02/09/2026
400 मीटर का रास्ता... रागिनी के लिए किसी बड़ी जंग से कम नहीं।
7 साल की रागिनी ने महज 6 महीने की उम्र में एक हादसे में अपना पैर खो दिया, लेकिन पढ़ने का हौसला नहीं खोया। बलिया की रागिनी एक पैर के सहारे 400 मीटर दूर स्थित अपने स्कूल तक पहुंचने की कोशिश करती है।
कभी परिवार उसे स्कूल छोड़ता है, तो कभी वह खुद एक पैर पर कूदते हुए रास्ता तय करती है। थककर बैठ जाती है, रोती है... लेकिन पढ़ने का सपना नहीं छोड़ती।
रागिनी को अब एक कृत्रिम पैर या ट्राईसाइकिल जैसे सहारे की जरूरत है, ताकि उसका स्कूल तक का सफर आसान हो सके। प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
एक पैर कम है, लेकिन हौसला पूरा है... रागिनी को बस अपने सपनों तक पहुंचने के लिए एक सहारे की जरूरत है।