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अवैध लकड़ी के खिलाफ वन विभाग की बड़ी कार्रवाई भारी मात्रा में लकड़ी जब्तजललडेगा प्रखंड  के ओड़गा ओपी अंतर्गत बड़ीब्रिंग ...
11/04/2026

अवैध लकड़ी के खिलाफ वन विभाग की बड़ी कार्रवाई भारी मात्रा में लकड़ी जब्त

जललडेगा प्रखंड के ओड़गा ओपी अंतर्गत बड़ीब्रिंग में अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। गुप्त सूचना के आधार पर ओड़गा पुलिस तथा वन विभाग टीम ने विशेष छापेमारी अभियान चलाते हुए, अवैध लकड़ी की बड़ी खेप बरामद की है पुलिस के अनुसार संदिग्ध भाग्यकर्मियों द्वारा जंगलों से अवैध रूप से लकड़ी काटकर उसे संग्रहित किया गया था। छापामारी के दौरान मौके से लगभग 40 से अधिक सखुआ के बोटा बरामद किए गए । जब्त लड़कियों को चार ट्रैक्टरों के माध्यम से वन कार्यालय कोलेबिरा लाया गया, जहां सुरक्षित रखा गया । वन विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है तस्कर की पहचान कर उनकी गिरफ्तार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। हालांकि छापेमारी की भनक लगते ही कुछ आरोपी मौके से फरार हो गए हैं । इस घटना की जानकारी प्रभारी फॉरेस्ट मनोज कच्छप ने दी।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अवैध लकड़ी कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है और इसके तरह के अपराधों में शामिल लोगों को किसी सूरत में बक्सा नहीं जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि नहीं अवैध कटाई एवं लकड़ी का कारोबार होता दिखे तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस एवं वन विभाग को दें ताकि समय रहते हैं कार्रवाई की जा सके। इस संयुक्त छापामारी अभियान में कोलेबिरा रेंज के वन उप परिसर पदाधिकारी हेमंत कुमार, प्रदीप कुल्लू ,जयवंत प्रसून केरकेट्टा के साथ बानो रेंज के लखिद्र सिंह, मनीष डुंगडुंग ,सुरेश टेटे, ओड़गा ओ पी के एएसआई उपेंद्र राय , पुलिस के जवान तथा गृह रक्षा के जवान सक्रिय रूप से शामिल रहे ।

05/04/2026
05/04/2026

*पहाड़ों के बीच मेहनत की मिसाल: अनिल लुगुन ने सब्जी खेती से बदली किस्मत*

*बाहर मजदूरी छोड़ गांव में शुरू की खेती, आज 8 परिवारों का सहारा बना एक किसान*

जलडेगा (सिमडेगा)
कहते हैं मेहनत और लगन हो तो कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं जलडेगा प्रखंड के ओड़गा पंचायत अंतर्गत सारूबहार उलीटोली निवासी किसान अनिल लुगुन, जो पहाड़ों के बीच सीमित संसाधनों में सब्जी खेती कर अपनी और अपने परिवार की जिंदगी संवार रहे हैं।पहाड़ के नीचे बसे इस गांव में वर्षों पहले बने एक कुएं के सहारे अनिल लुगुन करीब एक एकड़ जमीन पर टमाटर, बोदी, गाजर, बीम, बंदा गोभी और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। आज उनकी खेतों में हरियाली लहलहा रही है, जो उनकी मेहनत की कहानी खुद बयां करती है।
अनिल लुगुन बताते हैं कि पहले रोजगार की तलाश में वे दूसरे राज्यों में मजदूरी करने गए, लेकिन वहां से कोई खास बचत नहीं हो पाती थी। आखिरकार उन्होंने गांव लौटकर खेती को ही आजीविका बनाने का निर्णय लिया। धीरे-धीरे बचत कर उन्होंने जमीन की घेराबंदी की और कुएं के पानी से सिंचाई कर सब्जी उत्पादन शुरू किया।
आज उनकी मेहनत का नतीजा है कि ओड़गा, पुरनापानी सहित आसपास के बाजारों में वे अपनी उपज बेच रहे हैं और इसी खेती से आठ परिवारों का भरण-पोषण हो रहा है। पहले जहां परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था, वहीं अब स्थिति काफी बेहतर हो चुकी है।
इस काम में उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य भी बराबर का सहयोग करते हैं। हालांकि, अनिल लुगुन का कहना है कि उन्हें अब तक कृषि विभाग या आत्मा कार्यालय से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। बेहतर बीज, आधुनिक कृषि उपकरण, सिंचाई सुविधा और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी मिलने पर वे अपनी खेती को और आगे बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के समय फसल को नुकसान होता है, जिससे आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड नहीं होने के कारण भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अनिल लुगुन जैसे किसान यह साबित करते हैं कि यदि समय पर सरकारी सहयोग और संसाधन मिल जाएं, तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है और किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

