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सिविल कोर्ट सराईकेला में राष्ट्रीय लोक अदालत और महिला दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन:-      झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिक...
08/03/2025

सिविल कोर्ट सराईकेला में राष्ट्रीय लोक अदालत और महिला दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन:-

झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, राँची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावाँ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम का आयोजन आज दिनाँक 8 मार्च 2025 को सिविल कोर्ट सराईकेला में किया गया। आज नेशनल लोक अदालत के साथ अंतरास्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम भी मनाया गया। इस अवसर पर माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्रधिकार के अध्यक्ष श्री रामाशंकर सिंह के निर्देश पर एक विशेष महिला बेंच का गठन किया गया जिससे CJM सुश्री कवितांजली टोप्पो, अधिवक्ता श्रीमती रिंकू सिन्हा और सुश्री सुखमती हेसा आदि शामिल रहे।जिन्हें महिला दिवस के अवसर पर माननीय जिला एबम सत्र न्यायाधीश द्वारा महिला दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया। मौके पर अर्का जैन यूनिवर्सिटी गम्हरिया के कई लॉ छात्र , छात्रायें ,और प्रोफेसर फैकल्टी भी उपस्थित थे जो आज के राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्यवाही से अवगत हुए। आज कंपाउंडेबल प्रकृति के सभी मामले जैसे बैंक, बिजली, पारिवारिक विवाद, भरण पोषण, चेक बाउंस, वन विभाग ,उत्पाद विभाग, मोटर वाहन दुर्घटना के मामले में और दीवानी मुकदमे का नेशनल लोक अदालत में निष्पादन किया गया। आज के नेशनल लोक अदालत में फैमिली जज श्री बीरेश कुमार, एडीजे प्रथम चौधरी एहसान मोइज़, सीजेएम सुश्री कवितांजली टोप्पो, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज,एसडीजेएम श्री आशीष अग्रवाल आदि उपस्थित थे। आज के इस नेशनल लोक अदालत में सराईकेला और चांडिल के न्यायालयों में कुल सात बेंचो का गठन किया गया था। जिसमे कुल 6300 वादों का निष्पादन किया गया जिसमे 583 न्यायालय में लंबित मामले और 5717 प्रे लिटिगेशन वाद का निष्पादन हुआ और कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये की प्राप्ति की गई।
सचिव जिला विधिक सेवा प्रधिकार तौसिफ मेराज ने बताया कि आज झारखंड के सभी जिला न्यायालय में माननीय झालसा द्वारा NLA का उद्घाटन वर्चुअल मोड पर किया गया है और नेशनल लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित वाद से मुक्ति मिलती है और उनके समय और पैसे की बचत होती है।

जेल में बंद कैदियों तथा आम लोगों को विधिक सेवा प्रदान करने के सम्बंध में जिला विधिक सेवा प्रधिकार सराईकेला द्वारा नुक्कड़...
04/11/2024

जेल में बंद कैदियों तथा आम लोगों को विधिक सेवा प्रदान करने के सम्बंध में जिला विधिक सेवा प्रधिकार सराईकेला द्वारा नुक्कड़ नाटक का आयोजन:-
माननीय झालसा ,रांची के निर्देशानुसार और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रमाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में आज दिनांक 4 नवंबर 2024 को सरायकेला जिले के मुदकुम पंचायत के जोरडीह गांव में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तौसीफ मेराज़ के निर्देश पर पारा लीगल वॉलिंटियर्स द्वारा जिला विधिक सेवा प्रधिकार द्वारा दिये जाने वाले निःशुल्क विधिक सेवा के बारे में जागरूकता हेतु एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। जेल में बंद कैदी को निशुल्क कानूनी सहायता द्वारा जेल से बाहर लाने का जीवंत अभिनव उपस्थित पीएलवी द्वारा किया गया । जिसका उपस्थित लोगों ने बहुत सराहना की। वहां उपस्थित लोगों को पीएलवी द्वारा बताया गया कि जिले के सभी ब्लॉक में लीगल एट क्लीनिक है तथा लगभग सभी थानों में पीएलवी है जो लोगों को की कानूनी रूप से सहायता करते हैं । लोगों को कानून सहायता प्रदान करने की मुहिम के तहत जिला विधिक सेवा प्रधिकार गांव गांव तक कानूनी मदद और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रही है। इस कार्यक्रम द्वारा लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार से मिलने वाले कानूनी मदद तथा जिले में चल रहे हैं सरकारी योजनाओं के बारे में बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई । इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला विधिक सेवा प्रधिकार के पीएलवी राजकुमार कैबर्ट, प्रदीप दास, सुषमा ओराँव और राखी मुखी ,अमर सुरीन ,रिंकी महतो, तारामणि बंदिया, लक्ष्मी गुंडवा, जोशना महतो, भक्तु मार्डी, कुमुद रंजन महतो, संजीव महतो , तारा पदो सरकार और बिट्टू प्रजापति आदि शामिल रहे।

