27/11/2025
हरियाणा भारत का अकेला ऐसा राज्य है, जिसमें अस्सी प्रतिशत जनमानस द्वारा परस्पर संवाद की भाषा या बोली हरियाणवी बोलने पर निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जुर्माना तक करने की व्यवस्था है।यही नहीं अपितु हरियाणवी बोलने को गंवारपन, पिछड़ेपन और मूढ़ता का पर्याय माना जाता है। वैसे कहने को तो महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर हरियाणवी को पढाया भी जाता है लेकिन वहां भी प्रश्नोत्तर हिंदी भाषा में ही होता है, हरियाणवी में नहीं। पंजाबी,असमी, गुजराती, तमिल, तेलगु, मलयालम आदि किसी भाषाभाषी या बोली बोलने वाले जनमानस के साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं होता है। हरियाणा दिवस पर अनेक प्रकार के कार्यक्रम पिछले चार-पांच दिन से चल रहे हैं, मैंने इस विषमता पर किसी भी लेखक, विद्वान या आयोजक को इस संबंध में एक पंक्ति तक बोलते नहीं सुना है। हरियाणवी के विभिन्न समूहों में भी इस विषय में कोई विचार विमर्श नहीं हो रहा है। पता नहीं किस प्रकार के हरियाणवी हितैषी लोग हैं? हरियाणा राज्य को बने हुये लगभग आधी सदी व्यतीत हो चुकी है लेकिन भारतभर के लेखकों, विचारकों, विद्वानों, उच्च शिक्षित शिक्षकों, अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की हरियाणवी के प्रति हीनता,निम्नता और पिछड़ेपन की भावना में कोई कमी नहीं आई है। तथाकथित पढ़ें लिखे लोगों के मध्य हरियाणवी बोलते ही उनके चेहरों के उपहास के हाव-भाव सरलता से देखे जा सकते हैं।