Ak writing

Ak writing दिल को छू जाने वाली शायरी

30/07/2026

"मेरे खिलाफ़ बोलने वालों कि तादाद
ने मुझे बताया कि मैं मामूली हस्ती नहीं हूँ....

29/07/2026

"हो अगर नियत में पर्दा...
तो निगाहों से खूबसूरत कोई लिबास नहीं...

22/07/2026

मलाल ये नहीं की ज़हालत तख्त पर बैठी हैं,
हैरत ये है कि इल्म उसके जूते उठाये खड़ा है ! 🍁

16/07/2026

जो वक़्त रहते मोती की क़दर नहीं करते,
बेवक़्त उन्हें पत्थर भी नसीब नहीं होते। 🖤

08/06/2026

उसे छुना नहीं बस उसे देखना सुकून है,
दूर रहकर भी उसका साथ होना सुकून है

ना कोई जिद है उसे पाने की ना कोई दावा है,
उसकी एक झलक मे खो जाना ही सुकून है..

वो सामने हो दिल और भी खामोश हो जाए
बिना कहे उसका समझ जाना सुकून है..

ना रिश्तों का नाम है ना कोई बंधन है,
बस यूहीं उसे चाहना ही सुकून है..

मिलना ना मिलना किस्मत की बात है,
हर ख्वाब मे उसका आ जाना ही सुकून है..
🖤🙂

05/06/2026

किसी की पसंद बनने के लिए हमने किरदार नहीं बदले ,
हम कल जो थे आज भी वही है...

अल्फ़ाज़ के भी हाथ होते हैं...!!🌸वो या तो सहलाते हैं या गला घोंट देते हैं...!!
02/06/2026

अल्फ़ाज़ के भी हाथ होते हैं...!!🌸

वो या तो सहलाते हैं या गला घोंट देते हैं...!!

कभी-कभी किसी अजनबी से हुआ प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि आत्मा का आध्यात्मिक स्पर्श होता है। वहाँ शब्दों से अधिक मौन सम...
31/05/2026

कभी-कभी किसी अजनबी से हुआ प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि आत्मा का आध्यात्मिक स्पर्श होता है। वहाँ शब्दों से अधिक मौन समझता है, और पहचान से अधिक ऊर्जा जुड़ती है। ऐसा प्रेम हमें यह एहसास दिलाता है कि आत्माएँ पहले से कहीं गहराई में एक-दूसरे को जानती थीं। शायद इसी लिए किसी अजनबी में अचानक अपना-सा महसूस होना, ईश्वर की उस अदृश्य डोर का संकेत है जो प्रेम के माध्यम से आत्माओं को जोड़ती है।

कुछ रिश्ते नामों के मोहताज नहीं होते, वे बस रूह की दहलीज़ पर चुपचाप उतर आते हैं...।

मेरा तुमको चाहना कभी इस बात पर निर्भर नहीं करेगाकि तुम मुझे कितना चाहते होचाहते भी थे या नहीं, तुम आजाद हो हक़ नहीं तुम ...
28/05/2026

मेरा तुमको चाहना
कभी इस बात पर निर्भर नहीं करेगा
कि तुम मुझे कितना चाहते हो
चाहते भी थे या नहीं,
तुम आजाद हो
हक़ नहीं तुम पे मेरा
तुमने जितनी जगह दी
मेरे कदम वहीं रुके रहें।
जानती हूं
मैं वो नहीं हूं
जो तुम्हारे सपनों में रंग भरे,
जिसके साथ दूर तक
तुम चलना चाहो
मेरे से पहले कई लोग है
तुम्हारी जिंदगी में,
जो तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण है
तुम्हारा वक्त भी उनका है
तुम्हें चाहने वाले बहुत है
तो मेरी जगह ही कहां उनके आगे
वो जब जब तुम्हारे करीब आयें
मै दूर बहुत दूर होती चली गई
ये जानते हुए भी कि
मेरे लिए बस तुम हो
हां ताउम्र ये मलाल रहेगा
मुझे तुम नहीं देख पाए
मेरे जिंदगी में अपनी जगह
अभी तुम बहुत उलझे हो
कुछ भ्रम में, कुछ सच्चाई में।
जैसे जैसे धूप खिलेगी
धुंध छटती चली जायेगी
तब शायद किसी दिन
तुम महसूस कर पाओगे मेरे प्यार
को, मेरी बातों को।
सुन सकोगे उन सारे शब्दों को
जो मेरे अंदर ही घुट गए।
समझ सकोगे मेरी उन सारी
पीड़ाओं को जिसे मैं अंदर लिए हुए
तुम्हारी जिंदगी से इतनी दूर
चली जाऊंगी
तुमने अगर आवाज दी भी तो
शायद इतनी देर हो चुकी हो कि
मुझ तक कभी पहुंच ही न सके !

25/05/2026

ये जो थम सी गई है, तुमसे बात करने की तलब..
यकीन मानों, इसके पीछे "सिसकियाँ" बेहिसाब हैं,

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