नहीं रहे दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा:- टाटा समूह के चेयरमैन और वरिष्ठ उद्योगपति रतन टाटा बुधवार रात इस दुनिया को छोड़ कर ...
10/10/2024

नहीं रहे दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा:-
टाटा समूह के चेयरमैन और वरिष्ठ उद्योगपति रतन टाटा बुधवार रात इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। 86 साल की उम्र में देश और दुनिया को अलविदा कहने वाले रतन टाटा को खराब स्वास्थ्य के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्‍होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली। दो दिन पहले ही उन्होंने अपने स्वास्थ्य पर किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और खुद को स्वस्थ बताया था। उनके निधन से कारोबारी से लेकर मनोरंजन, राजनीति, खेल जगत तक शोक पसर गया है। रतन टाटा के निधन पर राजनीतिक जगत से कई लोगों ने दुख जताया।गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि के लिए NCPA में रखा जाएगा।

21/09/2024

एक देश एक चुनाव एक विश्लेषण:-
1. एक देश एक चुनाव को मोदी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। आपको बता दूं कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए एक कमेटी बनाई गई थी, जिसके चेयरमैन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे। कोविंद ने अपनी रिपोर्ट कल मोदी कैबिनेट को दी जिसके बाद उसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया।
2. इस पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि "हाई लेवल कमेटी की सिफारिशों को मंजूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि 1951 से 1967 तक देश में एक साथ ही चुनाव होते थे। हम अगले महीनों में इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे"।
3. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि 'एक देश एक चुनाव' पर समिति ने 191 दिन तक काम किया और 21,558 लोगों से राय ली। 80% लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें 47 में से 32 राजनीतिक दल भी शामिल हैं। समिति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों, चुनाव आयुक्तों और राज्य चुनाव आयुक्तों से भी बात की। वैष्णव ने बताया कि 'एक देश एक चुनाव' दो चरणों में लागू होगा। पहले फेज में विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ होंगे। इसके बाद 100 दिन के भीतर दूसरे फेज में निकाय चुनाव साथ कराए जाएं।
4. आपको बता दे कि पिछले साल 2 सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अगुआई में 8 मेंबर की कमेटी बनी थी। 23 सितंबर 2023 को दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी की पहली बैठक हुई थी। इसमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कमेटी के स्पेशल मेंबर बनाए गए हैं। यह रिपोर्ट स्टेकहोल्डर्स-एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 191 दिन की रिसर्च का नतीजा है। कमेटी ने सभी विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 तक करने का सुझाव दिया है। वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट 18 हजार 626 पन्नों की है। कोविंद कमेटी ने 7 देशों की चुनावी प्रक्रिया पर रिसर्च करके रिपोर्ट तैयार की।
5. कोविंद पैनल ने वन नेशन वन इलेक्शन के लिए 5 सुझाव दिए हैं:-
i.सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया जाए।
ii.हंग असेंबली (किसी को बहुमत नहीं), नो कॉन्फिडेंस मोशन होने पर बाकी 5 साल के कार्यकाल के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं।
iii.पहले फेज में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एकसाथ कराए जा सकते हैं, उसके बाद दूसरे फेज में 100 दिनों के भीतर लोकल बॉडी के इलेक्शन कराए जा सकते हैं।
iv.चुनाव आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से सिंगल वोटर लिस्ट और वोटर आई कार्ड तैयार करेगा।
v.कोविंद पैनल ने एकसाथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, जनशक्ति और सुरक्षा बलों की एडवांस प्लानिंग की सिफारिश की है।
6. कोविंद कमेटी ने 18 संवैधानिक बदलावों का सुझाव दिया है, इनमें से ज्यादातर में राज्यों की विधानसभाओं के सहमति की जरूरत नहीं है।
कुछ संवैधानिक बदलावों के लिए बिलों को संसद में पास कराना जरूरी होगा।
सिंगल इलेक्टोरल रोल और सिंगल वोटर आईडी कार्ड के लिए आधे से ज्यादा राज्यों की मंजूरी जरूरी होगी।
संभव है कि कोविंद कमेटी की रिपोर्ट पर लॉ कमीशन भी अपनी रिपोर्ट पेश करे।
सूत्रों का कहना है कि लॉ कमीशन 2029 में लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों और पंचायत चुनाव एकसाथ कराने का सुझाव दे।
इसके अलावा लॉ कमीशन गठबंधन सरकार और हंग असेंबली जैसी स्थिति आने पर नियम की मांग करे।
7. वन नेशन वन इलेक्शन के लिए कैबिनेट की ओर से हां के संकेत एक दिन पहले ही मिल गए थे, जब गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' मोदी सरकार 3.0 के कार्यकाल के दौरान अगले पांच वर्षों के भीतर लागू किया जाएगा। शाह ने कहा था कि सरकार इस कार्यकाल के भीतर एक राष्ट्र एक चुनाव लागू करने की योजना बना रही है। पिछले महीने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का जिक्र किया था। उन्होंने जोर देकर कहा था कि लगातार चुनाव देश के विकास को धीमा कर रहे थे।
8. माना जा रहा है कि अब केंद्र सरकार इसे शीतकालीन सत्र में संसद में लाएगी। हालांकि आगे अभी सरकार के लिए इसे पूरी तरह से लागू करना चुनौती होगा क्योंकि ये संविधान संशोधन वाला बिल है और इसके लिए राज्यों की सहमति भी जरूरी है।
9. एक राष्ट्र एक चुनाव लागू होने में अभी बाधाएं भी कई हैं। कैबिनेट से पास होने के बाद सरकार इस पर बिल लाएगी। संविधान में संशोधन और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ-साथ संभवतः प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा उस संशोधन का अनुमोदन किए बिना इसे लागू नहीं किया जा सकेगा। सदनों के विघटन, राष्ट्रपति शासन या यहां तक कि एक लटके विधानसभा या संसद के कारण होने वाले ब्रेक से कैसे निपटा जाए, इस पर अभी भी कोई वास्तविक स्पष्टता नहीं है। बिल शीतकालीन सत्र यानी नवंबर-दिसंबर में संसद में पेश किया जाएगा।
10. यह भी सवाल है कि क्या लोकसभा और विधानसभाओं का कार्यकाल तय होना चाहिए? यदि कार्यकाल के बीच में उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी तो क्या होगा? यदि सत्तारूढ़ दल या गठबंधन लोकसभा या विधानसभाओं में कार्यकाल के बीच बहुमत खो देता है तो क्या होगा? चूंकि परिस्थितियां बदलती रहती हैं और एक धारणा को पकड़कर बैठे रहने से जड़ता आती है, इसलिए नई संभावनाओं की तलाश के रास्ते सदैव खुले रहने ही चाहिए।
