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THE KHABAR AAS PASS एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है जो सुपौल और आसपास के क्षेत्रों की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें प्रकाशित करता है।
हमारा उद्देश्य स्थानीय जनता तक सही जानकारी पहुँचाना है।

पटना के होटल में आधी रात का खौफ! पिता के सामने बेटी को कमरे से खींचने की कोशिश, मचा हड़कंप..बिहार की राजधानी पटना से एक ...
24/05/2026

पटना के होटल में आधी रात का खौफ! पिता के सामने बेटी को कमरे से खींचने की कोशिश, मचा हड़कंप..

बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। रूपसपुर इलाके के एक होटल में देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ युवकों ने पिता के सामने ही उनकी बेटी को होटल के कमरे से जबरन खींचने की कोशिश की। पिता की बहादुरी और शोर मचाने के बाद बड़ी वारदात टल गई।
जानकारी के अनुसार, बेगूसराय निवासी एक व्यक्ति अपनी बेटी को पॉलिटेक्निक परीक्षा दिलाने पटना आए थे। देर रात होने की वजह से दोनों ने रूपसपुर स्थित एक होटल में कमरा लिया। आरोप है कि रात करीब 12:48 बजे अचानक एक युवक कमरे में घुस आया और सो रही छात्रा का हाथ पकड़कर बाहर खींचने लगा। बेटी की चीख सुनते ही पिता की नींद खुली और उन्होंने आरोपी का विरोध किया।
पिता के शोर मचाते ही होटल में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने होटल में छापेमारी कर कई लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस होटल के सीसीटीवी फुटेज और स्टाफ की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि होटल प्रबंधन ने आईडी लेने के बावजूद रजिस्टर में सही एंट्री नहीं की थी। घटना के बाद इलाके में दहशत और लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों ने होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है। राजधानी पटना में हुई इस घटना ने एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार B.Ed CET 2026: आवेदन का आखिरी दिन, 1 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने किया आवेदन..Bihar B.Ed CET 2026 को लेकर छात्रों ...
18/05/2026

बिहार B.Ed CET 2026: आवेदन का आखिरी दिन, 1 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने किया आवेदन..

Bihar B.Ed CET 2026 को लेकर छात्रों में इस बार जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। आज आवेदन की अंतिम तिथि के साथ ही अभ्यर्थियों की संख्या 1 लाख के पार पहुंच गई। राज्यभर से बड़ी संख्या में छात्रों ने ऑनलाइन आवेदन किया।
इस परीक्षा के जरिए बिहार के सरकारी और निजी B.Ed कॉलेजों में एडमिशन दिया जाएगा। परीक्षा का आयोजन राज्य नोडल विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। अंतिम दिन वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखने को मिला, जिसके कारण कई छात्रों को तकनीकी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।
छात्रों के बीच B.Ed को लेकर बढ़ती रुचि का बड़ा कारण शिक्षक भर्ती की संभावनाएं और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते अवसर माने जा रहे हैं। कई जिलों से छात्र देर रात तक साइबर कैफे और ऑनलाइन सेंटर पर आवेदन करते नजर आए।
परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए स्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं, जबकि आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट दी गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही एडमिट कार्ड और परीक्षा तिथि से जुड़ी जानकारी जारी की जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार रिकॉर्ड आवेदन यह दिखाता है कि युवाओं का रुझान शिक्षण पेशे की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अब अभ्यर्थियों की नजर परीक्षा और मेरिट सूची पर टिकी हुई है।

04/05/2026

बंगाल और असम में चुनावी माहौल गरम: ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजे इलाक़े, कार्यकर्ताओं में उत्साह,दोनों राज्य मे बीजेपी का जितना तय माना जा रहा हैl

भ्रष्टाचार की हवा चली और पुल धराशायी—बिहार मॉडल सवालों में....बिहार में एक बार फिर पुल गिरने की खबर ने पूरे सिस्टम पर गं...
04/05/2026

भ्रष्टाचार की हवा चली और पुल धराशायी—बिहार मॉडल सवालों में....

