24/08/2026
मस्जिदुल हराम के इमाम व ख़तीब शैख़ डॉक्टर हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान अस-सुदैस ने मीलादुन्नबी ﷺ मनाने के शरई हुक्म से मुतअल्लिक़ एक वज़ाहती बयान में मुसलमानों को सुन्नते नबवी ﷺ की पैरवी इख़्तियार करने और बिदआत से इज्तिनाब की ताकीद की है। उन्होंने कहा कि मुसलमान को नबी करीम ﷺ की इत्तिबा का हुक्म दिया गया है और दीन में ऐसी नई बातें शामिल करने से रोका गया है जो शरीअत का हिस्सा नहीं हैं।
शैख़ अस-सुदैस ने क़ुरआने करीम की आयत का हवाला देते हुए कहा कि अहले ईमान को अल्लाह और उसके रसूल की इताअत का हुक्म दिया गया है और इख़्तिलाफ़ की सूरत में मामला अल्लाह और रसूल की तरफ़ लौटाने की हिदायत दी गई है। उन्होंने नबी करीम ﷺ की इस हिदायत का भी हवाला दिया कि दीन में नई ईजाद की हुई चीज़ों से बचो, क्योंकि हर नई ईजाद की हुई चीज़ बिदअत है और हर बिदअत गुमराही है।
उन्होंने एक दूसरी हदीस का हवाला देते हुए कहा कि नबी करीम ﷺ ने उम्मत में इख़्तिलाफ़ात पैदा होने की सूरत में अपनी सुन्नत और ख़ुलफ़ाए राशिदीन की सुन्नत को मज़बूती से थामने और नई ईजाद किए हुए दीनी उमूर से बचने की ताकीद फ़रमाई है।
शैख़ अस-सुदैस ने कहा कि रबीउल अव्वल में नबी करीम ﷺ की विलादत की मुनासिबत से मीलाद मनाना मशहूर बिदआत में शामिल है। उनके मुताबिक़ नबी करीम ﷺ, सहाबा-ए-किरामؓ, ख़ुलफ़ाए राशिदीन और उनके बाद नेकी के साथ उनकी पैरवी करने वाली इब्तिदाई नस्लों ने मीलाद नहीं मनाया।