29/05/2026
3 मार्च 2000 को पहली बार सीएम पद का शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार गच्चा खा चुके थे। फिर उन्होंने धैर्यपूर्वक पांच साल का इंतजार किया। 24 नवंबर 2005 को जब शपथ लिए तो उनके पास बहुमत वाली समस्या नहीं थी। दिल में राहत थी और चेहरे पर सुकून था। 2005 वाली शपथ समारोह में नीतीश कुमार की पत्नी मंजू सिन्हा अपने बेटे निशांत के साथ शामिल हुई थीं। नीतीश कुमार काफी खुश थे। शपथ के बाद मंजू सिन्हा को अपनी गाड़ी से छोड़ने उनके मायके तक गए, यानी अपने ससुराल तक। गेट पर नए-नवेले सीएम की गाड़ी रूकी। नीतीश कुमार कार से बाहर निकले। फिर उनकी पत्नी मंजू सिन्हा गाड़ी से उतरीं। नीतीश कुमार गेट के अंदर नहीं गए। सड़क पर खड़े होकर ही उन्होंने कहा, 'मैडम, अच्छा तो हम चलते हैं।' फिर गाड़ी में बैठकर चल दिए।
दरअसल, सोशल मीडिया पर 25 नवंबर 2005 को शेयर की गई एक अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शायद मंजू सिन्हा का मीडिया से थोड़ी-बहुत आखिरी इंटरैक्शन है। पटना के कंकड़बाग (पीपुल्स कॉपरेटिव कॉलोनी) में नीतीश कुमार का ससुराल यानी मंजू सिन्हा का मायका था। नीतीश कुमार भले ही अपनी राजनीतिक मजबूरियों की वजह से पटना और दिल्ली के बंगला में शिफ्ट होते रहे, मगर मंजू ने अपना ज्यादातर वक्त मायके में ही गुजारा। पटना के यारपुर स्थित कमला नेहरू बालिका उच्च विद्यालय में वो शिक्षिका थीं।