11. वन नेशन-वन इलेक्शन की संभावना एक देश-एक चुनाव लागू करने के लिए कई राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल घटेगा। जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के आखिर में हुए हैं, उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू होगा। साथ ही इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे।
12. चलिए अब देखते हैं कि भाजपा और सहयोगी दलों ने क्या कहा...
13. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 'भारत ऐतिहासिक चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। यह स्वच्छ और वित्तीय रूप से कुशल चुनावों के माध्यम से हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने और संसाधनों के अधिक उत्पादक आवंटन के माध्यम से आर्थिक विकास में तेजी लाने की मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।'
14. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि '1957 से 1961 तक इलेक्शन एकसाथ कराए जाते थे। 1999 में लॉ कमीशन ने लोकसभा और विधानसभा इलेक्शन अलग-अलग करने की सिफारिश की थी। हमारी कंस्टल्टेशन प्रॉसेस के दौरान देशभर से 80 फीसदी लोगों ने वन नेशन वन इलेक्शन को पॉजिटिव रेस्पॉन्स दिया है। खासकर युवाओं ने सपोर्ट किया है।'
15. JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि 'ये बदल रहे भारत की तस्वीर और बेहतर बनेगी। चुनाव के खर्च का जो भीमकाय आकार है उसको काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग कतार में लगेंगे। समय पर सुरक्षाबलों की तैनाती होगी और बेहतर तरीके से होगी।'
16. वन नेशन वन इलेक्शन पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा आईए देखते हैं -
17. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहां की यह प्रैक्टिकल नहीं है, यह चलने वाला नहीं है, चुनाव के लिए कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है तो ऐसी चीज पब्लिक को डाइवर्ट करने के लिए लाई गई है। पूरे देश के कोई लोग मानने वाले भी नहीं है।
18. चुनावी रणनीति के चाणक्य और जन सूराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर ने प्रेस वार्ता में कहा कि पैसे बचाने के लिए और देश के विकास के लिए वन नेशन वन इलेक्शन तो जरूरी है बस सरकार की मनसा साफ हो आईए देखते हैं उन्होंने क्या कहा।
19. AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आप अपनी सुविधा के आधार पर काम नहीं कर सकते संविधान संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर काम करेगा। यह हमेशा से भाजपा और RSS की विचारधारा रही है कि वे नहीं चाहते कि क्षेत्रीय दल अस्तित्व में रहें। हमने इसका विरोध किया है और भी करेंगे।
20. बहुजन समाज पार्टी के प्रमुख मायावती ने कहां कि ’एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था के तहत देश में लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय का चुनाव एकसाथ कराने वाले प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट से आज दी गई मंजूरी का हम समर्थन करते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य देश और जनहित में होना जरूरी है।'
21. आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन लागू नहीं होना चाहिए क्योंकि चुनाव के समय ही नेता जनता के सामने आते हैं और उनकी उनकी बात मानते हैं, बाकी समय वह गायब रहते हैं। अगर 5 साल में एक बार इलेक्शन होंगे तो 5 साल में एक बार नेता जनता को दर्शन देंगे और उनके काम करेंगे। नेता को काबू में रखने के लिए और जनता के काम करवाने के लिए वन नेशन वन इलेक्शन नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जितने पैसे चुनाव में खर्च होते हैं उससे ज्यादा पैसे तो ये लोग चोरी करके बैठे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वन नेशनल वन इलेक्शन की बजाय वन नेशन वन एजुकेशन होनी चाहिए।
22. राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि 'इस देश में वन नेशन वन इलेक्शन था, मोदी जी कोई नायाब हीरा नहीं ला रहे हैं। 1962 के बाद वह क्यों हटा क्योंकि एकल पार्टी का प्रभुत्व खत्म होने लगा। मैं पहले इसका मसौदा देखूंगा। मान लीजिए- चुनाव होते हैं, उत्तर प्रदेश में बनी हुई सरकार गिर जाती है तो फिर क्या होगा? क्या आप राष्ट्रपति शासन लगाएंगे?
23. पक्ष विपक्ष को तो देखा लिया अब इसे आर्थिक नजरिए से देखा जाए तो लोकसभा से लेकर स्थानीय निकायों तक सभी चुनावों पर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का खर्च आता है, जिसे मतदान की अवधि घटाकर 3 से 5 लाख करोड़़ रुपये तक कम किया जा सकता है। प्रख्यात शोधकर्ता एवं विश्लेषक डॉ. एन. भास्कर राव के अनुसार, जहां 2024 में लोकसभा चुनाव पर 1.20 लाख करोड़़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, वहीं सभी विधानसभा चुनाव एक साथ होने पर 3 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
24. आपको बता दें कि आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
25. अब हम लोग एक देश-एक चुनाव की चुनौतियां पर विश्लेषण करते हैं:-
1. लोकसभा का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है, लेकिन इसे उससे पहले भी भंग किया जा सकता है। ऐसे में एक देश-एक चुनाव संभव नहीं होगा।
2. लोकसभा की तरह ठीक विधानसभा का भी कार्यकाल पांच साल का होता है और ये भी पांच साल से पहले भंग हो सकता है। अब ऐसे में सरकार के सामने चुनौती होगी कि एक देश-एक चुनाव का क्रम कैसे बरकरार रखा जाए।
3. एक देश-एक चुनाव पर देश के सभी दलों को एक साथ लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इस पर सभी पार्टियों के अलग-अलग मत हैं।
4. ऐसा माना जाता है कि एक देश-एक चुनाव से राष्ट्रीय पार्टी को फायदा पहुंचेगा, लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों को इसका खामियाजा भुगतना होगा। यानी कि उन्हें नुकसान पहुंचेगा।
5. फिलहाल देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं, जिस वजह से ईवीएम और वीवीपैट की सीमित संख्या हैं, लेकिन अगर एक देश-एक चुनाव होते हैं तो एक साथ इन मशीनों की अधिक मांग होगी, जिसे पूर्ति करना बड़ी चुनौती होगी।
6. अगर एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो अतिरिक्त अधिकारियों और सुरक्षाबलों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में ये भी एक बड़ी चुनौती होंगी।

