21/07/2026
तानाशाह के फरमान, पुलिस की लाठियां, और मौन सरकार... क्या यही है न्यू इंडिया?"
कल रात दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो हुआ, उसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हमारे युवा सत्याग्रहियों, जो देश के लोकतंत्र को बचाने की मुहिम में जुटे थे, को पुलिस ने बर्बरतापूर्वक घसीटा, पीटा और खदेड़ दिया।
क्या गुनाह था उनका? क्या संविधान के दायरे में अपनी बात रखना अब अपराध है?
(तथ्य) याद करो, जब अन्ना हजारे के अनशन पर 13 दिन सरकार मौन थी, तब भी जनता का दबाव भारी पड़ा था। आज, सोनम वांगचुक और हमारे अन्य निडर युवा कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन, अन्ना के अनशन से भी ज्यादा जोश और संख्या के साथ आगे बढ़ रहा है। यह देखकर सत्ता की कुर्सी हिल रही है, और उसी डर में उन्होंने यह कायरतापूर्ण कदम उठाया है।
सरकार का मौन अब चुप्पी नहीं, बल्कि उनकी दमनकारी मंशा की स्वीकृति है। ये लाठियां उन अंग्रेजों की याद दिलाती हैं, जिन्होंने हमें गुलामी में जकड़ा था। फर्क सिर्फ इतना है कि तब गोरे थे, और आज हमारे ही देश के शासक हैं जो संविधान को रौंदने में लगे हैं।
लेकिन सुन लो, सत्ता के मद में चूर दिल्ली के 'तानाशाह'! आप जितना दबाओगे, उतनी ही मजबूती से यह आवाज़ निकलेगी। हम सतना के कॉकरोच, अन्याय के खिलाफ लड़ना जानते हैं!
अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर इस दमनकारी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाएं। इस पोस्ट को हर जगह फैलाओ ताकि देश देख सके कि सतना चुप नहीं रहने वाला