04/10/2026
एक बार पोस्ट जरूर पढ़ना सब समझ में आएगा ☝️
फोटो किसी अनजान जगह का है लेकिन जो यहां पर घटना होते हुए दिख रही है इस घटना से हम अनजान नहीं हैं।
इसलिए हमने इस पर अपने विचार रखे हैं।
"मेरा यह पोस्ट पढ़ने वाले सभी मित्रों से अनुरोध है कि इस विषय पर थोड़ी गंभीरता से विचार करें और इसे समझने का प्रयास करें।
हम और आप सभी इंसान हैं। क्या कभी आपने इस बात पर गौर किया है कि 'देव' और 'दैत्य' दो बिल्कुल अलग-अलग प्रवृत्तियां हैं? दैत्य वह होता है जो राक्षसी प्रवृत्ति का होता है, जिसे दूसरों को कष्ट देकर और हिंसा फैलाकर खुशी मिलती है। इसके विपरीत, देव (देवता) हमेशा दयालु, परोपकारी और सबकी रक्षा करने वाले होते हैं। देवता कभी किसी को कष्ट में नहीं देख सकते, उनके लिए संसार का हर प्राणी—चाहे वह इंसान हो या कोई मूक जीव-जंतु—एक समान होता है।
इसके बावजूद, यदि कोई दैत्यों या राक्षसों जैसी प्रवृत्ति अपनाकर हिंसा और खून-खराबे को बढ़ावा दे, और ऐसे कृत्यों को देवी-देवताओं के नाम से जोड़े, तो क्या यह उन देवताओं के वास्तविक स्वरूप से मेल खाता है? सोचिए, जो पूजा-पाठ और परंपराएं दया और करुणा के बजाय किसी बेकसूर बेजुबान की जान लेने पर आधारित हों, वे किसी देवता की हो सकती हैं या फिर किसी आसुरी प्रवृत्ति की?
अब समय आ गया है कि हम अपनी अंतरात्मा को जगाएं, नकारात्मकता का त्याग करें और सकारात्मकता के मार्ग पर सोच-विचार करें। आइए, धर्म के नाम पर चल रहे इस पाखंड को पहचानें और अपनी सच्ची सनातन संस्कृति को बचाएं।"