केजरीवाल ने इस्तीफा दिया आतिशी ने दावा पेश किया:-            दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को उपराज्य...
18/09/2024

केजरीवाल ने इस्तीफा दिया आतिशी ने दावा पेश किया:-

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को उपराज्यपाल वी के सक्सेना को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके साथ दिल्ली की अगली मुख्यमंत्री आतिशी भी मौजूद थी। केजरीवाल के इस्तीफे के साथ ही अब दिल्ली में आतिशी पारी शुरू होने वाली है। आज ही आम आदमी पार्टी के विधायक दल ने आतिशी को अपना नेता चुना और आतिशी ने केजरीवाल के प्रति पूरी निष्ठा दिखाई। इसके बाद आम आदमी पार्टी द्वारा उनकी उत्तराधिकारी घोषित की गईं आतिशी ने नई सरकार बनाने का अपना दावा पेश किया। केजरीवाल मंगलवार शाम को अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ उपराज्यपाल सचिवालय पहुंचे। उन्होंने रविवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।
राजनीति में आतिशी जितनी जल्द इतने बड़े मुकाम पर पहुंची हैं उतनी जल्द नॉन पॉलिटिकल बैकग्राउंड से बहुत ही कम लोग पहुंचे हैं। आतिशी 2020 में दिल्ली की कालका सीट से विधायक बनती हैं, 2023 में दिल्ली केबिनेट मंत्री बनती हैं और 2024 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बन जाती हैं। यह किसी गैर राजनीति से परिवार आने वाले व्यक्ति के लिए बहुत छोटे राजनैतिक करियर में बहुत बड़ा मुकाम है।

झारखंड में भारी बारिश का कहर:-         बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण झारखंड के कई हिस्सों में बीते दो दिनों ...
16/09/2024

