Sasaram - a - ishq

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जब हम सब सासाराम की गौलक्षिणी में 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे। उस समय की आप सबकी यादें जो आपकी जीवन में एक नए एहसास को जन्म दिया हो। आप भी बताएं क्या हुआ था आपके साथ? आप भी अपनी कहानी को लोगों को बता सकते हैं। नाम बदल कर कहानी साझा किया जाता है।

मै बस सुबह होने का हीं इंतजार कर रहा था। क्योंकि कल सुबह छठ का अरग मेरी जान देने वाली है। हमसे बोली है कि इस बार छठ मां ...
31/10/2025

मै बस सुबह होने का हीं इंतजार कर रहा था। क्योंकि कल सुबह छठ का अरग मेरी जान देने वाली है। हमसे बोली है कि इस बार छठ मां से तुम्हे हीं मागूंगी और सबसे पहले पानी में डुबकी लगाऊंगी और सूर्य देव से प्रार्थना करूंगी कि हे सूर्यदेव... मुझे मेरे पति के रूप में मेरे प्यार को हीं दे दीजिए। इसलिए मैं सुबह होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। रात के 2 बज चुके हैं पर अभितक मुझे नींद की एक झपकी भी नहीं आई है। जैसे तैसे सुबह के 4 बजा और मुंह धो-धाकर थोड़ा सा फेयर एंड हैंडसम लगाकर हीरो बन गया। और सूर्य के निकलने से पहले मै छठ घाट पर पहुंच गया। पोखरा में बहुत लोग उतर चुके थे। मेरी नजरे पूरी बेचैनी में मेरी जान के दीदार में बेकरार हो रही थी। तभी मेरी नजर मेरी जानेमन पर टिक गई । जो एकदम जलपरी लग रही थी । वो गिले बाल और गीली कपड़े में सूर्य के तरफ अगरबत्ती लिए कयामत ढा रही थी। अब बस मै यह चाहता था कि किसी तरह उसकी नजरें मुझपर पड़ जाए। और फाइनली उसकी नजर मुझपर पड़ी और वह मुस्कुरा पड़ी मैने इशारों में उसे आश्वासन दिया कि मै आ गया हूं तुम्हारे पास। जबतक सूर्योदय नहीं हुआ वो सूर्य को और मै उसे देखता रहा। सूर्योदय के उपरांत सभी ने अरग दिया और जल के बाहर आने लगे। मेरी जानेमन भी बाहर आई कपड़े बदली और छठ मां के प्रसाद लाकर मेरे हाथ पर जोर से रखा और कहा मांग लिया तुझे छठ मईया से। मैने भी बोला कि हो गया मै तेरा और तू मेरे लिए क्या हीं कर सकती है इससे बढ़के। फिर वो अपने घर को चली गई।

#कहानी

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26/10/2025

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05/10/2025

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25/09/2025

छूने से ज्यादा देखने में जो सुकून मिलता है न...
वो प्रेम है।

प्यार, दर्द, तड़प और मौत  part -2  एक नादान प्यार का गहरा छाप हैलो दोस्तों इस कहानी के दूसरे पार्ट में आपका स्वागत है। ज...
20/06/2025

प्यार, दर्द, तड़प और मौत part -2
एक नादान प्यार का गहरा छाप

हैलो दोस्तों इस कहानी के दूसरे पार्ट में आपका स्वागत है। जैसा कि मैने पार्ट - 1 में बताया था कि कैसे शोभा कई दिन गायब होने के बाद मुझे एक दिन दिखाई दी और उसके अगले दिन मुझे सुनने को मिलता है कि वो इस दुनिया को छोड़ के चली गई।
तो शुरू करते हैं इस अगली कड़ी को

शोभा की मौत हो चुकी है
यह खबर सुनकर मेरा शरीर सुन रह गया। मै इस बात को विश्वास नहीं कर पा रहा था , की कल ही तो उसको मुस्कुराते हुए देखा था। कल तबियत तो उसका सही लगा था मुझे। आखिर आज रात भर में क्या हो गया उसे ? मेरे मन में अनेकों सवाल थे। मैने पहले इस खबर की पुष्टि करने की सोची। और घर से साइकिल निकाला और उसके गांव की ओर निकल गया। उसके गांव जब पहुंचा तो पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। कोई कुछ बता भी नहीं रहा था। वहां के कुछ दोस्तों से मिला तो उसके मौत की खबर सत्य साबित हुई। मै बस खबर सुनकर वहां से निकल गया मेरा रूह रो रहा था। मै अंदर से तड़प रहा था और आंसुओं की धार बह रही थी।
गांव के रस्ते में ही एक मंदिर था तो वहीं साइकिल खड़ा किया और मंदिर के प्रांगड़ में बैठकर उसकी यादों में सराबोर हो गया।
सोचने लगा उसकी कल की मुस्कुराहट के बारे में जो मेरे जीवन में उसकी आखिरी मुस्कुराहट थी। अब मुझे हर तरफ वो मुस्कुराते हुए दिख रही थी और मुझसे हजारों सवाल कर रही थी... की आपने मेरा उस दिन रस्ते में हेल्प क्यों नहीं किया जब मै दर्द से तड़प रही थी???

