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पेड़ लगाए,पर्यावरण बचाए।
05/06/2026

पेड़ लगाए,
पर्यावरण बचाए।

25/05/2026

🙏जीव ही जीवन है, आप भी अपने घर पर पानी जरूर रखे 🙏 #प्रकृतिबचाओ #पक्षीबचाओ #पेड़बचाओ

25 तारीख को ज्यादा से ज्यादा शक्कर मन्दोरी पहुंचे किसान मजदूर महापंचायत में #किसानी  #संघर्ष  #भाईचारा
23/05/2026

25 तारीख को ज्यादा से ज्यादा शक्कर मन्दोरी पहुंचे किसान मजदूर महापंचायत में
#किसानी #संघर्ष #भाईचारा

सिरसा SP दीपक जी सहारण को पक्षियों के लिए चौपटा के पत्रकारों द्वारा सिकोरे भेट किये गए...आप भी इस मुहिम में हमारा सहयोग ...
23/05/2026

सिरसा SP दीपक जी सहारण को पक्षियों के लिए चौपटा के पत्रकारों द्वारा सिकोरे भेट किये गए...

आप भी इस मुहिम में हमारा सहयोग जरूर करे...

080590 78111

चलो आज वोट देते हैं 🇮🇳अब फैसला जनता करेगी 😎देखत है कौन किसको पसन्द करता है...✅ Vote For Clean Politics⚡ Vote For Youth P...
21/05/2026

चलो आज वोट देते हैं 🇮🇳
अब फैसला जनता करेगी 😎
देखत है कौन किसको पसन्द करता है...

✅ Vote For Clean Politics
⚡ Vote For Youth Power
🪳 Vote For Cockroach Janta Party

साफ राजनीति • मजबूत युवा • नई सोच ✊
क्या इस बार बदलेगा सिस्टम?







स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें।
19/05/2026

स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें।

 #ढूंकड़ा  गांव में जल संकट गहराया: सूखे तालाब और खाली पाइपों के बीच टैंकरों के भरोसे ग्रामीण, प्रशासन मौन*ढूंकड़ा।* गर्...
19/05/2026

#ढूंकड़ा गांव में जल संकट गहराया: सूखे तालाब और खाली पाइपों के बीच टैंकरों के भरोसे ग्रामीण, प्रशासन मौन
*ढूंकड़ा।* गर्मी की शुरुआत होते ही ग्रामीण इलाकों में पानी की त्राहि-त्राहि मचना शुरू हो गई है। ताजा मामला गांव ढूंकड़ा का है, जहाँ जल संकट बेहद गहरा चुका है। गांव के सरकारी जल संकट प्रबंधन तंत्र पूरी तरह ठप नजर आ रहे हैं, जिसके कारण ग्रामीण अब महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी मंगवाकर गुजारा करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि बूंद-बूंद पानी के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
# # # सूखे पड़े हैं तालाब, बुनियादी ढांचा हुआ जर्जर
गांव के मुख्य जल स्रोतों की हालत बदतर हो चुकी है। गांव का बड़ा तालाब पूरी तरह सूखने की कगार पर है; उसमें केवल नाममात्र का कीचड़युक्त और दूषित पानी बचा है, जो न तो इंसानों के काम का है और न ही मवेशियों के।
यही नहीं, गांव के पास से गुजरने वाली जल निकासी और पुलिया का बुनियादी ढांचा भी पूरी तरह टूट-फूट का शिकार हो चुका है। देखरेख के अभाव में नहरें और सिंचाई के छोटे रास्ते मलबे और कचरे से पटे पड़े हैं, जिससे पानी की सुचारू आपूर्ति की उम्मीद भी दम तोड़ चुकी है।
# # # वाटर बॉक्स पर ताला, सिर पर मटका ढोने को मजबूर महिलाएं
गांव में बना सरकारी वॉटर बॉक्स (जलघर) केवल सफेद हाथी साबित हो रहा है। वहाँ लगीं बड़ी-बड़ी मोटरें और भारी-भरकम पाइपलाइनें सूखी पड़ी हैं। इस बदइंतजामी का सबसे बड़ा खामियाजा गांव की महिलाओं और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। भीषण धूप में महिलाएं सिर पर पारंपरिक मटके रखकर दूर-दराज के चालू नलों या कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी इस संकट में अपनी माताओं का हाथ बंटा रहे हैं।
# # # कमाई का बड़ा हिस्सा पानी खरीदने में हो रहा बर्बाद
गांव के बुजुर्गों और युवाओं के चेहरों पर पसरी मायूसी प्रशासन की नाकामी को साफ बयां करती है। ग्रामीणों ने बताया कि घरों की रोजमर्रा की जरूरतों और पशुओं को पिलाने के लिए उन्हें हर हफ्ते निजी टैंकरों को मोटी रकम देनी पड़ रही है। एक तरफ जहां खेती और मजदूरी से आमदनी घट रही है, वहीं दूसरी तरफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर हो रहा यह अतिरिक्त खर्च ग्रामीणों की कमर तोड़ रहा है।
> *"नेताओं और अधिकारियों को केवल चुनाव के वक्त हमारी याद आती है। आज पूरा गांव प्यासा मर रहा है, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। अगर जल्द ही जलघर चालू नहीं किया गया या नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो हम आंदोलन को मजबूर होंगे।"* > — गांव के पीड़ित ग्रामीण
>
# # # मुख्य बिंदु जो प्रशासन पर खड़े करते हैं सवाल:
* *जलघर की विफलता:* सरकारी वॉटर पंपिंग स्टेशन चालू क्यों नहीं है और लाखों की लागत से बिछाई गई पाइपलाइनें सूखी क्यों हैं?
* *तालाबों का दुर्दशा:* जल संरक्षण के बड़े सरकारी दावों के बीच गांव का पारंपरिक तालाब सूखा और उपेक्षित क्यों पड़ा है?
* *आर्थिक बोझ:* गरीब ग्रामीणों पर हर महीने टैंकरों से पानी खरीदने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है?
*प्रशासनिक सुस्ती से आक्रोश:* ढूंकड़ा गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तुरंत दखल देने की मांग की है। ग्रामीणों की चेतावनी है कि यदि गांव में पेयजल की सुचारू आपूर्ति जल्द बहाल नहीं की गई, तो वे जिला मुख्यालय पर मटका फोड़ प्रदर्शन करेंगे