19/03/2026

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11/03/2026

*सरकारी योजनाओं से वंचित दिव्यांग युवती, मदद के इंतजार में बीत रहे दिन*

*बीमारी ने छीना चलने-फिरने का सहारा, अब तक नहीं बना दिव्यांगता प्रमाण पत्र और नहीं मिली पेंशन*

सरकार भले ही दिव्यांगों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों से अलग दिखाई देती है। जलडेगा प्रखंड के कुटुंगिया पंचायत अंतर्गत एक गांव में रहने वाली 19 वर्षीय दिव्यांग युवती शांति जोजो आज भी सरकारी योजनाओं से वंचित होकर गरीबी और लाचारी में जीवन बिताने को मजबूर है।
शांति जोजो, स्वर्गीय सोमा जोजो की पुत्री है और कई वर्षों से दिव्यांगता की मार झेल रही है। युवती के भाई अमृत जोजो ने बताया कि शांति पहले गांव के स्कूल में पढ़ने जाती थी और कक्षा दो में पढ़ रही थी। इसी दौरान वह गंभीर रूप से बीमार हो गई, जिसके बाद उसका पूरा शरीर विकलांग हो गया।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका समुचित इलाज नहीं हो सका। अमृत जोजो ने बताया कि उस समय उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली और न ही किसी ने सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। समय बीतता गया, लेकिन आज तक शांति जोजो को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि शांति जोजो का अब तक दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाया है, जबकि वह पूरी तरह से दिव्यांग और असहाय स्थिति में है। परिवार का कहना है कि अब तक कोई जनप्रतिनिधि या संबंधित अधिकारी उनकी स्थिति देखने नहीं पहुंचे हैं और न ही किसी ने मदद दिलाने की पहल की है।

*मदद का मिला आश्वासन*

इस मामले में मिशन बदलाव के जिला अध्यक्ष दीपक कुमार महतो ने कहा कि उन्हें इस दिव्यांग युवती की स्थिति की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिव्यांगता योजना के तहत मिलने वाले सभी सरकारी लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।वहीं कुटुंगिया पंचायत की मुखिया जानकी देवी ने कहा कि उन्हें शांति जोजो के बारे में पहले जानकारी नहीं थी। अब वे पूरी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगी ताकि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

अब सवाल यह है कि सरकार की योजनाएं कागजों से निकलकर जमीनी स्तर तक कब पहुंचेंगी और कब इस दिव्यांग युवती को उसका अधिकार मिल पाएगा।

08/03/2026

जलडेगा ओडगा मुख्य पथ के घाघ नाला स्थित पुल जर्जर अवस्था में पहुंच गया है तथा ग्रामीणों द्वारा मांग के वावजूद घाघ नाला में जर्जर पुल के स्थान पर नये पुल का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है।मालुम रहे कि उक्त पुल पर दुर्घटना से कई लोगों की पुर्व में मौत भी हो चुकी है। पुल पर जगह-जगह दरारें आने के साथ पुल दब भी गया है फलस्वरूप बरसात में तो और परेशानी बढ़ जाती है और पुल के ऊपर से अक्सर नाला का पानी बहता है इस सम्बन्ध में जिला परिषद सदस्य रोजालिया शांता कंडुलना एवं कांग्रेस मण्डल अध्यक्ष अमर तोपनो ने कहा कि जलडेगा से ओडगा होते हुए उड़ीसा जाने का एकमात्र पथ है। उन्होंने कहा बराबर योजना की मांग की जाती रही है परंतु अबतक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। लोगों के द्वारा दर्जनों बार आवेदन दिया गया है प्रशासन को उसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह मौन। उन्होंने भी अक्सर हो रहे दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए जिला प्रशासन एवं पथ निर्माण विभाग से पुल निर्माण की मांग की है।