अपने पिछले दिन मुझसे कुछ बोला क्यों नहीं?

मै आपके पास बात करने आना चाहती थी आप मुझे इशारा से बुलाए क्यों नहीं?

मेरा इतना दिन तबियत खराब था आपने मेरे हाल पूछा क्यों नहीं।

मै उसके किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे पा रहा था बस रोए जा रहा था। और मुझपे देखकर वो मुस्कुराती जा रही थी। मुझे आते जाते कई लोगों ने टोका कि रौशन तुम यहां क्या कर रहे हो??? पर मैने किसी का जवाब नहीं दिया था। 4,5 घंटे बाद मै अपनी साइकिल लिया और घर आ गया क्योंकि अब शाम होने को था। दूसरे दिन सोमवार था तो मै स्कूल गया और वहां पर दोस्तों से पता लगाया कि आखिर शोभा के मरने की वजह क्या थी।

शोभा के मरने की वजह।

शोभा जिस अंतिम दिन स्कूल गई थी उस दिन हुआ यह था कि उसके गांव के 3 लड़कियां भी थी जो उसके क्लास में हीं थी। उन्ही लड़कियों में से किसी एक लड़की के कोई जीजा और दीदी आए थे। और उसब लड़कियां शोभा को भी लेकर बाजार में गई। शोभा ने मना भी किया था लेकिन उन सभी के जबरदस्ती करने पर उनके साथ चली गई थी। बाजार में वो जीजा जो किसी एक लड़की का था उनलोगों को नाश्ता कराया। और फिर अपनी वाइफ के साथ इन लड़कियों को भी एक फोटो स्टूडियो में ले गया। जहां पर वो लोग 3,4 फोटो खिंचवाए। उस फोटो खिंचाने के क्रम में शोभा कहीं भी खड़ी नहीं हुई थी। वो बस चुपचाप बाहर बैठी उनलोगों का इंतजार कर रही थी। उन सब ने फोटो में इसको भी आने को बोला था लेकिन वो साफ मना कर दी थी।

जब शाम को सब घर गए तो उसी के गांव की एक लड़की ने उसकी मां को बता दिया कि शोभा को आज खूब मिठाई खाई है और फोटो खिंचाने स्टूडियो में भी गई थी। उसके जीजा के साथ.......बस यही बात उसके जीवन की लीला खत्म कर देनेवाली बात थी। जब शोभा अपने द्वार पर पहुंची तो उसकी मां लकड़ियां छिल रही थी जलावन के लिए। उन्ही लकड़ियों में से एक लकड़ी उठाकर शोभा को डांटते हुए 4, 5 पैना धरा दी। ये बोलते हुए कि तुमको हम पढ़ने के लिए भेज रहे हैं तो तुम दूसरा के साथ में फोटो खिंचवा रही हो??? शोभा का तबियत पहले से हीं खराब था ऊपर से वो बिना गलती के मार खा रही थी।। वो अपनी मां को रोकने और बताने की कोशिश कर रही थी ... की मां मै किसी के साथ फोटो नहीं खिंचवाई हूं।।। लेकिन मां का डंडा तबतक 4, 5 बार चोट कर चुका था। ये उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और घर में जाकर एक खेत में डालने वाला जहर था.. उसे खा ली और अधिक मात्रा में खा ली और खाने के बाद अपने बेडरूम में जाकर रोते हुए सो गई। वो किसी को बता नहीं रही थी। बाकी सब अपने अपने काम में व्यस्त थे। किसी ने शायद ये नहीं सोचा था कि शोभा इतनी सुशील लड़की इतना बड़ा कदम उठा सकती है। इधर उसका शरीर अब जवाब देने लगा था। और उसके शरीर में थोड़ा छटपटाहट शुरू होने लगा।। जिसका आभास उसकी भाभी को हुआ वो दौड़कर उसके पास पहुंची और उसकी हालात देखकर जोर से चिल्लाई। उसका पूरा शरीर गर्मी से भीग चुका था। और वो बेजान सी लूरु पुरू हो गई थी। उसका शरीर उसको बैलेंस करना छोड़ दिया था। उसकी मां दौड़ी आई। और उसकी हालत देखकर दोनों रोने लगे।। बार बार पूछने पर शोभा ने बताया कि वो जहर खा चुकी है।।। जितना जल्दी हो सका वहां के लोग उसे हॉस्पिटल लेकर जाने लगे... और हॉस्पिटल जाने के क्रम में उसने अपनी जीवन की अंतिम सांस ली ।।
😭😭😭😭😭😭😭😭😭

