18/04/2026
*एमडीयू की प्रशासनिक विफलता: एमएससी (जाट कॉलेज) के छात्रों को 'अनुपस्थित' दिखाकर भविष्य से खिलवाड़, एएसएपी ने खोला मोर्चा - दीपक धनखड़*
*विश्वविद्यालय और कॉलेज के बीच फंसा छात्रों का भविष्य , तीन सप्ताह से दर-दर की ठोकरें खा रहे एमएससी के छात्र - दीपक धनखड़*
*अवार्ड लिस्ट गायब होने का खामियाजा भुगत रहे निर्दोष विद्यार्थी, एएसएपी ने रजिस्ट्रार प्रो. संदीप बंसल को सौंपा ज्ञापन*
*प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली पर भड़के छात्र: परीक्षा सर पर, पर परिणाम सुधार के लिए एमडीयू और कॉलेज के चक्कर लगाने को मजबूर - धनखड़*
*छात्रों के मानसिक उत्पीड़न पर एएसएपी सख्त: परिणाम सुधार के लिए जल्द गठित हो उच्च-स्तरीय जांच कमेटी*
हरियाणा आलोक न्यूज रोहतक
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की परीक्षा शाखा और शिक्षण संस्थानों के बीच आपसी तालमेल की कमी और घोर प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा एक बार फिर विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। मामला ऑल इंडिया जाट हीरोज मेमोरियल कॉलेज के एमएससी फिजिकल केमिस्ट्री (तीसरे सेमेस्टर) के छात्रों से जुड़ा है, जिनका परीक्षा परिणाम 4 अप्रैल को घोषित किया गया था। इस परिणाम में प्रशासनिक त्रुटि का एक ऐसा उदाहरण देखने को मिला जिसने छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इन सभी छात्रों ने अपनी परीक्षा पूरी निष्ठा के साथ दी थी, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें प्रैक्टिकल विषय में 'अनुपस्थित' (Absent) दर्शा दिया गया। यह स्थिति न केवल छात्रों के लिए चौंकाने वाली है, बल्कि विश्वविद्यालय के मूल्यांकन तंत्र की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।
इस गंभीर समस्या को लेकर एएसएपी (असोसिएशन ऑफ स्टूडेंट फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स) आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ के नेतृत्व में पीड़ित छात्र एकत्रित हुए और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. संदीप बंसल के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। धनकड़ का कहना है कि जब विद्यार्थियों ने इस बाबत एमडीयू की परीक्षा शाखा में संपर्क किया, तो वहां से यह जवाब मिला कि कॉलेज की ओर से 'अवार्ड' (मार्क्स लिस्ट) विश्वविद्यालय को नहीं भेजे गए हैं। वहीं, जब छात्र यही बात लेकर अपने कॉलेज पहुंचे, तो वहां से उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि अवार्ड समय पर भेजे जा चुके हैं। इस प्रकार, विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन के बीच जारी इस 'खींचतान' की रस्साकशी में निर्दोष विद्यार्थी तीन सप्ताह से दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
छात्र नेता दीपक धनखड़ ने कहा कि एमडीयू प्रशासन व जाट कॉलेज अपनी ही गलती का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ने के चक्कर में यह भूल गया है कि इस मानसिक प्रताड़ना का शिकार केवल छात्र हो रहे हैं। जिनकी आगामी शिक्षा भी प्रभावित हो रही है ।
जाट कॉलेज के पूर्व प्रधान एवं एएसएपी के जिला अध्यक्ष आशीष मलिक ने छात्रों की व्यथा एमडीयू के रजिस्टर के साथ साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में स्थिति बेहद चिंताजनक है। अभी आगामी तीन सप्ताह के भीतर छात्रों की अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में, इन विद्यार्थियों को यह समझ नहीं आ रहा है कि वे अपनी पढ़ाई करें, परीक्षा की तैयारी में जुटें या फिर विश्वविद्यालय और कॉलेज के दफ्तरों के चक्कर काटें। उन्होंने कहा कि शुल्क जमा करने के बाद भी छात्रों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो कि अत्यंत खेदजनक है। फीस भरने का अर्थ ही यह है कि छात्र प्रशासन से एक व्यवस्थित सेवा की उम्मीद रखते हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल आश्वासन और अनिश्चितता मिल रही है। यह प्रशासनिक उत्पीड़न विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
एएसएपी के प्रदेश उपाध्यक्ष रॉबिन मलिक ने इस समस्या के व्यापक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एमडीयू में यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पिछले कुछ समय से विभिन्न विभागों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ परिणाम में देरी, अवार्ड गायब होने या अनुपस्थित दर्शाए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। एएसएपी ने स्पष्ट रूप से रजिस्ट्रार से मांग की है कि विश्वविद्यालय स्तर पर एक उच्च-स्तरीय जांच कमेटी का अविलंब गठन किया जाए। इस कमेटी का मुख्य कार्य उन सभी मामलों का निपटारा करना होना चाहिए जहां प्रशासनिक कमियों के कारण छात्रों के परिणाम अटके हुए हैं। रॉबिन मलिक ने जोर दिया कि बार-बार छात्रों को कार्यालयों के चक्कर लगवाने के बजाय, विश्वविद्यालय को एक 'सिंगल विंडो' समाधान प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों को अपनी समस्या के समाधान के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
छात्र संगठन ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेताया है कि यदि छात्रों की इस समस्या का समाधान आगामी दो दिन में नहीं किया गया, तो एएसएपी अपना आंदोलन और तेज करने के लिए बाध्य होगा। धनकड़ ने कहा कि एक जिम्मेदार संगठन होने के नाते, एएसएपी का मानना है कि छात्रों की आवाज उठाना और उनकी मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा होना उनका प्राथमिक कर्तव्य है। एएसएपी की टीम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक सभी विद्यार्थियों के परिणाम सही तरीके से अपडेट नहीं कर दिए जाते। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अन्य विद्यार्थियों में निकिता, कुनिका, कृष्णा, कल्पना, दीक्षा, रेमन, तमन्ना, विशिता, सोनिका, नेहा, प्रिया, राहुल, रोहित, कार्तिक, सचिन, साहिल और शुभम सहित कई अन्य विद्यार्थी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में अपने परिणामों में सुधार और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग की।