झारखंड में भारी बारिश का कहर:-
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण झारखंड के कई हिस्सों में बीते दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। स्वर्णरेखा, खरकई के अलावा झारखंड के नदियों का जलस्तर बढ़ गया है

16/09/2024

जलता सुलगता मणिपुर कारण और निवारण पर ताजा रिपोर्ट:-
मणिपुर मतलब आगज़नी, दंगा, सामूहिक बलात्कार, हिंसा, हत्या, गोली, बम, बारूद इत्यादि ऐसे ही अनेक शब्द आज मणिपुर के पर्याय बन गए हैं। आज मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। पूर्वोत्तर में स्थित इस राज्य में लूट, हत्याओं और अशांति की खबरें आम हो गई हैं।
कारण सिर्फ एक वो भी केवल जातीय द्वेष।
मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा की शुरुआत हो चुकी थी। मणिपुर में तीन मई को मैतेई जो कि घाटी बहुल समुदाय है और कुकी जनजाति जो कि पहाड़ी बहुल समुदाय है उनके बीच हिंसा शुरू हुई थी। दरअसल, मणिपुर में मैतेई समाज की मांग है कि उसको कुकी की तरह राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए।
यह मांग भारतीय संविधान के तहत अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए मैतै लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग से जुड़ा है, जो उन्हें आदिवासी समुदायों के बराबर विशेषाधिकार प्रदान करेगा। अप्रैल 2023 में, मणिपुर उच्च न्यायालय के एक फैसले ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। मणिपुर में तनाव तब और बढ़ गया जब कुकी समुदाय ने मैतेई समुदाय की आधिकारिक जनजातीय दर्जा दिए जाने की मांग का विरोध करना शुरू कर दिया। इसे लेकर कुकियों ने तर्क दिया कि इससे सरकार और समाज पर मैतेई लोगों का प्रभाव और अधिक मजबूत होगा, जिससे उन्हें जमीन खरीदने या मुख्य रूप से कुकी क्षेत्रों में बसने की अनुमति मिल जाएगी। कुकियों का यह भी कहना है कि मैतेई के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा छेड़ा गया नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध उनके समुदाय को उखाड़ने का एक बहाना है। ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन ऑफ मणिपुर ने 3 मई 2023 को सभी पहाड़ी जिलों में एकजुटता मार्च निकाला।
इस मूद्दे पर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली। इन झड़पों के दौरान दोनों समुदायों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ की और कई पुलिस थानों से हथियार भी लूट लिए। हिंसक झड़प के दौरान सैकड़ों चर्च और एक दर्जन से अधिक मंदिरों को भी तोड़ दिया गया और कई गाँवो में आग लगा दी गई। 3 मई 2024 तक, हिंसा में 221 लोग मारे जा चुके हैं, 1000 से अधिक घायल हो गए हैं, 4786 घर जला दिए गए हैं और लगभग 60000 लोगों के विस्थापित होने की सूचना है।
राज्य में हिंसा शुरू होने के बाद भी मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, जो स्वयं मैतै समुदाय से हैं, ने ट्विटर और टीवी चैनलों पर कुकियों पर निशाना साधा, जिससे समुदायों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया। 19 जून 2023 को, उन्होंने हथियार रखने वाले कुकी सदस्यों को "आतंकवादी" करार दिया और कहा कि उन्हें परिणाम भुगतने होंगे, जबकि सशस्त्र मैतियों से कुछ भी अवैध नहीं करने की अपील की। 29 जून 2023 को, उन्होंने कुकियों को "आतंकवादी" बताकर चुनिंदा रूप से निशाना बनाया। बाद के ट्वीट्स में उन्होंने कुकियों को म्यांमारी बताया और हिंसा में चीन का हाथ होने का भी आरोप लगाया। बाद में विरोध होने पर इन ट्वीट्स को हटा दिया गया।
19 जुलाई 2023 को, एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दो कुकी महिलाओं को नग्न अवस्था में घुमाते हुए दिखाया गया और स्पष्ट रूप से युवा मैतै पुरुषों द्वारा एक महिला को थप्पड़ मारा गया और उसका यौन उत्पीड़न किया गया। घटना के दो महीने से अधिक समय बाद यह वीडियो सामने आया क्योंकि मणिपुर में इंटरनेट बंद था।पीड़ितों में से एक ने कहा कि उन्हें "पुलिस ने भीड़ के पास छोड़ दिया‌"। 20 जुलाई 2023 को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसी तरह की सैकड़ों घटनाओं का हवाला देते हुए राज्य में इंटरनेट प्रतिबंध के अपने फैसले का बचाव किया।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, मई में यह हमला फर्जी रिपोर्टों के बाद हुआ था कि कुकी मिलिशिया मैन द्वारा एक मैतेई महिला के साथ दुष्कर्म किया गया था।