उसने अपनी मां को मरते वक्त भी बताया था कि मां मै फोटो नहीं खिंचवाई थी। उसने आरोप लगाया है मुझपर। और अपनी मां की गोद में हीं वो सुन्दर नादान और भोली लड़की ने अपने प्राण त्याग दिए।

अब बात जहर खाने की थी तो तो लोगो ने जल्दी जल्दी उसका क्रिया क्रम करना सोचा ताकि कोई पुलिस केस ना हो। फिर उसी रात स्कूल के रस्ते में हीं उस नाजुक लड़की के शरीर को एक जगह जला दिया गया था।

मै जब भी अपनी साइकिल से उस रस्ते से स्कूल जाता था। मेरा साइकिल का चैन पता नहीं क्यों उतर जाता था। मै बहुत डरता था। और पैदल साइकिल को आगे ले जाकर तब ही चैन चढ़ता था। ये वाक्या मेरे साथ 2 साल तक होते रहा, कई बार तो मै उस रस्ते से बच के निकलता था। मेरा बचपना था कि मै उससे डरता था।।
आज भी उसकी बात सोचने मात्र से उसकी वही मुस्कान आंखों के आगे झलकने लगती है।

इंसान जबतक जिंदा है तभी उसका कदर करना चाहिए। क्या पता कौन सा दिन उसका आखिरी दिन हो।

उसके मरने की सारी घटना मै उसकी मां से हीं पता लगाया था । जिसको बताते समय उनकी आंसू थम नहीं रहे थे। उसके पिताजी पिछले साल स्वर्ग सिधार गए। अब मां है जो जो अपनी बेटी के मौत का खुद को जिम्मेवार मानकर अपनी जीवन का बोझ ढो रही है। मै जब भी उसके गांव जाता हु उसकी मां का खबर जरूर लेता हूं।

धन्यवाद 🙏🏼 यदि आपको यह सच्ची कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे लाईक शेयर करें । और यदि आपके पास भी कोई अच्छी कहानी हो तो हमें शेयर जरूर करें।

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20/06/2025

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प्यार , दर्द , तड़प और मौत       ( Part -1)( एक नादान प्यार का गहरा छाप )मेरा नाम रौशन है... मै रोहतास जिले के एक छोटे स...
11/06/2025

प्यार , दर्द , तड़प और मौत ( Part -1)
( एक नादान प्यार का गहरा छाप )

मेरा नाम रौशन है... मै रोहतास जिले के एक छोटे से गांव का निवासी हूं। यह कहानी मेरे हीं क्लास की एक लड़की की है जिसका नाम शोभा था। शोभा के पिता एक ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा भगवान के पूजा पाठ में व्यस्त रहते थे। वो शोभा को भगवान के बहुत सारे गीत ( भजन ) सुनाते थे। जिसके कारण शोभा रामायण, महाभारत , कृष्ण लीला आदि पुराणों का खूब गीत गाती थी। उसके इतने मधुर स्वर और इतनी अच्छी अच्छी गीतों के कलेक्शन के कारण उससे स्कूल के सभी शिक्षक प्रभावित थे। सभी उसका गीत सुनना चाहते थे। इसलिए शनिवार के दिन लड़का और लड़की पक्ष में अंताक्षरी हुआ करता था।।।।... लड़कों में मै बहुत देर तक लड़कों का इज्जत... कोई भी टूटा फूटा गीत गाकर बचाए रखता था। पर उसकी मधुर स्वर और दैविक गीत तो... उसे पहले हीं हमलोगों से जीता देती थी। ऐसे हीं चलता रहा... एक दिन शोभा और मै स्कूल के चारदीवारी में लगे कुछ पौधों को पानी डाल रहे थे। वो उस वक्त भी एक बहुत सुंदर भजन गुनगुना रही थी। मैने कहा -
मै - तुम कितना सुंदर गाती हो.... दिल करता है कि तुम गुनगुनाती रहो, गाती रहो और मै सुनता रहूं।

शोभा - अच्छा जनाब 🤌🏻 ऐसा नहीं हैं ओके....मेरे से अच्छा आप गाते हो। वैसे कल क्लास क्यों नहीं आए थे???