बिहार में एक बार फिर पुल गिरने की खबर ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है—लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ अब इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक खतरनाक पैटर्न बन चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि इन पुलों को गिराने के लिए न भूकंप की ज़रूरत पड़ती है, न बाढ़ की—बस भ्रष्टाचार की हल्की सी हवा चलती है और करोड़ों की लागत से बना ढांचा “विकास” के नाम पर धराशायी हो जाता है।
करोड़ों रुपये के बजट पास होते हैं, मीटिंग पर मीटिंग होती है, फाइलों में योजनाएँ चमकती हैं—लेकिन ज़मीन पर नतीजा वही: अधूरे या कमजोर निर्माण। ऐसा लगता है जैसे पुल बनाने का नहीं, बल्कि यह जांचने का प्रोजेक्ट चल रहा हो कि जनता कितनी सहनशील है और ढांचा कितनी जल्दी गिर सकता है।
यहाँ पुल खड़े कम किए जाते हैं, बल्कि उनकी गिरने की तारीख पहले ही तय कर दी जाती है। ठेकेदारी सिस्टम, कमीशनखोरी और प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा जाल बिछा है कि गुणवत्ता कहीं पीछे छूट गई है। जनता टैक्स भरते-भरते थक चुकी है, लेकिन बदले में मिल रहा है सिर्फ जोखिम और असुरक्षा।
अब हालत यह हो गई है कि बिहार में पुल पार करना एक सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि जोखिम भरा फैसला बन चुका है। अगर यही हाल रहा तो शायद भविष्य में पुलों पर चेतावनी बोर्ड लगाना पड़े—“पार करने से पहले तैरना सीख लें।”
यह सिर्फ एक पुल का गिरना नहीं है, यह पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। सवाल यह है कि आखिर कब तक “विकास” के नाम पर जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा? सरकार को जवाब देना होगा—क्योंकि अब यह मुद्दा सिर्फ ढांचे का नहीं, भरोसे का भी है।

कुरुज (मध्य प्रदेश) में दर्दनाक हादसा: बच्चे को बचाते हुए मां ने दी जान, इलाके में शोक की लहरकुरुज, मध्य प्रदेश:मध्य प्र...
01/05/2026

कुरुज (मध्य प्रदेश) में दर्दनाक हादसा: बच्चे को बचाते हुए मां ने दी जान, इलाके में शोक की लहर

कुरुज, मध्य प्रदेश:मध्य प्रदेश के कुरुज क्षेत्र से एक बेहद भावुक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां ने अपने बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान तक न्योछावर कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और हर किसी की आंखें नम हैं।

जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब मां अपने छोटे बच्चे के साथ पानी के पास मौजूद थी। अचानक बच्चा फिसलकर गहरे पानी में चला गया। बच्चे को डूबता देख मां ने बिना एक पल गंवाए पानी में छलांग लगा दी। उसने पूरी कोशिश की कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल सके।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मां ने आखिरी सांस तक बच्चे को थामे रखा। हालांकि पानी का बहाव और गहराई इतनी अधिक थी कि दोनों को बचाया नहीं जा सका। बाद में स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से दोनों के शवों को बाहर निकाला गया।

इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लोगों का कहना है कि मां ने अपने रिश्ते की सबसे बड़ी मिसाल पेश की है। वह चाहती तो खुद को बचा सकती थी, लेकिन उसने अपने बच्चे की जिंदगी को प्राथमिकता दी।

स्थानीय प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए जांच शुरू कर दी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि पानी के गहरे इलाकों के पास जाते समय विशेष सावधानी बरतें।

“मां” शब्द अपने आप में त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। कुरुज की इस मां ने यह साबित कर दिया कि एक मां अपने बच्चे के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। यह घटना हमेशा एक अमर उदाहरण के रूप में याद रखी जाएगी।

मां तुझे सलाम।

26/04/2026

प्राइवेट स्कूल की मनमानी पर बवाल: किताब न खरीदने पर अभिभावक से बदसलूकी का आरोप....?

