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भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल और युवावस्था में अनेक असुरों का वध किया। पूतना-वध के बाद बकासुर-वध की कथा बहुत प्रसिद्ध...
10/09/2026

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल और युवावस्था में अनेक असुरों का वध किया। पूतना-वध के बाद बकासुर-वध की कथा बहुत प्रसिद्ध है।
बकासुर-वध की कथा
कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अनेक असुर भेजे। उन्हीं में से एक था बकासुर, जो पूतना और अघासुर का भाई था।
एक दिन श्रीकृष्ण अपने सखा ग्वालबालों और बछड़ों के साथ यमुना तट के पास वन में गए। वहाँ बकासुर एक विशाल बगुले (सारस) का रूप धारण करके बैठा था। उसका शरीर पहाड़ जैसा बड़ा और चोंच बहुत लंबी थी।
जैसे ही उसने कृष्ण को देखा, उसने अपनी विशाल चोंच से श्रीकृष्ण को निगल लिया। ग्वालबाल यह देखकर भयभीत हो गए। लेकिन श्रीकृष्ण की दिव्य शक्ति से बकासुर के गले में तीव्र गर्मी उत्पन्न हुई। वह उन्हें सहन नहीं कर पाया और तुरंत कृष्ण को बाहर उगल दिया।
इसके बाद बकासुर ने अपनी चोंच से कृष्ण पर आक्रमण किया। तब श्रीकृष्ण ने उसकी दोनों चोंचों को पकड़कर इतनी शक्ति से अलग कर दिया कि वह बीच से फट गया और वहीं उसका अंत हो गया।
देवताओं ने आकाश से पुष्प-वर्षा की और श्रीकृष्ण की जय-जयकार की।
शिक्षा
ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
अहंकार और दुष्टता का अंत निश्चित है।
सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है।
यदि चाहें, मैं अगली कथा अघासुर-वध, धेनुकासुर-वध या कालिय नाग दमन भी सुना सकता हूँ।

पूतना-वध की कथाभगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में पूतना-वध एक अत्यंत प्रसिद्ध लीला है। इसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण म...
09/09/2026

पूतना-वध की कथा
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में पूतना-वध एक अत्यंत प्रसिद्ध लीला है। इसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण में मिलता है।
जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब मथुरा का राजा कंस उनसे भयभीत था। उसने अनेक राक्षसों को बालक कृष्ण को मारने के लिए भेजा। उनमें से एक राक्षसी पूतना थी।
पूतना ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और गोकुल पहुँची। वह नंद बाबा के घर गई और बालक कृष्ण को गोद में उठा लिया। उसके स्तनों पर घातक विष लगा हुआ था। उसका उद्देश्य कृष्ण को विषपान कराकर मारना था।
लेकिन श्रीकृष्ण सर्वशक्तिमान भगवान थे। उन्होंने दूध पीने के साथ-साथ पूतना के प्राण भी खींच लिए। पीड़ा से तड़पकर पूतना अपने वास्तविक विशाल राक्षसी रूप में आ गई और भूमि पर गिर पड़ी। उसके गिरने से धरती कांप उठी।
इस लीला से मिलने वाली शिक्षा
भगवान अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं।
छल और दुष्टता का अंत निश्चित है।
श्रीकृष्ण की करुणा इतनी महान है कि उन्होंने शत्रु भाव से आई पूतना को भी मातृत्व का स्थान देकर मोक्ष प्रदान किया।
जय श्रीकृष्ण! 🙏
बालक कृष्ण की यह लीला दर्शाती है कि भगवान जन्म लेते ही धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश का कार्य प्रारंभ कर देते हैं।

08/09/2026
चाचा चौधरी और साबू की एक छोटी कहानी:Writingएक दिन चाचा चौधरी अपने घर के बाहर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। तभी एक घबराया हुआ द...
08/09/2026

चाचा चौधरी और साबू की एक छोटी कहानी:
Writing
एक दिन चाचा चौधरी अपने घर के बाहर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। तभी एक घबराया हुआ दुकानदार उनके पास आया और बोला, “चाचा जी, मेरी दुकान से हर रात सामान चोरी हो रहा है। कृपया मेरी मदद कीजिए।”
चाचा चौधरी तुरंत मामले की जांच करने निकल पड़े। उनके साथ साबू भी था। रात को दोनों दुकान के पास छिपकर बैठ गए। आधी रात के समय एक चोर चुपके से दुकान में घुसा।
चाचा चौधरी ने अपनी तेज़ बुद्धि से समझ लिया कि चोर कौन है। उन्होंने संकेत दिया और साबू ने एक ही छलांग में चोर को पकड़ लिया। चोर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन साबू की ताकत के सामने उसकी एक न चली।
चोर को पुलिस के हवाले कर दिया गया। दुकानदार ने खुशी-खुशी चाचा चौधरी और साबू का धन्यवाद किया।
सब लोग कहने लगे, “चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है, और साबू की ताकत का कोई मुकाबला नहीं!”
इस तरह चाचा चौधरी और साबू ने एक और रहस्य सुलझाकर लोगों की मदद की।
यदि चाहें, तो मैं चाचा चौधरी और साबू की एक लंबी और मज़ेदार कहानी भी सुना सकता हूँ।

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