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THE KHABAR AAS PASS एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है जो सुपौल और आसपास के क्षेत्रों की ताज़ा, सटीक और निष्पक्ष खबरें प्रकाशित करता है।
हमारा उद्देश्य स्थानीय जनता तक सही जानकारी पहुँचाना है।

24/08/2026

अंतिम सोमवारी पर भक्ति में डूबा महादेव बाबा राम जानकी मंदिर..
सावन की अंतिम सोमवारी के पावन अवसर पर महादेव बाबा राम जानकी मंदिर, वार्ड नंबर 15, चिलौनी उत्तर, प्रतापगंज, सुपौल (बिहार) में भव्य कीर्तन-भजन एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में शामिल होकर भगवान शिव की आराधना की और सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
भक्ति, आस्था और उल्लास से सराबोर हुआ पूरा मंदिर परिसर।
हर हर महादेव 🙏

21/08/2026

जंतर-मंतर पर फिर उठा आरक्षण का सवाल: क्या सरकार सवर्णों की आवाज़ सुनना ही नहीं चाहती?
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर आरक्षण की राजनीति का गवाह बना। जातिगत आरक्षण के विरोध और आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गरीब चाहे किसी भी जाति का हो, सरकारी सहायता और अवसर का आधार उसकी आर्थिक स्थिति होनी चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि जब आंदोलन शांतिपूर्ण हो, तो फिर उसकी आवाज़ को दबाने की कोशिश क्यों?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल और RAF की तैनाती की गई। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान में NOC दी गई थी।
लेकिन यहीं से लोकतंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
क्या लोकतंत्र में सिर्फ वही आवाज़ सुनी जाएगी, जिसके पीछे राजनीतिक ताकत हो?
आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाना कोई अपराध नहीं है। किसी व्यवस्था में सुधार की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर प्रदर्शनकारी हिंसा नहीं कर रहे, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा रहे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, तो सरकार को उनकी बात सुनने के लिए संवाद का रास्ता खोलना चाहिए।
आज सवाल सिर्फ आरक्षण का नहीं है। सवाल यह है कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन सामान्य वर्ग से आने वाले गरीबों की समस्याओं पर भी सरकार उतनी ही गंभीरता से विचार करेगी, जितनी अन्य वर्गों की समस्याओं पर करती है?
सरकार को यह समझना होगा कि किसी भी समाज में लंबे समय तक किसी वर्ग की शिकायतों को नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। आज आंदोलन जंतर-मंतर तक सीमित है, लेकिन अगर सरकार ने इस असंतोष को समझने की कोशिश नहीं की तो यही आवाज़ आने वाले समय में राजनीतिक सवाल बन सकती है।
और सरकार से सीधा सवाल—
अगर गरीब की पहचान उसकी आर्थिक स्थिति से होती है, तो अवसर और सहायता का आधार भी आर्थिक स्थिति क्यों नहीं होनी चाहिए?
आरक्षण पर सरकार की नीति चाहे जो हो, लेकिन आवाज़ उठाने वालों को सुनना लोकतंत्र की मजबूरी नहीं, लोकतंत्र की खूबसूरती है।
सवाल यह नहीं कि प्रदर्शनकारी किस वर्ग से आते हैं।
सवाल यह है कि क्या सरकार हर नागरिक की आवाज़ बराबर सुनती है?
अगर जवाब हाँ है, तो सरकार को इन प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए।
और अगर जवाब नहीं है, तो फिर सवाल उठेगा—क्या लोकतंत्र में भी आवाज़ की कीमत जाति और राजनीतिक ताकत देखकर तय होने लगी है?

21/08/2026

संसद मार्ग थाने पर भारी बवाल! छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल हुए छात्र साहिल की FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे। FIR दर्ज नहीं होने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी थाने में धरने पर बैठ गए। वहीं, बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक थाने के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।
पुलिस की ओर से बार-बार अनाउंसमेंट कर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और थाने के बाहर का रास्ता खाली करने की अपील की जा रही है। हालांकि, इसके बावजूद भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। मौके पर बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी और कांग्रेस नेता भी पहुंच रहे हैं।

21/08/2026

राहुल गांधी संसद मार्ग थाना में धरने पर बैठे हैं। जैसे ही उनके यहां धरने पर बैठने की खबर सामने आई, संसद मार्ग थाना परिसर में मीडिया और नेताओं का जमावड़ा लग गया। बड़ी संख्या में पत्रकार और नेता मौके पर पहुंच गए। आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि थाना परिसर में मीडिया और नेताओं की भारी भीड़ मौजूद है।

झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज… सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, सियासत से भी है...झारखंड में अपने हक और भविष्य की मांग को लेक...
10/08/2026

झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज… सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, सियासत से भी है...
झारखंड में अपने हक और भविष्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर आज विधानसभा मार्च के दौरान लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दिल्ली में छात्रों का आंदोलन हुआ था, तब विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा होकर केंद्र सरकार को घेर रहा था, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तक हो रही थी… तो आज झारखंड में छात्रों पर कार्रवाई हुई तो वही राजनीतिक आवाजें इतनी कमजोर क्यों दिखाई दे रही हैं?
क्या छात्र का दर्द सत्ता और विपक्ष के हिसाब से बदल जाता है?
दिल्ली में छात्र आंदोलन हो तो वह मुद्दा बन जाता है और झारखंड में छात्र सड़क पर उतरें तो क्या उसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला मान लिया जाएगा?
छात्र आखिर जाएं तो जाएं कहां?
देश का छात्र परीक्षा में ईमानदारी चाहता है, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहता है और अपने भविष्य की गारंटी चाहता है। अगर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए उसे बार-बार सड़क पर उतरना पड़े और फिर लाठियां खानी पड़ें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
और एक बड़ा सवाल…
क्या भारत में अब छात्रों का आंदोलन भी राजनीतिक चश्मे से देखा जाने लगा है?
जिस पार्टी की सरकार हो, क्या उसी के हिसाब से छात्र आंदोलन की आवाज तय होगी?
छात्र किसी पार्टी का कार्यकर्ता नहीं है।
वह देश का भविष्य है।
सरकार किसी भी दल की हो—छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए, उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए।
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन छात्रों का भविष्य उससे ऊपर होना चाहिए।
आपकी क्या राय है?
क्या छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए?
कमेंट में अपनी राय जरूर दें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि छात्रों की आवाज सत्ता तक पहुंच सके।

07/08/2026

बारिश में फिर ‘तालाब’ बनी दिल्ली की सड़कें...

दिल्ली में बारिश के बाद जगह-जगह जलजमाव की तस्वीरें सामने आ रही हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पर इतना पानी भरा है कि राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारें बदलीं, दिल्ली में बीजेपी की सरकार आई, केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है—फिर भी जलजमाव की समस्या जस की तस!
सवाल है—हर साल बारिश में दिल्ली क्यों डूबती है? आखिर स्थायी समाधान कब होगा...?

वीडियो को अधिक से अधिक Like, Comment और Share करें।

ताकि सरकार के कानों तक भी दिल्ली की आम जनता की यह आवाज़ पहुँचे और उन्हें पता चले कि बारिश के बाद राजधानी की सड़कों पर लोगों को किन परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।

जनता मालिक है, तो जनता की इस परेशानी की आवाज़ सरकार तक पहुँचना भी जरूरी है।

प्रशांत किशोर की जीत: बीजेपी और विपक्ष, दोनों के लिए बड़ी चुनौती...?पटना/बाँकीपुर:- बाँकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के सूत...
03/08/2026

प्रशांत किशोर की जीत: बीजेपी और विपक्ष, दोनों के लिए बड़ी चुनौती...?
पटना/बाँकीपुर:- बाँकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यह जीत केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत ने सत्तारूढ़ बीजेपी और पारंपरिक विपक्ष, दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि जन सुराज आने वाले चुनावों में इसी तरह मतदाताओं का विश्वास हासिल करती रही, तो बिहार की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे समीकरण बदल सकते हैं।
प्रशांत किशोर लगातार विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर शासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनकी जीत को ऐसे मतदाताओं के समर्थन के रूप में भी देखा जा रहा है, जो पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प तलाश रहे हैं।
हालाँकि, एक उपचुनाव के नतीजे के आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी। आने वाले विधानसभा चुनाव तय करेंगे कि यह जीत एक स्थानीय सफलता थी या बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशांत किशोर इस जीत की लहर को पूरे बिहार में कायम रख पाएँगे, या पारंपरिक दल नई रणनीति के साथ वापसी करेंगे?

क्या बांकीपुर के मतदाता लोकतंत्र से उम्मीद छोड़ रहे हैं...?पटना (बिहार ):-बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार ...
31/07/2026

क्या बांकीपुर के मतदाता लोकतंत्र से उम्मीद छोड़ रहे हैं...?

पटना (बिहार ):-बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार घटता मतदान प्रतिशत कई सवाल खड़े कर रहा है। कल जो उपचुनाव हुआ है उसमे सिर्फ 34.24% मतदान हुआ है lक्या मतदाताओं को लगने लगा है कि उनके एक वोट से कुछ बदलने वाला नहीं? या फिर इसके पीछे पलायन, जागरूकता की कमी और स्थानीय समस्याएँ जिम्मेदार हैं?
यदि लोकतंत्र को मजबूत बनाना है, तो हर वोट की भागीदारी जरूरी है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और समाज—सभी को मिलकर यह समझना होगा कि आखिर मतदाता मतदान केंद्र तक क्यों नहीं पहुँच रहे हैं।
आपकी क्या राय है? क्या कम मतदान की वजह लोगों की निराशा है, या इसके पीछे कोई और कारण हैं?
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

25/07/2026

छात्र की बडी जीत,शिक्षा मंत्री प्रधान की इस्तीफा..

24/07/2026

24 जुलाई: छात्रों का देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन, जंतर-मंतर पर उमड़ा जनसैलाब...

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