Uttarakhand Ek Jhalak

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https://youtube.com/ उत्तराखण्ड की ख़ूबसूरत वादियां

04/05/2026


आकाशीय बिजली गिरने से चमोली
निजमुला घाटी के गौणा-भनाली तोक में 500 बकरियों की दर्दनाक मौत। एक दर्जन भेड़ पालको का लाखो का नुकसान।
#निजमुला_घाटी

03/05/2026

चार धाम यात्रियों से विशेष निवेदन है की आजकल सांय मौसम खराब हो रहा है, पहाड़ो मे तेज औलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश और तूफान के साथ तेज गर्जन हो रही.. मौसम का पूर्वनुमान से यात्रा करें। एवं प्रशासन का सहयोग करें।
तस्वीर रुद्रप्रयाग के तून गधेरे की है जंहा नाले की गंदगी बारिश मे बहकर यात्रियों के वाहनों पर पढ़ रही।

02/05/2026

तेज बारिश के चलते केदारनाथ मे हवाई सेवा पर रोक।

02/05/2026

कांग्रेस छोड़ बिजेपी मे शामिल हुई कांग्रेस की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग लक्ष्मी राणा।

02/05/2026

जबलपुर के बरगी डैम में पर्यटकों से भरा क्रूज डूबने का वीडियो आया सामने !!! ईश्वर मृतकों की आत्मा को शांति दे। ॐ शांति 😌🙏

 #केदारनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन…
30/04/2026

#केदारनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन…

यात्रा के मुख्य पड़ावदिल्ली से केदारनाथ की कुल दूरी लगभग 450 किमी है, जिसे आप इन चरणों में पूरा कर सकते हैं:दिल्ली से हरि...
30/04/2026

यात्रा के मुख्य पड़ाव
दिल्ली से केदारनाथ की कुल दूरी लगभग 450 किमी है, जिसे आप इन चरणों में पूरा कर सकते हैं:
दिल्ली से हरिद्वार/ऋषिकेश: यह यात्रा का पहला चरण है। हरिद्वार को "देवभूमि का द्वार" माना जाता है।
ऋषिकेश से देवप्रयाग: यहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है, जहाँ से आगे इसे 'गंगा' के नाम से जाना जाता है।
देवप्रयाग से रुद्रप्रयाग: इस स्थान पर अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का मिलन होता है। केदारनाथ जाने के लिए यहाँ से मंदाकिनी नदी के किनारे का मार्ग लिया जाता है।
रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग/गौरीकुंड: गौरीकुंड वह अंतिम स्थान है जहाँ तक वाहन जा सकते हैं।

27/04/2026

#रम्माण

रम्माण उत्तराखंड के चमोली जिले के सलूड़-डुंग्रा गांव में प्रतिवर्ष वैशाख (अप्रैल) में आयोजित होने वाला एक अनोखा धार्मिक और सांस्कृतिक मुखौटा नृत्य उत्सव है। यह स्थानीय भूम्याल देवता को समर्पित है। 2009 में UNESCO द्वारा विश्व धरोहर घोषित, यह नृत्य बिना किसी संवाद के, ढोल-दमाऊ की 18 तालों पर रामायण के प्रसंगों को 18 मुखौटों के साथ दर्शाता ह
रम्माण की मुख्य विशेषताएं:
स्थान: मुख्य रूप से चमोली जिले के सलूड-डुंग्रा गांव में आयोजित, यह Painkhanda घाटी की अनूठी परंपरा है।
प्रस्तुति शैली: यह एक अशाब्दिक (बिना संवाद के) नृत्य नाटिका है, जिसमें भेष बदलकर (मुखौटा पहनकर) रामायण और लोक कथाओं का मंचन किया जाता है।
मुखौटे और वाद्ययंत्र: नृत्य में भोजपत्र से निर्मित 18 विशेष मुखौटों (गणेश, कालिका, बणिया, आदि) का उपयोग होता है। यह आयोजन 12 ढोल, 12 दमाऊ और 18 तालों की गूंज के साथ होता है।
धार्मिक महत्व: यह भूम्याल देवता (भैरव) को प्रसन्न करने और फसल की अच्छी कामना के लिए आयोजित किया जाता है।
संरक्षण: यह स्थानीय समुदाय द्वारा अपनी प्राचीन विरासत को सहेजने का एक बड़ा प्रयास है, जिसमें नई पीढ़ी भी उत्साह से भाग लेती है।

24/04/2026

चमोली-/बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुहेड़ के पास आज एक कार अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई।
#न्यूज़चमोली

23/04/2026

#केदारनाथ यात्रा मे दिखा कलयुग का श्रवण कुमार... 3 माह 24 दिन से पैदल यात्रा कर रहे है श्रवण।

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