18/05/2026
सावधान! गोवा व्यू' के चक्कर में कहीं अंतिम व्यू न बन जाए, श्रीनगर बांध के जलाशय में जानलेवा स्टंट कर रही सोशल मीडिया की पलटन
सोशल मीडिया पर इन दिनों रील्स और तस्वीरों की बाढ़ आई हुई है। बैकग्राउंड में कूल म्यूजिक बज रहा है और लोग उत्तराखंड की वादियों में समंदर के मजे ले रहे हैं। श्रीनगर में जेवीके कंपनी के बांध के ठीक ऊपर, सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर के पास एक शानदार रेतीला टापू क्या नजर आया, लोगो ने इसे तुरंत गोवा व्यू घोषित कर दिया। जो लोग गर्मी से परेशान थे और गोवा का टिकट अफोर्ड नहीं कर पा रहे थे, उनके लिए तो जैसे लॉटरी लग गई है। लेकिन रील्स के शौकीन भाइयों और सेल्फी की शौकीन बहनों, इस 'गोवा व्यू' के पीछे की जो असली क्रोनोलॉजी है, उसे भी थोड़ा समझ लीजिए, कहीं ऐसा न हो कि यह मौज-मस्ती जिंदगी की आखिरी रील साबित हो जाए।
तकनीकी ज्ञान यह है कि यह कोई प्राकृतिक समंदर का किनारा नहीं है, बल्कि बांध का वो जलाशय (रिज़र्वायर) है जहाँ बरसात में लबालब पानी भरा रहता है। आजकल गर्मियों में पीछे से पानी कम आ रहा है, तो साहब ने अपना जलस्तर थोड़ा नीचे कर लिया। पानी क्या घटा, अलकनंदा नदी द्वारा सालों से बहाकर लाई गई रेत और गाद की विशाल परत बाहर निकल आई। अब हमारी सोशल मीडिया वाली जनता को कौन समझाए कि महीनों से पानी के नीचे दबी यह रेत देखने में जितनी सूखी और आकर्षक लगती है, अंदर से उतनी ही खतरनाक दलदल होती है। इस पर पैर रखते ही कब आदमी सीधे नीचे समा जाए, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
रही-सही कसर बांध के जलाशय का अप्रत्याशित मिजाज पूरी कर देता है। पहाड़ों में ऊपर कहीं भी हल्की फुल्की बारिश हुई, या बांध प्रबंधन ने पानी रोकना शुरू किया, तो इस जलाशय का जलस्तर चंद मिनटों में कई फीट ऊपर चढ़ जाता है। यानी जिस टापू पर आप अभी तौलिया बिछाकर 'गोवा वाले बीच पे' गा रहे हैं, वो पलक झपकते ही गहरे पानी के भीतर होगा। समंदर की लहरें तो फिर भी आगे आकर पीछे लौट जाती हैं, लेकिन इस जलाशय की गहराई और पहाड़ों के ठंडे पानी का अंडरकरंट अच्छे-अच्छे सूरमाओं को संभलने का मौका नहीं देता। बिना किसी लाइफगार्ड, बिना किसी सुरक्षा घेरे के इस डेंजर ज़ोन में नहाने उतरना सीधे यमराज को 'फ्रेंड रिक्वेस्ट' भेजने जैसा है।
सबसे मजेदार बात तो यह है कि पवित्र धारी देवी मंदिर के ठीक सामने आस्था की जगह अब रील्स का 'स्वैग' चल रहा है। चिप्स के पैकेट, प्लास्टिक की बोतलें और गंदगी फैलाने का जो गोवा कल्चर है, वो भी यहाँ धीरे-धीरे लैंड कर रहा है। प्रशासन और बिजली कंपनी शायद किसी बड़े हादसे की रील वायरल होने का इंतजार कर रहे हैं, तभी तो यहाँ न कोई चेतावनी बोर्ड है और न कोई रोकने वाला। पर्यटन के नाम पर इस जानलेवा लापरवाही को 'कूल' समझना कहाँ की समझदारी है
अब जनता जनार्दन ही बताए
1 क्या धारी देवी मंदिर जैसे पवित्र क्षेत्र के ठीक सामने इस तरह का हुड़दंग और 'गोवा कल्चर' सही है?
2 प्रशासन और बांध कंपनी को क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही होश आएगा, या यहाँ तुरंत सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए?
3 रील्स बनाने के चक्कर में जान जोखिम में डालने वाले इन सैलानियों पर आपकी क्या राय है?
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फ़ोटो एक प्रतीकात्मक है। एक वीडियो से फ़ोटो सूट की गयी