07/03/2026

दोनों पैरों से दिव्यांग, लेकिन हौसला बुलंद: हेरमन कंडुलना बने आत्मनिर्भरता की मिसाल”
सब-हेडलाइन

साइकिल चलाना सीखा, राजमिस्त्री बने, टेम्पो चलाते हैं और खेती भी करते हैं — संघर्ष से रची प्रेरणा की कहानी

न्यूज़ स्टोरी...रवि गोप
सिमडेगा/जलडेगा: सच ही कहा गया है कि यदि मन और मस्तिष्क में दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादा हो तो दिव्यांगता भी किसी की राह नहीं रोक सकती। इस कहावत को सच कर दिखाया है जलडेगा प्रखंड के कुटुंगिया पंचायत अंतर्गत रामजड़ी गांव के 42 वर्षीय हेरमन कंडुलना ने।
हेरमन कंडुलना, स्वर्गीय विमल कंडुलना के पुत्र हैं। उन्होंने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। बताया जाता है कि करीब 10 वर्ष की उम्र में वे एक गंभीर बीमारी के शिकार हो गए, जिसके कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हो गए और वे दिव्यांग हो गए। तीन भाइयों में सबसे छोटे होने के कारण बड़े दोनों भाई शादी के बाद रोजगार की तलाश में बाहर चले गए और हेरमन घर पर ही रह गए। कुछ समय बाद उनकी माता सेवानी कंडुलना का भी निधन हो गया, जिसके बाद वे पूरी तरह अकेले पड़ गए।
दिव्यांगता और अकेलेपन के बीच जीवनयापन की चिंता उन्हें लगातार सताती रही। लेकिन हेरमन ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पहले साइकिल चलाना सीखा, फिर राजमिस्त्री का काम सीखने का निश्चय किया। गांव के राजमिस्त्रियों के साथ लगकर कठिन परिश्रम और लगन से काम सीखते-सीखते वे इस कार्य में पूरी तरह दक्ष हो गए।
आज स्थिति यह है कि दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद हेरमन साइकिल चलाते हैं, टेम्पो भी चलाते हैं और अपनी थोड़ी-बहुत जमीन पर खेती भी करते हैं। इसके साथ ही वे दैनिक मजदूरी और राजमिस्त्री का काम भी करते हैं। अब तक वे दर्जनों पक्के मकानों का निर्माण कर चुके हैं और आसपास के गांवों से लोग उन्हें विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए बुलाते हैं।
हेरमन साइकिल मरम्मत का काम भी अच्छी तरह जानते हैं और गांव में लोगों की साइकिल ठीक कर देते हैं। राजमिस्त्री के रूप में उन्हें प्रतिदिन लगभग 600 रुपये की मजदूरी मिलती है। उन्हें दिव्यांग पेंशन भी मिलता है तथा राशन कार्ड के माध्यम से अनाज की सुविधा भी प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि एक समय वे अपनी दिव्यांगता को लेकर काफी चिंतित रहते थे और सोचते थे कि जीवन कैसे आगे बढ़ेगा। लेकिन उन्होंने खुद को समझाया कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।” इसी सोच के साथ उन्होंने मेहनत का रास्ता चुना और आज आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हेरमन गांव में हर कार्य में आगे रहते हैं। खेत का काम हो, घर का काम हो या गांव के लोगों की मदद—वे हर जगह सक्रिय रहते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और मेहनत से जीवन जीने की मिसाल पेश की है। गांव के युवाओं को भी उनके संघर्ष और आत्मविश्वास से प्रेरणा मिलती है।
हालांकि हेरमन कंडुलना ने कई बार जनप्रतिनिधियों और जनता दरबार में व्हीलचेयर और वैशाखी की मांग की है, लेकिन अब तक उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाई है।
हेरमन की कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान के अंदर मजबूत इरादा और आत्मविश्वास हो तो कोई भी बाधा उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

*अस्पताल की लापरवाही पर फूटा जनआक्रोश पूरे दिन ठप रहा जलडेगा,सिविल सर्जन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ बंदी*जलडेगा में भा...
05/03/2026