. हमले का वीडियो सामने आने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर हिंसा पर कोई भी बयान नहीं दिया था। लेकिन मानसून सत्र के पहले दिन उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इस घटना ने "भारत को शर्मसार कर दिया है" और "किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा... मणिपुर की बेटियों के साथ जो हुआ उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता"।
वहीं, कई भारतीय पूछ रहे हैं कि मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने में उन्हें इतना समय क्यों लगा।
बेंगलुरु के मेट्रोपॉलिटन आर्कबिशप पीटर मचाडो ने चिंता व्यक्त की कि ईसाई समुदाय को असुरक्षित महसूस कराया जा रहा है, उन्होंने कहा कि "सत्रह चर्चों को या तो तोड़ दिया गया या अपवित्र कर दिया गया।"
मणिपुर की मूल निवासी ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने ट्वीट कर अपने गृह राज्य के लिए मदद मांगी।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने एक बयान में कहा कि मणिपुर में हिंसा ने "विभिन्न जातीय और स्वदेशी समूहों के बीच अंतर्निहित तनाव को उजागर किया है"। उन्होंने अधिकारियों से "अपने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के अनुरूप हिंसा के मूल कारणों की जांच और समाधान करने सहित स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया देने" का आग्रह किया।
भारत सरकार ने हिंसा के दौर को रोकने के प्रयास में क्षेत्र में 40,000 सैनिकों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस को तैनात किया है।
पब्लिक इमरजेंसी, ड्रोन-ग्रेनेड अटैक और हर कंधे पर हथियार से ताजा हिंसा चरम पर है। मणिपुर में हिंसा के एक साल बाद भी शांति बहाली की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। पिछले साल तक ऐसी घटनाओं में देसी पाइप के जरिए पंपी गण बनाकर रॉकेट दागे जाते थे, जिनकी मारक क्षमता बेहद कम होती थी लेकिन इस बार के हमले में तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अब इन हमलों में ड्रोन के जरिए बमबारी की जा रही है तो आरपीजी का इस्तेमाल करके भी रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। कई घरों के छत पर रॉकेट गिरने के निशान ताजा हैं तो दीवारों पर स्प्रिंटर ने निशाना बना दिए हैं। मकान जल गए हैं तो लोग गांव छोड़कर भाग गए हैं।हमले का असर गांव में बने आईआरबी के कैंपों पर भी हुआ। हालांकि, घाटी और पहाड़ से लगने वाले इलाकों में पिछले 1 साल से बंकर बने हुए हैं, जहां दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे के सामने हथियार तानकर खड़े हैं। आज भी यह बंकर बने हुए हैं और कोई नहीं जानता कब कौन किसकी तरफ गोलियों को बरसाना शुरू कर देगा। इन गांव में जगह-जगह विलेज डिफेंस फोर्स के नाम पर हथियारबंद युवाओं ने मोर्चा संभाला है, तो कंधों पर मिलट्री ग्रेड स्नाइपर राइफल भी दिखाई दे जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाकर जगह-जगह हथियार जब्त कर रही हैं, जिसमें आरपीजी ग्रेनेड और अत्यधिक एसॉल्ट राइफल शामिल है। ड्रोन के खतरे को देखते हुए मणिपुर में केंद्रीय एजेंसीयों ने एंटी ड्रोन सिस्टम भी तैनात कर दिए हैं। स्थानीय संगठन और सुरक्षा एजेंसियों की शांति बहाली की कोशिशें जारी है, लेकिन स्थायी समाधान अभी नहीं निकल सका है।
मणिपुर में शांति बहाली की उम्मीदों को टूटता देख इंफाल घाटी में स्थानीय संगठन ने पब्लिक इमरजेंसी घोषित कर दी है। इस पब्लिक इमरजेंसी में केंद्रीय सुरक्षा बलों को चेतावनी दी गई है कि अगर वह कुकी संगठनों पर कार्यवाही नहीं करते हैं और शांति बहाली नहीं हो पाती तो उन्हें मणिपुर छोड़कर जाना होगा। पब्लिक इमरजेंसी का असर इंफाल के व्यस्ततम इलाकों में भी देखा जा रहा है, जहां दुकान मकान बंद हैं और सड़कों पर आवाजाही थम सी गई है।
आईए अब जानते हैं कि मणिपुर के इस बदहाली के पीछे मूलभूत कारण क्या है। इसके लिए सबसे पहले हमें मणिपुर की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक परिदृश्य और वहां के इतिहास का अध्ययन करना पड़ेगा।
. मणिपुर भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य है। भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों को हम 7 सिस्टर्स या 7 बहनें भी कहते है। मणिपुर की सीमा म्यांमार से लगती है। यहां अनुमानित 36 लाख लोग रहते हैं। जिसमें आधे से अधिक मैतेई समुदाय के लोग निवास करते हैं, जबकि लगभग 43 फीसदी कुकी और नगा समुदाय के लोग निवास करते हैं, जो यहां पर प्रमुख अल्पसंख्यक जनजातियां मानी जाती हैं।