हरदोई, उत्तर प्रदेश: जिले के एसपी तिराहा स्थित एक निजी स्कूल में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब एक अभिभावक ने स्कूल द्वारा निर्धारित स्रोत से किताबें खरीदने से इनकार कर दिया। मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और स्कूलों की मनमानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अभिभावक नीलम वर्मा के अनुसार, उन्होंने अपने बच्चे के लिए किताबें पहले से ही एक चिन्हित बुक डीलर से खरीद ली थीं। लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन की ओर से दबाव बनाया गया कि किताबें केवल स्कूल से ही खरीदी जाएं। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो स्कूल परिसर में बहस शुरू हो गई।
नीलम वर्मा का आरोप है कि इस दौरान स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और यहां तक कि बच्चे का नाम काटने की धमकी भी दी। नियमों के खिलाफ है दबाव ?
शिक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान या अपने माध्यम से किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। CBSE और NCERT के नियम स्पष्ट रूप से अभिभावकों को खुली बाजार से किताबें खरीदने की स्वतंत्रता देते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद अभिभावक पक्ष ने प्रशासन से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं? और क्या अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है?
निष्कर्ष:
मामला अभी जांच के दायरे में है, लेकिन अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती मनमानी का भी संकेत

सरकार की नियत साफ या खेल बड़ा? संसद में गिरा आरक्षण बिल....?नई दिल्ली: भारतीय संसद में हाल ही में आरक्षण से जुड़ा बहुचर्...
19/04/2026

सरकार की नियत साफ या खेल बड़ा? संसद में गिरा आरक्षण बिल....?
नई दिल्ली: भारतीय संसद में हाल ही में आरक्षण से जुड़ा बहुचर्चित बिल गिरते ही सियासत गरमा गई है। सवाल सीधा है—क्या सरकार सच में सामाजिक न्याय देना चाहती है, या फिर आरक्षण के नाम पर राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रही थी?
बिल के गिरने के बाद विपक्ष ने तीखा कटाक्ष किया कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो इतनी अहम पहल यूँ अधर में नहीं लटकती। आलोचकों का कहना है कि यह पूरा मामला “इच्छाशक्ति की कमी” से ज्यादा “रणनीतिक राजनीति” का हिस्सा लगता है।
“आरक्षण या चुनावी गणित?”
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार आरक्षण को एक संवेदनशील मुद्दे की तरह नहीं, बल्कि वोट बैंक के औजार की तरह इस्तेमाल कर रही है। संसद में बिल का गिरना इस बात की ओर इशारा करता है कि या तो सरकार ने पर्याप्त समर्थन जुटाने की कोशिश ही नहीं की, या फिर जानबूझकर इसे विवाद में फंसने दिया।
नई संसद, पुरानी चाल?
नई संसद भवन बनने के बाद बड़े बदलावों की उम्मीद थी, लेकिन लोकसभा में यह घटनाक्रम कई सवाल छोड़ गया है। क्या सरकार सिर्फ प्रतीकात्मक बदलावों तक सीमित है, जबकि असली मुद्दों पर ठोस कदम उठाने से बच रही है?
परिसीमन और 545 सीटों की खामोशी
इसी के साथ परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे बड़े मुद्दों पर भी सरकार की चुप्पी विपक्ष के निशाने पर है। आलोचकों का कहना है कि अगर प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात होती, तो शायद राजनीतिक समीकरण बदल जाते—और यही बदलाव सरकार नहीं चाहती।
निष्कर्ष
बिल का गिरना सिर्फ एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। क्या यह असफलता है या सोची-समझी रणनीति—यह बहस अब और तेज़ होने वाली है। फिलहाल, जनता के बीच यही संदेश जा रहा है कि मुद्दा बड़ा था, लेकिन इरादा छोटा रह गया।

सम्राट चौधरी के CM बनते ही जेलों में बड़ी छापेमारीपटना(बिहार ): -बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सम्राट...
17/04/2026

