03/10/2026
*पवित्र चूड़धार धाम के रास्ते में स्वच्छता व्यवस्था ध्वस्त, शौचालय तक नहीं, युवाओं ने उठाई आवाज*
चौपाल (शिमला), 1 अक्टूबर 2026।
हिमाचल प्रदेश के सबसे ऊँचे और पवित्र धार्मिक स्थलों में शुमार चूड़धार धाम की यात्रा इस समय अपनी सबसे बुरी स्थिति से गुजर रही है। आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के संगम वाले इस धाम तक पहुँचने वाले मुंडाहलानी-चूड़धार पैदल मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आलम यह है कि पूरे ट्रेक पर एक भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर बुधवार, 1 अक्टूबर 2026 को *सेल्फ एजुकेट फॉर वॉलंटीयरिज्म अवेयरनेस (SEVA), हिमाचल प्रदेश* और *नवयुवक मंडल जोथरेऊ* के स्वयंसेवकों का एक प्रतिनिधिमंडल उप-मंडलाधिकारी (ना.) चौपाल हेमचंद वर्मा से मिला।
प्रतिनिधिमंडल में SEVA संस्था की अध्यक्ष *सुमन शांत* और सदस्य *शिवम चौहान* सहित दर्जनों युवा शामिल थे। युवाओं ने SDM को मौके पर ली गई तस्वीरों और वीडियो के साथ एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और चूड़धार मार्ग की जमीनी हकीकत से अवगत करवाया।
SEVA संस्था द्वारा चूड़ेश्वर सेवा समिति से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान मुंडाहलानी से चूड़धार मार्ग पर प्रतिदिन 4000 से 6000 श्रद्धालु गुजरते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और युवा ट्रेकर्स शामिल होते हैं। इतनी भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन की ओर से पूरे मार्ग पर स्वच्छता और सुविधा प्रबंधन के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया है।
युवाओं ने बताया कि मुंडाहलानी से चूड़धार तक के पैदल मार्ग पर जगह-जगह प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, थर्माकोल के दोने-पत्तल और खाने-पीने का कचरा बिखरा पड़ा है। कई स्थानों पर तो कचरे से भरे बोरे 200-300 मीटर के अंतराल पर खुले में फेंक दिए गए हैं। यह कचरा न केवल गंदगी फैला रहा है, बल्कि क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए जहर बन रहा है। यह जंगलों की वनस्पति को नष्ट कर रहा है, जंगली जानवरों के लिए खतरा बन रहा है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्राकृतिक जल स्रोतों, नालों और चश्मों को दूषित कर रहा है, जिनका पानी श्रद्धालु पीने के लिए उपयोग करते हैं।
ज्ञापन में उठाया गया दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा शौचालयों की अनुपलब्धता है। मुंडाहलानी चेक पोस्ट से लेकर चूड़धार मंदिर परिसर तक महिलाओं और पुरुषों के लिए एक भी स्थायी या अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण हजारों श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह न केवल मानवीय गरिमा के खिलाफ है, बल्कि तीर्थ स्थल की पवित्रता और पर्यावरणीय स्वच्छता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच में यह भी सामने आया कि मार्ग पर संचालित अस्थायी ढाबों और छोटी दुकानों द्वारा धड़ल्ले से सिंगल-यूज प्लास्टिक और थर्माकोल से बने गिलास, प्लेट और चम्मचों का उपयोग किया जा रहा है। सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यही डिस्पोजल सामग्री कचरा संकट की सबसे बड़ी वजह है। उपयोग के बाद इन्हें वहीं जंगल में फेंक दिया जाता है, जो सैकड़ों सालों तक न तो सड़ता है और न ही गलता है।
इसके अलावा, मुंडाहलानी से चूड़धार के बीच का पैदल रास्ता कई जगहों से टूट चुका है, पत्थर उखड़ गए हैं और बरसात के कारण अत्यधिक फिसलन भरा हो गया है। प्रतिदिन हजारों लोगों के दबाव से यह और भी खतरनाक हो गया है, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को चलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
युवाओं की बात को गंभीरता से सुनने के बाद *उप-मंडलाधिकारी चौपाल हेमचंद वर्मा* ने कहा कि यह क्षेत्र वन विभाग के अंतर्गत आता है, जिस कारण प्रशासन सीधे तौर पर वहां कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं कर सकता है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मुद्दे को लेकर बहुत जल्द वन विभाग के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा, "एक उप-मंडलाधिकारी और मंदिर समिति के अध्यक्ष होने के नाते हम हर भरसक प्रयास करने के लिए तैयार हैं। इस समस्या को पहले भी उठाया गया है और अब और मजबूती से उठाया जाएगा।"
SDM ने युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए अपील भी की कि SEVA, नवयुवक मंडल जोथरेऊ और स्थानीय युवा स्वयं भी इस पवित्र धाम की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए समय-समय पर स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करें। उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्य में प्रशासन का पूर्ण सहयोग और संरक्षण उनके साथ रहेगा।
SEVA संस्था के स्वयंसेवियों ने प्रशासन से मांग की है कि मार्ग पर प्रत्येक 100 मीटर पर कूड़ेदान लगाए जाएं, बायो-टॉयलेट की व्यवस्था की जाए, एक निश्चित डंपिंग साइट तय की जाए और प्लास्टिक डिस्पोजल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। संस्था ने कहा कि चूड़धार न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि एक महत्वपूर्ण इको-सेंसिटिव जोन भी है और इसकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।