मै - मै कल बुआ के गांव गया था।

शोभा - क्लास रोज आया कीजिए अच्छा लगता है।

मै - हां मुझे भी... ओके... अब नहीं छोडूंगा क्लास कभी।

फिर हर दिन हमदोनों एकदूसरे का इंतजार करते और एकदूसरे को देखते हीं मुस्कुरा जाते। पता नहीं ये क्या था। लेकिन हम दोनों को एकदूसरे के बिना स्कूल में कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। अचानक शोभा लगातार क्लास बंक मारने लगी। मै मुश्किल से हर दिन मन में यह आश लेकर स्कूल जाता की आज आएगी लेकिन वहां उसे ना आना मेरे लिए बड़ा हीं दुख की बात होती थी। फिर 6 घंटा समय काटना बड़ा हीं मुश्किल होता था। एक शाम स्कूल छुट्टी के बाद एक दोस्त के साथ मै बाजार गया जो कि मेरे गांव से 4 किलोमीटर की दूरी पर था। हमलोग साइकिल लेकर बाजार गए और जैसे हीं बाजार में पहुंचे जोरो की बारिश होने लगी। अब हमलोगों के गांव का रास्ता जो कच्चा रास्ता था उसपर पैदल चलना भी मुश्किल था अब उसपर हमलोग साइकिल कैसे चला सकते थे....?
तो पैदल हीं हमलोग साइकिल को डगराते हुए गांव की ओर चल दिए। साइकिल के चक्के में गीली मिट्टी फंस जाती थी जिसके चलते चक्का घसीटाने लगता था। हमलोग चक्के में फंसी मिट्टी को लकड़ी से निकालते और फिर ज्यों का त्यों हो जाता। हमलोग जैसे तैसे जा रहे थे। तबतक आंखों के सामने एक ऐसा दृश्य आया जिसे देखकर पूरा शरीर हीं सुना पड़ गया, धड़कन रुक सी गई । सामने दृश्य यह था कि शोभा की मां और शोभा की भाभी शोभा को दोनों तरफ से सहारा देते हुए ला रही थी। वो दोनों शोभा को सही से ले जाने में सक्षम नहीं थी, शोभा का पैर घसीटा रहा था वो सही से खड़ा भी नहीं हो पा रही थी और बुरी तरह से दर्द में रो रही थी। जब उसने मुझे देखा तो उसने अपने दर्द को काफी कंट्रोल करने की कोशिश की फिर फफक फफक के रोने लगी। इतने में शोभा की मां हमलोग से बोली कि बेटा साइकिल पर बिठाकर इसको बाजार तक छोड़ दीजिए । लेकिन यह भी कर पाना संभव नहीं था , मेरा तो मन था कि मै शोभा को अपने पीठ पर उठाकर पहुंचा दूं बाजार तक लेकिन यह सोच मेरे मन में हीं दबकर रह गया। उधर मेरा दोस्त जो हमदोनों के बारे में नहीं जानता था, उसने बोल दिया कि मिट्टी बहुत गीली है ऐसा कर पाना संभव नहीं है अगर हो पाता तो हमलोग कर देते। ऐसी बात सुनकर वो मेरे तरफ असहाय नजरों से देख रही थी। और हमलोग बिना मदद किए निकल गए । मेरे मन में बार बार ख्याल आ रहा था कि उसकी मदद करने जाऊं, लेकिन उस लड़के के चलते जा ना सका और ऊपर से शाम ढलने को थी घर समय से नहीं पहुंचता तो पापा अलग ही सजा देने को बोल रखे थे । मै मजबूर बार बार पीछे मुड़कर उसे देखता आगे अपने घर की ओर बढ़ रहा था। और यही सोच रहा था कि क्या सोच रही होगी वो मेरे बारे में ...की इतनी कष्ट में वो मेरी मदद नहीं किया .. यही चिंता मुझे खाए जा रही थी। उसके 10 दिन बाद तक वो कभी स्कूल नहीं आई। मै किसी से पूछता भी तो कोई उसके बारे में सही जानकारी नहीं दे पा रहा था। 13वां दिन वो मुझे इस जीवन में अंतिम बार दिखाई दी। उसके अगले दिन हीं वो बेचारी अपनी जान से और इस जहान से हमेशा हमेशा के लिए जा चुकी थी।

आखिर कैसे शोभा इस दुनिया को छोड़ गई अगली पार्ट -2 में पढ़ने को मिलेगा। अगर यह सच्ची कहानी आपको थोड़ा भी heart touching लगा हो तो पेज को लाईक और फॉलो कीजिए। 🙏🏻🙏🏻

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11/06/2025

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