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02/09/2026

दलित विरोधी मानसिकता पर कार्रवाई की मांग, कांग्रेस ने रायवाला कोतवाली में दी तहरीर
#हल्द्वानी #कांग्रेस #मल्लिकार्जुनखड़गे #जयेंद्ररमोला #दलितसमाज #उत्तराखंड_न्यूज #कांग्रेस #मल्लिकार्जुनखड़गे #जयेंद्ररमोला #दलितसमाज #उत्तराखंड_न्यूज

02/09/2026

कलयुगी नारद – किशना बगोट
कहा जाता है कि नारद मुनि दुनिया के पहले पत्रकार थे—जहाँ खबर मिली, वहाँ पहुँच गए… और जहाँ खबर नहीं मिली, वहाँ खबर बनवा दी!
अब कलियुग में नारद फिर लौट आए हैं—हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाकर।
मिलिए “कलयुगी नारद – किशना बगोट” से, जहाँ खबरें होंगी थोड़ी तीखी, सवाल होंगे थोड़े टेढ़े और अंदाज़ होगा पूरा हंसाने वाला।
राजनीति हो या समाज, नेता हों या जनता, व्यवस्था हो या हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी—कलयुगी नारद की नजर से कुछ भी नहीं बचेगा।
क्योंकि यहाँ उद्देश्य किसी को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि हँसते-हँसाते आईना दिखाना है।
कलयुग है साहब… नारद भी अपडेट हो गए हैं!
#कलयुगी_नारद #किशना_बगोट #हास्य_व्यंग्य #व्यंग्य_की_नजर #उत्तराखंड

02/09/2026

कलयुगी नारद – किशना बगोट

कहा जाता है कि नारद मुनि दुनिया के पहले पत्रकार थे—जहाँ खबर मिली, वहाँ पहुँच गए… और जहाँ खबर नहीं मिली, वहाँ खबर बनवा दी!
अब कलियुग में नारद फिर लौट आए हैं—हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाकर।
मिलिए “कलयुगी नारद – किशना बगोट” से, जहाँ खबरें होंगी थोड़ी तीखी, सवाल होंगे थोड़े टेढ़े और अंदाज़ होगा पूरा हंसाने वाला।
राजनीति हो या समाज, नेता हों या जनता, व्यवस्था हो या हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी—कलयुगी नारद की नजर से कुछ भी नहीं बचेगा।
क्योंकि यहाँ उद्देश्य किसी को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि हँसते-हँसाते आईना दिखाना है।

कलयुग है साहब… नारद भी अपडेट हो गए हैं!

#कलयुगी_नारद #किशना_बगोट #हास्य_व्यंग्य #व्यंग्य_की_नजर #उत्तराखंड

AI की उड़ान भरेगी मातृशक्ति, ऋषिकेश में महिलाओं को मिला तकनीक का प्रशिक्षण
02/09/2026

AI की उड़ान भरेगी मातृशक्ति, ऋषिकेश में महिलाओं को मिला तकनीक का प्रशिक्षण

ऋषिकेश। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय मे.....

28/08/2026

एक बाजार… तीन विधानसभाओं के वोटर!
पौड़ी गढ़वाल का गुमखाल बाजार सिर्फ खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि राजनीति और भूगोल की एक अनोखी तस्वीर भी है।
गुमखाल ऐसा बाजार है, जहाँ आने वाले लोगों में तीन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों—यमकेश्वर, चौबट्टाखाल और लैंसडौन के मतदाता शामिल हैं।
यानी एक ही बाजार में आपको तीन विधानसभाओं की राजनीतिक नब्ज़ सुनाई दे सकती है।
यहाँ दुकानें भले एक ही बाजार में हों, लेकिन वोटर तीन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से आते हैं। पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियाँ किस तरह लोगों के जीवन, बाजार और राजनीति को जोड़ती हैं—गुमखाल इसका एक शानदार उदाहरण है।
एक बाजार… तीन विधानसभा… और तीन अलग-अलग राजनीतिक समीकरण।
गुमखाल की इस अनोखी कहानी को जानने के लिए वीडियो जरूर देखिए।

