07/05/2026
Mother's day special thanks for Denik Sawera for the video.
A story
“माँ की चप्पल”
एक गरीब परिवार में रहने वाला रोहन हमेशा अपनी माँ से नाराज़ रहता था।
क्योंकि उसकी माँ पुराने कपड़े पहनती थी…
टूटी हुई चप्पल पहनकर स्कूल तक उसे छोड़ने आती थी।
रोहन को लगता था कि उसकी माँ की वजह से दोस्त उसका मज़ाक उड़ाते हैं।
एक दिन स्कूल में Parents Meeting थी।
रोहन ने अपनी माँ से झूठ बोल दिया —
“माँ, आपको आने की ज़रूरत नहीं है…”
लेकिन उसकी माँ फिर भी चुपचाप स्कूल पहुँच गई।
जब रोहन ने अपनी माँ को देखा…
तो उसे गुस्सा आ गया।
वो बोला —
“आप क्यों आई?
सब लोग हँसेंगे मुझ पर!”
माँ कुछ नहीं बोली…
बस मुस्कुराकर वापस चली गई।
उस रात रोहन ने देखा…
माँ अपने पैरों के छालों पर दवाई लगा रही थी।
उनकी चप्पल पूरी तरह टूट चुकी थी।
रोहन ने पहली बार ध्यान से देखा…
माँ के हाथों में घाव थे…
कपड़ों पर सिलाई थी…
और आँखों में थकान।
तभी उसे पड़ोस वाली आंटी की बात याद आई —
“तेरी माँ रोज़ कई किलोमीटर पैदल चलती है…
ताकि तेरी फीस भर सके…”
उस रात रोहन सो नहीं पाया।
अगली सुबह उसने अपनी गुल्लक तोड़ी…
और बाज़ार जाकर माँ के लिए नई चप्पल खरीदी।
घर आकर उसने चप्पल माँ के सामने रख दी।
माँ हैरान होकर बोली —
“बेटा… ये किसके लिए?”
रोहन रोते हुए बोला —
“उस माँ के लिए…
जिसने खुद टूटकर मुझे बनाया है…”
माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।
उन्होंने रोहन को गले लगा लिया।
सालों बाद…
जब रोहन एक बड़ा इंसान बना…
तो उसने अपने ऑफिस में अपनी माँ की वही पुरानी टूटी चप्पल फ्रेम करवाकर रखी।
नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी —
“जिसने मुझे चलना सिखाया…
वो खुद नंगे पैर चलती रही…”
❤️ सीख:
माँ की कीमत तब समझ आती है…
जब हम उनके त्याग को महसूस करना शुरू करते हैं। 🌸
゚viralシ