05/09/2026
100 वर्ष पुरानी मस्जिद तोड़े जाने पर जनआक्रोश।
'अदब और गंगा-जमुनी तहज़ीब' के शहर में लोगों की भावनाएं आहत।।
शहर के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वर्षों पुरानी मस्जिद को हटाए जाने/तोड़े जाने की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष और दुख व्याप्त है। समाजवादी पार्टी से विधायक आशु मालिक का कहना है कि यह मस्जिद केवल एक इबादतगाह नहीं, बल्कि शहर के गौरवशाली इतिहास और साझा संस्कृति की एक अटूट पहचान थी।
आशु मालिक ने कहा कि यह मस्जिद लगभग 100 वर्ष पुरानी है। इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि जिस ज़मीन पर कलेक्ट्रेट का निर्माण हुआ है, वह ज़मीन भी उन्हीं लोगों द्वारा दी गई थी जिन्होंने इस मस्जिद की स्थापना की थी। ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सांस्कृतिक विरासत पर प्रभाव
शहर अपनी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और 'अदब की रिवायत' के लिए जाना जाता है, जहाँ सभी वर्गों का परस्पर सम्मान रहा है। विधायक आशु मालिक का मानना है कि इस ऐतिहासिक मस्जिद को तोड़े जाने की कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं थी।विकास कार्यों या अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच भी इस 100 साल पुरानी इमारत को सुरक्षित रखा जा सकता था।उन्होंने कहा कि अचानक हुई इस कार्रवाई से शहर के शांतिप्रिय नागरिकों और धरोहर प्रेमियों को गहरी मानसिक ठेस पहुँची है।
प्रशासन से अपील की है कि शहर की ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि शहर का सांस्कृतिक ताना-बाना और सौहार्द कायम रहे।
रिपोर्ट : राहुल पटेल।
द इनसाइड स्टोरी।
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