11/03/2022
कौशांबी में क्यों हुई भाजपा की हार?(आत्म चिंतन की जरूरत)
जिले की तीनो विधानसभा सीट पर 2022 के चुनावी नतीजे आने के बाद कमल मुरझा गया और पहली बार समाजवादी पार्टी तीनों सीटों पर काबिज हो गई,2017 के चुनाव में मोदी लहर के चलते यहां की चायल, मंझनपुर ,सिराथू तीनों विधानसभा सीटों पर भगवाध्वज लहराया था ,भाजपा के चायल से संजय गुप्ता, मंझनपुर से लाल बहादुर ,सिराथू से शीतला प्रसाद पटेल विधायक चुने गए थे ।2022 के विधानसभा चुनाव में सिराथू सीट से शीतला प्रसाद पटेल एवं चायल विधानसभा सीट से संजय गुप्ता का टिकट पार्टी द्वारा काट दिया गया । सिराथू सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को उम्मीदवार बनाया गया था जबकि चायल विधानसभा सीट पर भाजपा गठबंधन से नागेंद्र प्रताप सिंह को चुनावी समर में उतारा गया था । इस बार भी भाजपा के सामने तीनों सीटों को बरकरार रखने की चुनौती थी आखिर 5 वर्षों में ऐसे कौन से कारक थे जिसके चलते भाजपा को यहां की तीनों सीटें गवा देनी पड़ी। जबकि चुनाव प्रचार के लिए कौशांबी में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी जन समर्थन मांगने के लिए आना पडा फिर भी यहां की जनता ने कौशांबी से भाजपा नेतृत्व को एक सिरे से खारिज कर दिया। सिराथू विधानसभा सीट पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी की पल्लवी पटेल से पराजित हो गए पल्लवी पटेल क्षेत्र के लिए बिल्कुल नया चेहरा था जनता ने केशव प्रसाद मौर्य के बजाय पल्लवी पटेल पर ज्यादा विश्वास किया और जीत का सेहरा बांध पल्लवी के सिर बांधा दिया जबकि केशव प्रसाद मौर्य द्वारा पिछले 5 वर्षों में सिराथू सहित पूरे जिले में अनेक सड़कें बनवाई, गंगा और यमुना नदी में ब्रिज बनाकर कौशांबी को पड़ोसी जिलों से जोड़कर विकास को गति देने का काम किया था, फिर भी सिराथू के मतदाता केशव प्रसाद मौर्य को पसंद नहीं किया केशव प्रसाद मौर्य के पराजय की वजह क्षेत्रीय विधायक की अपरिपक्व राजनीतिक समझ, डिप्टी सीएम का मतदाताओं से अपने आपको दूर रखना ,क्षेत्रीय प्रबुद्ध एवं विशिष्ट लोगों से क्षेत्रीय विकास के लिए मशविरा न करना, पारिवारिक लोगों का अनावश्यक राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना, भाजपा संगठन की अदूरदर्शिता, चुनावीकुप्रबंधन सीटिग विधायक शीतला प्रसाद पटेल के टिकट कटने से पटेल बिरादरी के मतदाताओं का भाजपा से मोहभंग होना, हार की वजह मानी जा रही हैं। यहां के मतदाताओं का मिजाज समय रहते ना तो भाजपा संगठन समझने की कोशिश किया, स्टार प्रचारक होने के नाते स्वयं केशव प्रसाद मौर्य भी गंभीरता से नहीं लिया ।इसी का फायदा डॉक्टर पल्लवी पटेल उठाकर केशव प्रसाद जैसे दिग्गज नेता को सहज ही चारों खाने चित कर दिया। मंझनपुर विधानसभासीट भाजपा के सिटिंग विधायक लालबहादुर को गवानी पड़ी गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को 2017 में टिकट देकर भारतीय जनता पार्टी ने लाल बहादुर को विधायक बनाने में कामयाब रही। विधायक लाल बहादुर से जनता क्षेत्र की समस्याओं विकास एवं कार्य करने की शैली को लेकर संतुष्ट नहीं थी, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के इकबाल पर चुनाव जीतने की आकांक्षा से हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहना मतदाताओं के बीच अपने नुमाइंदगी का विश्वास काम रखने में असफलरहना पराजय की वजह बन गई। इसका पूरा फायदा समाजवादी पार्टी के उमेदवार इंद्रजीत सरोज भुनाने में कामयाब रहे ,इंद्रजीत सरोज बहुजन समाज पार्टी से मंझनपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके थे। बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं पर गहरी पकड़ थी खासकर पासी समुदाय के मतदाताओंमे इंद्रजीत सरोज का अच्छा खासा प्रभाव रहा है और इस बार दिशा विहीन बहुजन समाज पार्टी का मतदाता बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी पर भरोसा न कर इंद्रजीत सरोज पर भरोसा जताया इस प्रकार मुस्लिम यादव एवं बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत अनुसूचित जाति के मतदाताओं के ध्रुवीकरण के चलते इंद्रजीत सरोज समाजवादी पार्टी से विधायक निर्वाचित होकर समाजवादी पार्टी का पहली बार मंझनपुर में खाता खोलने का श्रेय हासिल कर लिया। रही बात चायल विधानसभासीटकी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पूजा पाल विधायक निर्वाचित होकर जायल में पहली बार समाजवादी पार्टी की जीत दर्ज कराई है जीत की वजह भी भारतीय जनता पार्टी के यहां से विधायक रहे संजय गुप्ता का टिकट काट दिया जाना भी माना जा रहा है भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी नागेंद्र प्रताप सिंह वहां के नए बिल्कुल नए चेहरा थे संजय गुप्ता एवं भाजपा संगठन कई लोगों ने पूरे उत्साह के साथ गठबंधन प्रत्याशी का साथ नहीं दिया इसीलिए भाजपा के परंपरागत वोट बट गए पूजा पाल को यहां यादव, मुस्लिम, मतदाताओं के अलावा भाजपा के परंपरागत मतदाता पाल बिरादरी के मतदाताओं का समर्थन मिला साथ ही इंद्रजीत सरोज की वजह से पासी बिरादरी के मतदाता जो कभी बहुजन समाज पार्टी की झोली में जाते थे टूट कर पूजा पाल के पक्ष में आ गए जिसकी वजह से पूजा पाल की जीत आसान हो गई और भितरघात के चलते भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार नागेंद्र प्रताप सिंह को पराजय का मुंह देखना पड़ा।