#गुमखाल #पौड़ीगढ़वाल #यमकेश्वर #चौबट्टाखाल #लैंसडौन #उत्तराखंड #उत्तराखंडराजनीति #पहाड़ #गढ़वाल

28/08/2026

बुगुल — पहाड़ का अपना ‘आग का डिब्बा’
आज हमारे लिए आग जलाना बस एक माचिस की तीली जलाने जितना आसान है, लेकिन कभी पहाड़ों में माचिस हर घर की चीज़ नहीं हुआ करती थी।
तब प्रकृति ही लोगों की जरूरतों का सहारा थी। उत्तराखंड में पाया जाने वाला ‘बुगुल’ पौधा भी इसी पुरानी जीवन-परंपरा की एक अनोखी कहानी अपने भीतर समेटे हुए है।
बुगुल के पत्तों में आग को सुरक्षित रखने की परंपरा रही है। पत्तों को इस तरह रखा जाता था कि उनमें अंगारा देर तक सुलगता रहे और जरूरत पड़ने पर उसी सुलगती आग से चूल्हा फिर जलाया जा सके।

सोचिए… न माचिस, न लाइटर और न गैस का चूल्हा—फिर भी पहाड़ के घरों में आग बुझने नहीं दी जाती थी।
यह सिर्फ एक पौधे की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस दौर की पहाड़ी बुद्धिमत्ता, आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ तालमेल की कहानी है।
आज आधुनिक सुविधाओं के बीच हम ऐसी कई लोक-परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। बुगुल हमें याद दिलाता है कि हमारे पहाड़ों के बुजुर्गों ने प्रकृति को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उसे समझा और अपने जीवन का हिस्सा बनाया था।

प्रकृति के पास हर समस्या का कोई न कोई समाधान था… बस उसे पहचानने वाली नजर चाहिए थी।

#बुगुल #उत्तराखंड #पहाड़कीपरंपरा #लोकज्ञान #पहाड़ीसंस्कृति #प्रकृति #पारंपरिकज्ञान #उत्तराखंडकीविरासत #गौं_गुठ्यार

28/08/2026

इस पेड़ से परिवार चलाने की एक बड़ी सीख मिलती है…
इस पेड़ को ध्यान से देखिए—इसकी लगभग आधी टहनियों पर फल लगे हैं, जबकि बाकी आधी टहनियां बिल्कुल खाली हैं।
लेकिन अगले साल शायद कहानी बदल जाएगी।
जिन टहनियों पर आज फल हैं, हो सकता है वे अगले साल खाली रहें… और जो आज खाली हैं, उन पर कल फल आएं।
कुदरत शायद हमें यही संदेश दे रही है—
परिवार में भी हमेशा ऐसा नहीं होता कि हर समय सबकी तिजोरी भरी रहे, हर सदस्य खुश रहे और हर किसी के हिस्से में बराबर सुख आता रहे।
कभी किसी के पास ज्यादा होता है, तो किसी के पास कम।
कभी एक आगे बढ़ता है, तो दूसरे को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।
लेकिन परिवार की खूबसूरती इस बात में है कि जिस टहनी पर आज फल हैं, वह खाली टहनी को सहारा दे… और जब समय बदले तो खाली टहनी भी फल देकर परिवार को संभाले।
समय बदलता रहता है, सुख-दुख आते-जाते रहते हैं…
पर परिवार का पेड़ तभी हरा-भरा रहता है, जब उसकी हर टहनी एक-दूसरे का साथ देती है।

कुदरत की पाठशाला में आज का सबक—
"हर टहनी पर हर मौसम में फल नहीं आते, मगर पेड़ फिर भी परिवार बना रहता है।" ️

#कुदरत_की_सीख #परिवार #प्रकृति #पहाड़ #उत्तराखंड #जीवन_की_सीख #पहाड़ों_की_झलक

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