मणिपुर में मैतेई और कुकी-नागा जनजाति समुदायों के बीच लंबे समय से संघर्ष चला आ रहा है, जिसका मूल कारण भूमि और पहचान से जुड़ा हुआ है।मैतेई समुदाय मुख्य रूप से घाटी में रहते हैं, जो राज्य का 10% हिस्सा है, जबकि कुकी और नागा जनजातियां पहाड़ी क्षेत्रों में फैली हुई हैं, जो राज्य का 90% हिस्सा है।कुकी और नागा जनजातियों को लगता है कि उनके भूमि अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, और मैतेई समुदाय अधिक राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहा है। मैतेई समुदाय को मणिपुर की राजनीति और प्रशासन में अधिक प्रभावशाली माना जाता है, जबकि कुकी और नागा जनजातियां पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हुए खुद को हाशिए पर महसूस करती हैं।
इनके बीच सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। मैतेई समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मुख्य रूप से हिंदू धर्म से जुड़ी है, जबकि कुकी और नागा जनजातियां ईसाई धर्म का पालन करती हैं। यह धार्मिक और सांस्कृतिक अंतर भी संघर्ष का एक कारण है, क्योंकि दोनों समुदाय अपनी-अपनी पहचान को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुकी और नागा जनजातियां मणिपुर की राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व और अधिकार चाहती हैं। वे स्वायत्त परिषदों की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें अपने क्षेत्रों में अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हो सकें। इसके अलावा, मैतेई समुदाय भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग रहा है, जिससे जनजातीय समुदायों के साथ उनका तनाव और बढ़ रहा है।
. मणिपुर में आर्थिक असमानता भी एक प्रमुख कारण है जो हिंसा और असंतोष को बढ़ावा देता है। घाटी क्षेत्रों में रहने वाले मैतेई समुदाय को बेहतर आर्थिक और विकास के अवसर प्राप्त होते हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी और नागा जनजातियां आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई हैं।
घाटी क्षेत्र जहां राज्य की प्रशासनिक और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र है, वहीं पहाड़ी क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। यह विकास का अंतर जातीय संघर्ष को और गहरा करता है।
मणिपुर में बेरोजगारी और गरीबी भी गंभीर समस्या है। रोजगार के अवसरों की कमी और आर्थिक असमानता से उत्पन्न निराशा युवाओं को हिंसा और उग्रवादी संगठनों की ओर धकेलती है।
मैतेई समुदाय 2012 से अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। उनका यह भी दावा है कि बाहरी लोगों के प्रभाव और जनसंख्या में कमी के कारण उनका अस्तित्व संकट में है। अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने से मैतेई समुदाय को कई लाभ प्राप्त होंगे, जैसे कि सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण, भूमि अधिकारों में विशेष संरक्षण, और अन्य संवैधानिक विशेषाधिकार। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी और नागा जनजातीय समुदायों ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि यदि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल जाता है, तो इससे पहाड़ी क्षेत्रों में उनके अधिकारों और भूमि पर कब्जे को खतरा हो सकता है।
. मेरे इस रिपोर्ट में आपने देखा कि मणिपुर में वर्षों से मैतेयी, कुकी, नागा जनजातियों के बीच संघर्ष चल रहा है इसका मूल कारण इन समुदायों की अपनी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक पहचान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अंतर, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व में अंतर, आर्थिक स्थिति में असमानता, बेरोजगारी, गरीबी रहा है। साथ ही पड़ोसी देश चीन एवं म्यांमार भी इस अशांति का एक कारण है। भारत सरकार एवं मणिपुर सरकार को इन सारी विसंगतियां को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि मणिपुर में शांति बहाली हो सके और यहां की जनता चैन से अपना जीवन यापन कर सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमशेदपुर दौर में दिए गए भाषण की प्रतिक्रिया:-           कांग्रेस के विधायक एवं झारखंड सरकार...
16/09/2024

