04/12/2025
पहला हादसा—गलत कॉल
एक दिन आरव अपने दोस्त को फोन लगाना चाहता था, लेकिन भुलक्कड़पन में गलत नंबर डायल कर बैठा।
“हेलो?” कियारा की आवाज़ आई।
“हेलो, क्या तुम मेरे बकाया पैसे देने वाली हो?”
आरव ने बिना सोचे बोल दिया।
कियारा हँस पड़ी—
“अगर देना होता तो पहले नाम तो बता देते, मिस्टर!”
आरव को समझ आ गया कि कॉल गलत लग गई है।
“ओह! माफ कीजिए… ये गलती से लग गया।”
कियारा ने मज़े लेते हुए कहा—
“कोई नहीं, कभी-कभी गलत कॉल भी लाइफ में सही लोगों तक पहुँचा देती है।”
आरव का कान गरम हो गया… वजह शर्म थी या कुछ और, उसे खुद नहीं पता।
दूसरा हादसा—फिर से गलत कॉल
दो दिन बाद फिर वही हुआ।
“हेलो?” कियारा बोली।
“मुझे कसम है, इस बार सच में गलती से कॉल लगा है!”
आरव घबराया।
“कसमें तो फिल्म के हीरो भी खाते हैं। चलिए मान लेते हैं। वैसे नाम तो बताइए?”
“आरव… और आप?”
“कियारा। चलिए, अब जब दूसरी बार भी गलत कॉल लग गई है तो दोस्ती तो बनती है!”
आरव हड़बड़ा गया—
“दोस्ती? इतनी जल्दी?”
कियारा मुस्कुराई,
“भाई, नंबर आपने दो बार डायल किया है। कोशिश तो आप ही कर रहे हैं।”
पहली मुलाक़ात — और हँसी का तूफ़ान
तीसरी बार कॉल कियारा ने किया।
“आरव, चाय पीने चलोगे? देखना चाहती हूँ कि आप असल में भी इतने ही भुलक्कड़ हो।”
आरव ने डरते-डरते हामी भर दी।
मुलाक़ात के दिन कियारा ने देखा—आरव अच्छे-खासे स्मार्ट थे, बस थोड़े शर्मीले।
और आरव ने देखा—कियारा असल में उससे भी ज्यादा खिलखिलाती हुई थी।
चाय आते ही आरव ने अपना कप गिरा दिया।
कियारा ने तुरंत चुटकी ली—
“अच्छा है, शुरुआत गर्मजोशी से करनी चाहिए!”
दिल की घंटी—या मोबाइल की?
धीरे-धीरे उनकी बातों का सिलसिला बढ़ता गया।
कियारा जान-बूझकर मजेदार सवाल पूछती:
“अगर मैं गुस्सा हो जाऊँ तो?”
“तो… मैं पानी ले आऊँगा।”
“और रोने लगूँ तो?”
“तो… टिश्यू।”
“और प्यार करने लगूँ तो?”
आरव चुप हो गया।
कियारा ने हँसते हुए पूछा, “टिश्यू दोगे?”
आरव ने पहली बार नज़रें उठाकर कहा,
“नहीं… हाथ पकड़ लूँगा।”
कियारा तीन सेकंड तक सीधी खड़ी रही… फिर जोर से हँस पड़ी—
“ओहो! मिस्टर आरव को तो romantic mode में डाल दिया मैंने!”
ट्विस्ट—आरव की ‘तीसरी गलती’
आरव ने सोचा कि अब कियारा को प्रपोज़ करना चाहिए।
उसने एक मैसेज लिखा:
“मुझे लगता है… मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ।”
लेकिन हड़बड़ाहट में मैसेज अपनी बुकशॉप के सप्लायर को भेज दिया।
सप्लायर का जवाब आया:
“पसंद की बात बाद में करेंगे। पहले बिल चुकाइए।”
आरव का चेहरा देखने लायक था।
कियारा को पता चला तो वह हँसते-हँसते कुर्सी से गिर गई।
अंत—गलत कॉल नहीं, सही दिल
शाम को कियारा खुद बुकशॉप पहुँची।
आरव को देखकर बोली—
“चलो, आज मैं सही मैसेज पढ़ लेती हूँ। वो जो सप्लायर को भेजा था।”
आरव शरमा गया,
“कियारा… मैं सच में तुम्हें—”
“श्श्श…” कियारा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“मैं भी पसंद करती हूँ, मिस्टर भुलक्कड़।
अच्छा हुआ गलत कॉल लगाया था… वरना ये सही रिश्ता कैसे मिलता?”
आरव पहली बार हँसा—जोर से, खुलकर।
और कियारा की हँसी उसके दिल में हमेशा के लिए बस गई।