीयत के अनुसार व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) का पालन करना इसी संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।
अनुच्छेद 26: यह धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है।
कानून का शासन: यदि किसी पत्रकार के साथ कोई अप्रिय घटना हुई है, तो उसके लिए देश में पुलिस, प्रशासन और अदालतें मौजूद हैं। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कानून अपना काम करेगा। लेकिन क्या कानून हाथ में लेना और जनता को भड़काना एक नेता को शोभा देता है?
पत्रकारों को उकसाना और हिंसा का मार्ग
भानु प्रताप शाही ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए जिस तरह की अपील की, वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान है। पत्रकारों का काम निष्पक्ष खबरें दिखाना है, न कि किसी के इशारे पर हिंसक भीड़ का हिस्सा बनना। एक तरफ वे 'तालिबानी' शब्द का इस्तेमाल करते हैं और दूसरी तरफ खुद वैसी ही हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
"क्या जूता और अंडा चलाना भारतीय परंपरा है? या यह उस तालिबानी वाली मानसिकता का विस्तार है जो समानता और संविधान में विश्वास नहीं रखती?"
झारखंड मुस्लिम युवा मंच स्पष्ट कर देना चाहता है कि हम इस देश के संविधान और कानून में अटूट विश्वास रखते हैं। हम किसी भी प्रकार की हिंसा (चाहे वह किसी के भी द्वारा हो) का समर्थन नहीं करते। लेकिन, धर्म और शरीयत के नाम पर राजनीति करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि यह देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा, किसी के नफरती एजेंडे से नहीं।
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि भड़काऊ भाषण देने और हिंसा के लिए उकसाने के मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि झारखंड की शांति व्यवस्था बनी रहे।
जय हिंद, जय संविधान!
अध्यक्ष, झारखंड मुस्लिम युवा मंच, मोहम्मद शाहिद अय्यूबी