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जमशेदपुर दौर में दिए गए भाषण की प्रतिक्रिया:-
कांग्रेस के विधायक एवं झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यक्रम में हवाबाज़ी बहुत हुई लेकिन झारखंड की जनता को क्या मिला?
#आदिवासियों के लिए सरना धर्मकोड लागू हुआ क्या?
#पिछड़ों के 27 % आरक्षण के विषय में कोई घोषणा हुई क्या?
#कथित तौर पर अपमानित हुए चम्पाई सोरेन जी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया क्या?
#झारखंड को 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया क्या?

दलित नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण की पुलिस में शिकायत करने पर सामाजिक बहिष्कार:-          कर्नाटक के जिला यादगीर में बप...
16/09/2024

दलित नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण की पुलिस में शिकायत करने पर सामाजिक बहिष्कार:-
कर्नाटक के जिला यादगीर में बप्पारागा गांव में दलित नाबालिग लड़की के यौन शोषण की शिकायत पुलिस में करने पर तथाकथित सवर्णों द्वारा गांव के 250 दलितों के बहिष्कार का ऐलान किया गया।परिणामस्वरूप दलितों पर मंदिरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों के प्रतिबंध लगने से, उनके लिए आवश्यक सेवाओं (जैसे बाल काटना) सहित राशन लेना भी दुश्वार हो गया है।
भीम आर्मी के संस्थापक सह आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना लोकसभा क्षेत्र के सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने ट्वीट कर कहा कि, "ये अमानवीयता की चरम अवस्था हैं। घटना सोचने पर मजबूर करती हैं कि देश की आजादी के 77 साल बाद भी दलितों के लिए जघन्य अपराधों में भी न्याय पाना कितना कठिन हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि दलित होना ही गुनाह हैं।सम्मानपूर्वक जीवन जीना भी संघर्ष हैं"। साथ है उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मामले को संज्ञान में लेकर कठोर कार्यवाही करने,दलित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें किसी भी प्रकार की कमी न होने देने की मांग की है।
# JMM Jharkhand

15/09/2024

तलाव में गिरने से महिला की मौत :-
सरायकेला के हेंसाउड़ी तालाब में रविवार सुबह नहाने गई थोलको निवासी स्वर्गीय पांडू गोप की पत्नी की पैर फिसलने से डुबकर मौत हो गई। वो हेंसाउड़ी में किराए के मकान में रहकर मजदूरी का कार्य करती थी।
कहा जा रहा है कि रविवार की सुबह मृतिका ने हड़िया और मांस का सेवन किया। इसके बाद नहाने के लिए तालाब चली गई। महिला जैसे ही पानी में उतरने लगी तभी टाइल्स पर उसका पैर फिसल गया और उसके सर के पिछले हिस्से में चोट लगा और वह बेहोश होकर पानी में गिर गई जिससे उसकी मौत हो गई।

15/09/2024

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रविवार को जमशेदपुर के गोपाल मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने छह वंदे भारत समेत राज्य को कई बड़ी सौगात दी। जमशेदपुर में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि JMM में कांग्रेस का भूत घुस गया है। पीएम मोदी ने कहा कि 'कट्टरपंथी झारखंड को भी अपने कब्जे में लेते जा रहे हैं। इनके लोग झारखंड मुक्ति मोर्चे के भीतर भी घुस गए हैं। बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने घुसपैठ की जांच स्वतंत्र पैनल से कराने का आदेश दिया है, लेकिन यहां की सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है। यहां के लोगों की जमीन हड़पी जा रही हैं। घुसपैठिए पंचायतों की व्यवस्था पर कब्जा कर रहे हैं। बेटियों के साथ अत्याचार की वारदातें बढ़ रही हैं। नौजवान बेटियों के मां-बाप की नींद उड़ गई है।
भारी बारिश और खराब मौसम के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जमशेदपुर में रोड शो रद्द कर दिया गया। और पीएमएवाई-जी योजना के तहत आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए।
पीएम मोदी ने कहा कि जेएमएम वाले आदिवासियों के नाम पर राजनीति करते हैं। लेकिन, उनके मन में आदिवासी समाज के लिए कोई सम्मान नहीं है। पीएम ने कहा कि इनके लिए सियासी फायदा सबसे ऊपर है। झारखंड का गरीब आदिवासी आज पूछ रहा है कि क्या चंपाई सोरेन आदिवासी नहीं थे। सीता सोरेन का अपने ही परिवार में अपमान क्यों हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि झारखंड का निर्माण बड़े सपनों के लिए हुआ था। लेकिन सब कुछ भ्रष्टाचार और लूट की भेंट चढ़ गया।
झारखंड काँग्रेस प्रभारी ने पीएम मोदी के झारखंड दौरे को चुनावी स्टंट बताया।

नहीं रहे सीताराम येचुरी:-          CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी का 72 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में आज निधन हो गया...
12/09/2024

नहीं रहे सीताराम येचुरी:-
CPI(M) के महासचिव सीताराम येचुरी का 72 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में आज निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से एम्स में भर्ती थे। एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, येचुरी को एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन था। उनको इसके कारण निमोनिया हो गया था। येचुरी को तेज बुखार की शिकायत के बाद 19 अगस्त को एम्स के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया था। इसके बाद वह आईसीयू में एडमिट थे। कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। निमोनिया के कारण उनका निधन हो गया। सीपीएम के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह के मुताबिक, एम्स की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर को दिल्ली स्थित येचुरी के आवास पर लाया जाएगा। इसके बाद शनिवार सुबह 11 बजे से 3 बजे तक सीपीएम मुख्यालय में रखा जाएगा, जहां कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को मद्रास (चेन्नई) में एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वो एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक नेता थे। वो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जनरल सेक्रेटरी और पार्टी के संसदीय समूह के नेता थे। 19 अप्रैल 2015 से महासचिव के रूप में निर्वाचित किए गये थे। सन् 2016 में राज्यसभा में सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार से सम्मानित किए गये थे।

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