हमारे गांव शक़्कर मंदोरी में जिस फ़िल्म की शूटिंग हुई थी वो जल्द होगी आपके सामने...आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं 💞...
14/01/2026

हमारे गांव शक़्कर मंदोरी में जिस फ़िल्म की शूटिंग हुई थी वो जल्द होगी आपके सामने...

आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं 💞🙏

वो कहते हैं ना भोलेनाथ सब कुछ संभाल लेंगे और संभालते ही है और अब भी भोला भली करेगा 🤗💐🙏

बहुत ही शानदार फिल्म आ रही हैं दोस्तों MOMACU
Only On KableOne

Director है Kuldeep Kunal Dada 🌻💐
Satender Sehrawat Harpreet Harry Bhatti

Cast Yashpal Sharma Jatin Sarna Apoorva Arora Gourav Goutam Sonu Ronjhiya Satish Georgy Kashyap Amarjeet Singh Shrikant Verma J D Ballu 🎉💫🌻💐

आपका सभी का प्यार बना रहे खुश रहो दोस्तों 🌹💖🔥🙏

10/01/2026

🤝छोरे कि गेलया गाम भी खड़या है 🤝













20 साल बाद फोड़ा फूटने पर महिला के शरीर से निकली गोली, स्कूल में लगी चोट का हुआ खुलासाफरीदाबाद की डबुआ कॉलोनी से एक हैरा...
06/01/2026

20 साल बाद फोड़ा फूटने पर महिला के शरीर से निकली गोली, स्कूल में लगी चोट का हुआ खुलासा
फरीदाबाद की डबुआ कॉलोनी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 32 वर्षीय महिला कविता के शरीर से उस समय गोली बाहर निकल आई, जब उनके निचले हिस्से में बना फोड़ा फूट गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह गोली करीब 20 साल पहले स्कूल के दौरान लगी थी, लेकिन तब किसी को इसकी जानकारी नहीं हो पाई थी।
पीड़िता कविता ने बताया कि वह जब 12 वर्ष की थीं और मानेसर के गांव कोटा खांडेवाला स्थित स्कूल में पढ़ती थीं, तब परीक्षा देते समय उनकी कमर के नीचे अचानक किसी नुकीली चीज से चोट लगी थी। उस समय हल्का खून भी निकला था। स्कूल स्टाफ और परिजनों को लगा कि किसी बच्चे ने पत्थर फेंक दिया है। प्राथमिक उपचार के बाद जख्म भर गया और फिर वर्षों तक कोई परेशानी नहीं हुई।

आर्मी ट्रेनिंग कैंप से चली गोली की आशंका
कविता ने बताया कि उनके गांव के पास उस समय आर्मी ट्रेनिंग कैंप हुआ करता था। आशंका जताई जा रही है कि वहीं से चली कम रफ्तार की गोली उनके शरीर में जाकर फंस गई थी। गोली की गति कम होने के कारण वह शरीर के अंदर ही रह गई और लंबे समय तक कोई लक्षण सामने नहीं आए।

फोड़ा फूटते ही बाहर निकली गोली
करीब दो महीने पहले कविता के उसी हिस्से में फोड़ा उभर आया। दवाइयों और घरेलू उपायों के बावजूद आराम नहीं मिला। कुछ दिन बाद जब फोड़ा फूटा तो उसमें से एक नुकीली धातु बाहर निकली, जो नजदीक से देखने पर बंदूक की गोली निकली। यह देखकर पूरा परिवार हैरान रह गया।

बिना ऑपरेशन के सुरक्षित हैं महिला
कविता की शादी वर्ष 2012 में प्रदीप से हुई थी और उनके चार बच्चे हैं। पति प्रदीप ने बताया कि गोली बिना किसी सर्जरी के अपने-आप बाहर निकल आई और फिलहाल कविता पूरी तरह स्वस्थ हैं।

डॉक्टरों की राय
बादशाह खान सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार यदि गोली की रफ्तार कम होती है तो वह शरीर के भीतर रुक सकती है। शरीर की कोशिकाएं उसके चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बना लेती हैं, जिससे वर्षों तक कोई नुकसान नहीं होता। बाद में संक्रमण होने पर गोली फोड़े के माध्यम से बाहर आ सकती है, हालांकि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं।

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