*अस्पताल की लापरवाही पर फूटा जनआक्रोश पूरे दिन ठप रहा जलडेगा,सिविल सर्जन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ बंदी*
जलडेगा में भाजपा नेता सह समाजसेवी रामेश्वर सिंह को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले सोमवार को चिकित्सकीय सुविधा प्राथमिक इलाज नहीं मिलने एवं इलाज में देरी होने से हुई मौत को लेकर भाजपा के द्वारा जलडेगा बंद बृहस्पतिवार को किया गया। बृहस्पतिवार को सुबह होते ही मुख्य पथ जाम कर दिया गया तथा लोगों ने स्वत अपनी अपनी दुकानें बंद रखी तथा बंदी के कारण यात्री वाहनों को अलग अलग मार्गों से अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।बंदी के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों ने भी बंदी में भाग लिया तथा स्वास्थ्य विभाग होश में आओ, अस्पताल प्रबंधन होश में आओ के नारों के साथ, दोषीयों के विरुद्ध कार्रवाई करने, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करने, चिकित्सकों की स्थायी नियुक्त करने,पिडित परिवार को मुआवजा देने, ओपीडी सेवा बहाल करने, रामेश्वर सिंह अमर रहे सहित कई नारे लगाए गए।बंद को लेकर बीडीओ डॉ प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार जाम स्थल पर पहुंचे परंतु लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के सिविल सर्जन सिमडेगा के द्वारा ही जाम स्थल पर आकर कारवाई का आश्वासन देने पर ही बंद वापस लेने की बातें कही गई।जिसके बाद अपराह्न दो बजे के करीब सिविल सर्जन सिमडेगा जाम स्थल पर पहुंचे तथा वार्तालाप हुई ।इस दौरान भाजपा नेता सुजान जोजो ने स्वास्थ्य विभाग के कई खामियों को उजागर किया तथा कहा कि रामेश्वर सिंह एक नेता ही नहीं एक सच्चे समाजसेवी भी थे।उनका एक बेटी भी है जिसकी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ दोषीयों पर अविलंब कारवाई करने,पिडित परिजनों को मुआवजा देने, एम्बुलेंस व्यवस्था सुनिश्चित करने करने सहित कई मांगे स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर की गई।इस दौरान सिविल सर्जन द्वारा गया कि सोमवार को ड्यूटी पर तैनात डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मीयों के प्रति शो कॉज जारी किया गया। उन्होंने चिकित्सक पदस्थापित करने, एम्बुलेंस व्यवस्था सुदृढ़ करने, ओपीडी सेवा बहाल करने एवं कारवाई करने सहित कई सार्थक आश्वासन मिलने के पश्चात बंदी वापस ले लिया गया।इस दौरान सिविल सर्जन से पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही ओपीडी सेवा चालु करने की मांग भी की गई। लोगों ने कहा कि वर्तमान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दूर हैं तथा परेशानी होती है। वहीं सिविल सर्जन तथा जनप्रतिनिधियों के साथ जलेगा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया गया। वहीं अस्पताल कर्मियों को सिविल सर्जन के द्वारा दिशा निर्देश भी दिया गया।इस दौरान बीडीओ डॉ प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर ,जिप सदस्य रोजालिया शांता कंडुलना सहित भाजपा नेता सुजान जोजो, मोतीलाल ओहदार, पंसस दीपक कुमार महतो,जगेश्वर बिंझीया,भोला साहु,सुभाष साहु, दिलेश्वर साहु,महेश साहु,राजु साहु, राजेश अग्रवाल, जसवंत साहु, रामावतार अग्रवाल,बसंत साहु, त्रिलोक साहू,हेमशरण सिंह,किशनु कुलला, लक्ष्मण मांझी,सुनिता देवी,जयंती देवी,मिठु राम वर्मा, चतुर बड़ाईक,दया साहु,कमल ठाकुर, सुरेंद्र अग्रवाल,मदन सरकार,मुखिया विमला देवी, मुखिया शिशिर डांग, मुखिया बिपिन बंडिग सहित काफी संख्या में महिलाओं के साथ ग्रामीणों सहित विभिन्न दलों के समर्थक जनप्रतिनिधिगण तथा समाजसेवी भी मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टिकोण से पुलिस बल की भी तैनाती रही। वहीं अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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