30/04/2026
patel_medical_nagda said एक बेहद दर्दनाक और झकझोर 🥺💔🥹देने वाली घटना सामने आई है। जिटू मुंडा नाम के एक व्यक्ति अपनी बहन के खाते से ₹19,300 निकालने के लिए बैंक पहुँचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि पैसे तभी मिलेंगे जब अकाउंट होल्डर खुद आए या फिर कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएँ।
समस्या यह थी कि उनकी बहन की दो महीने पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। जिटू मुंडा अनपढ़ थे और उनके पास न तो डेथ सर्टिफिकेट था और न ही बैंक प्रक्रिया की कोई जानकारी। कई बार समझाने के बावजूद जब उनकी बात नहीं मानी गई, तो उन्होंने मजबूरी में एक बेहद दर्दनाक कदम उठाया।
बताया जाता है कि वे श्मशान घाट से अपनी बहन के अवशेष निकालकर कपड़े में लपेटकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक तक ले गए। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए और पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
यह घटना सिस्टम की संवेदनहीनता और गरीबों की बेबसी को उजागर करती है। क्या नियमों के नाम पर इंसानियत को इस हद तक नजरअंदाज करना सही है?
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