सम्राट चौधरी के CM बनते ही जेलों में बड़ी छापेमारी

पटना(बिहार ): -बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए जाने शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में राज्य के कई जिलों की जेलों में अचानक छापेमारी की गई, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई।
एक साथ कई जिलों में एक्शन
सूत्रों के मुताबिक, पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और गया समेत कई प्रमुख जिलों की जेलों में देर रात विशेष टीमों ने छापा मारा। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
छापेमारी में क्या मिला?
जांच के दौरान कैदियों के बैरकों से कई प्रतिबंधित सामान बरामद किए गए। इनमें मोबाइल फोन, चार्जर, सिम कार्ड, तंबाकू उत्पाद और कुछ संदिग्ध दस्तावेज शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सामान जेल के अंदर से अवैध गतिविधियों को संचालित करने में इस्तेमाल हो सकते थे।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही स्पष्ट कर दिया है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपराध और भ्रष्टाचार पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए।
जेल प्रशासन में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कई जगहों पर ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिबंधित सामान अंदर कैसे पहुंचा।
आगे क्या?
सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुपौल की शान: बिजेंद्र प्रसाद यादव बने बिहार के उपमुख्यमंत्री..सुपौल जिले के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि क्षेत्र के वरि...
15/04/2026

सुपौल की शान: बिजेंद्र प्रसाद यादव बने बिहार के उपमुख्यमंत्री..
सुपौल जिले के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि क्षेत्र के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके इस महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने से पूरे सुपौल में खुशी और उत्साह का माहौल है।
बिजेंद्र प्रसाद यादव लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और अपने अनुभव, सादगी तथा जनसेवा के लिए जाने जाते हैं। सुपौल और कोसी क्षेत्र के विकास में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उनके उपमुख्यमंत्री बनने से क्षेत्र के लोगों को अब और अधिक विकास की उम्मीदें हैं।
स्थानीय लोगों और समर्थकों ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुपौल के लिए ऐतिहासिक दिन है। जगह-जगह मिठाइयां बांटी जा रही हैं और जश्न का माहौल बना हुआ है।
बिजेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में बिहार और खासकर सुपौल जिले के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

फारबिसगंज में खौफनाक वारदात: ठेले वाले ने ड्राइवर का सिर किया धड़ से अलग, भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला..बिहार के ...
09/04/2026

फारबिसगंज में खौफनाक वारदात: ठेले वाले ने ड्राइवर का सिर किया धड़ से अलग, भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला..

बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बाजार समिति गेट के पास मामूली विवाद ने देखते ही देखते खूनी रूप ले लिया, जहां एक ठेला चालक ने पिकअप ड्राइवर की गला काटकर हत्या कर दी। घटना इतनी भयावह थी कि आरोपी ने युवक का सिर धड़ से अलग कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। शुरुआत में विवाद सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक ही ठेला चालक ने धारदार हथियार निकालकर ड्राइवर पर हमला कर दिया। मौके पर ही ड्राइवर की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद इलाके में गुस्से का माहौल बन गया। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। भीड़ का गुस्सा इतना बढ़ गया कि आरोपी की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस तरह यह घटना दोहरी हत्या (डबल मर्डर) में बदल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी वारदात दिनदहाड़े होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फ़ाइल फोटो)

बिहार में शस्त्र लाइसेंस पर सख्ती: लंबित आवेदनों के जल्द निपटारे के निर्देश..पटना: बिहार में शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी लंब...
08/04/2026

बिहार में शस्त्र लाइसेंस पर सख्ती: लंबित आवेदनों के जल्द निपटारे के निर्देश..
पटना: बिहार में शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी लंबित फाइलों को लेकर अब प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। राज्य के गृह विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जाए।
नए आदेश के बाद जिलों में लंबित मामलों की समीक्षा शुरू होने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बिना कारण फाइलों को लंबित न रखा जाए और प्रक्रिया में पारदर्शिता व तेजी लाई जाए।
गृह विभाग का मानना है कि लंबे समय से लंबित आवेदनों के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब इस नई पहल से न सिर्फ प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि सिस्टम में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में जिलावार समीक्षा कर प्रगति की निगरानी की जाएगी। साथ ही जिन मामलों में अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी संभव है।
इस फैसले के बाद आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें शस्त्र लाइसेंस के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

सांकेतिक चित्र

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